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क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिनकी जिंदगी 'सैलरी टू सैलरी' चलती है? महीने की पहली तारीख को अकाउंट में पैसा आता है और 15-20 तारीख आते-आते सब साफ हो जाता है. खर्चे मुंह फाड़े खड़े रहते हैं और महीने के अंत में आपके हाथ में सिर्फ निराशा होती है. अगर ये आपकी कहानी है, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं. लेकिन इस आदत को बदलना बहुत जरूरी है, क्योंकि बचत के बिना आपका भविष्य असुरक्षित हो सकता है. यहां जानिए वो तरीका जिससे आप आसानी से पैसों की बचत कर पाएंगे. फिर चाहे महीने के अंत में आप पूरी सैलरी उड़ा भी दें, आपको कोई पछतावा नहीं होगा.
ज्यादातर लोगों की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि वे बचत के लिए महीने के अंत का इंतजार करते हैं.
इस फॉर्मूले में दिक्कत ये है कि हमारे खर्चे कभी कम नहीं होते और महीने के अंत तक बचत के लिए कुछ बचता ही नहीं है. अगर आप सच में पैसे बचाने के तरीके खोज रहे हैं, तो आपको इस फॉर्मूले को उलटना होगा. सफल फाइनेंशियल प्लानिंग का सबसे शक्तिशाली नियम है - "Pay Yourself First" यानी "सबसे पहले खुद को भुगतान करें". इसका मतलब है कि आपको अपने खर्चों से पहले अपनी बचत और निवेश के लिए पैसा निकालना होगा. आपका नया फॉर्मूला होना चाहिए: कमाई - बचत = खर्च. ये छोटा सा बदलाव एक 'गेम चेंजर' है. इसका मतलब है कि सैलरी आते ही, आपको सबसे पहले अपनी बचत का हिस्सा अलग करना है. इसके बाद जो पैसा बचेगा, आपको उसी में अपना पूरा महीना चलाना है.
एक सामान्य फाइनेंशियल रूल कहता है कि आपको अपनी आय का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा हर हाल में बचाना और निवेश करना चाहिए. उदाहरण के लिए अगर आपकी सैलरी ₹40,000 है, तो इसका 20% यानी ₹8,000 हुआ.
क्या करें: सैलरी अकाउंट में आते ही, सबसे पहले यह ₹8,000 किसी दूसरे सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर कर दें या सीधे निवेश कर दें. अब आपके पास खर्च करने के लिए ₹32,000 हैं. आपको अपना पूरा महीना इसी रकम में मैनेज करना होगा. शुरुआत में ये मुश्किल लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाएगा और आपका सैलरी मैनेजमेंट अपने आप सुधर जाएगा.
अब सवाल उठता है कि इन बचाए हुए 20% पैसों को कहां निवेश करें? सिर्फ बैंक में रखने से पैसा नहीं बढ़ेगा. आपको इसे काम पर लगाना होगा. आप अपनी जोखिम क्षमता और लक्ष्यों के अनुसार इन विकल्पों को चुन सकते हैं:
ये म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका है. आप हर महीने एक छोटी रकम (जैसे ₹500 से भी) निवेश कर सकते हैं. लंबी अवधि में SIP ने शानदार रिटर्न दिया है.
ये एक सरकारी स्कीम है, जो पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें टैक्स छूट का भी फायदा मिलता है. यह लंबी अवधि के लिए एक बेहतरीन विकल्प है.
अगर आप बिल्कुल भी जोखिम नहीं लेना चाहते, तो RD एक अच्छा विकल्प है. इसमें आपको निश्चित ब्याज मिलता है.
अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपका EPF कटता है, तो आप VPF के जरिए अपना योगदान बढ़ा सकते हैं. इस पर भी EPF जितना ही शानदार ब्याज मिलता है.
जब आप सैलरी का 20% हिस्सा पहले ही निवेश कर देंगे, तो आपको बाकी 80% में ही गुजारा करना होगा. इसके लिए आपको अपने फिजूल खर्चों पर कैंची चलानी होगी जैसे-
अगर 20% बचाना मुश्किल लग रहा है, तो 10% से शुरुआत करें. जरूरी ये है कि आप शुरुआत करें. धीरे-धीरे जब आपकी आदत बन जाए और आय बढ़े, तो इसे बढ़ाकर 15% और फिर 20% तक ले जाएं.
SIP इक्विटी बाजार से जुड़ा होता है, इसलिए इसमें अल्पकालिक जोखिम होता है. लेकिन अगर आप 5-7 साल या उससे ज्यादा लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, तो जोखिम काफी कम हो जाता है और रिटर्न की संभावना बढ़ जाती है.
निवेश करने का सबसे अच्छा समय 'आज' है. आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे, कम्पाउंडिंग की ताकत का उतना ही ज्यादा फायदा आपको मिलेगा. सैलरी आने के पहले हफ्ते में ही निवेश करना सबसे अच्छी रणनीति है.