पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने का ये सीक्रेट देख गायब हो जाएगी रिस्क नाम की 'चिड़ियां', स्मार्ट निवेशक हमेशा करते हैं इसे फॉलो

कई निवेशक अच्छे रिटर्न के चक्कर में एक ही शेयर या फंड में ज्यादा पैसा लगा देते हैं, जिससे उनका पोर्टफोलियो कंसंट्रेटेड हो जाता है. ऐसा पोर्टफोलियो बाजार गिरने पर भारी नुकसान देता है और पूरी इन्वेस्टमेंट स्कीम रिस्क में डाल देता है.
पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने का ये सीक्रेट देख गायब हो जाएगी रिस्क नाम की 'चिड़ियां', स्मार्ट निवेशक हमेशा करते हैं इसे फॉलो

आज के टाइम में ज्यादातर लोग इन्वेस्टमेंट तो भर-भर के करते हैं, लेकिन सही प्लानिंग से अक्सर चूक जाते हैं. असल में कई बार इन्वेस्टक एक ही शेयर, म्यूचुअल फंड या किसी एक ही एसेट पर जरूरत से ज्यादा भरोसा कर बैठते हैं. लेकिन किसी एक इन्वेस्टमेंट से लगातार अच्छा रिटर्न मिलने लगता है, तो लोग सोचते हैं कि यही सही रास्ता है और अपना ज्यादातर पैसा उसी में लगा देते हैं. बस यहीं लोग गलत कर रहे हैं, असल में यही स्थिति आगे चलकर “कंसंट्रेटेड पोर्टफोलियो”(Concentrated Portfolio) बन जाती है, जो दिखने में फायदे का सौदा लगता है, लेकिन असल में बहुत रिस्क से भरा होता है.


यानी कि सिंपल शब्दों में कहें तो जब आपके पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा केवल एक या दो इन्वेस्टमेंट ऑप्शन में फंसा हो, तो उसे केंद्रित या कंसंट्रेटेड पोर्टफोलियो कहा जाता है. ऐसी में अगर उस शेयर, सेक्टर या एसेट में गिरावट आती है, तो आपके पूरे इन्वेस्टमेंट पर सीधा असर पड़ता है.जिसका नतीजा ये होता है कि कई बार सालों की मेहनत की कमाई कुछ ही महीनों में भारी नुकसान में बदल जाती है.

भरोसा पर एक में बार-बार लगाते हैं पैसा

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  • अच्छे पुराने रिटर्न निवेशकों को जरूरत से ज्यादा भरोसा दिला देते हैं.
  • एक शेयर में मुनाफा मिलने पर लोग उसी पर टिके रहते हैं.
  • निवेशक मान लेते हैं कि वही शेयर आगे भी बेनेफिट्स देगा.
  • भरोसे में वे बार-बार उसी में पैसा लगाते हैं.
  • यही ज्यादा भरोसा आगे चलकर बड़ा रिस्क बन जाता है.

रिस्क बिगाड़ेगा पोर्टफोलियो

  • केंद्रित पोर्टफोलियो अचानक बाजार गिरने पर सबसे ज्यादा रिस्क में होता है.
  • किसी एक सेक्टर में मंदी आने से नुकसान कई गुना बढ़ जाता है.
  • अगर सारा पैसा एक ही सेक्टर में है, तो रिक्क बहुत बड़ा हो जाता है.
  • आईटी या बैंकिंग जैसे सेक्टर में गिरावट पूरा पोर्टफोलियो बिगाड़ सकती है.
  • ऐसे टाइम में नुकसान की भरपाई मुश्किल हो जाती है.
  • एक जगह निवेश करना सबसे बड़ी गलती मानी जाती है.
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डायवर्सिफिकेशन इन्वेस्टमेंट के लिए है जरूरी

  • डायवर्सिफिकेशन यानी निवेश को अलग-अलग जगह बांटना.
  • शेयर, म्यूचुअल फंड, डेट और गोल्ड में निवेश से जोखिम कम होता है.
  • एक जगह नुकसान होने पर दूसरी जगह से भरपाई हो जाती है.
  • यह प्लानिंग इन्वेस्टमेंट को ज्यादा सेफ बनाती है.
  • लॉन्ग टाइम में रिटर्न भी ज्यादा स्थिर रहता है.

सुधारकर हराभरा बनाएं पोर्टफोलियो

  • अगर पोर्टफोलियो एक तरफ ज्यादा झुका है, तो घबराने की जरूरत नहीं.
  • इसे आसानी से सुधारा जा सकता है.
  • आप पहले अपने सभी निवेशों का रिव्यू करें.
  • चेक करें किस एसेट में कितना पैसा लगा है.
  • जांचें कहीं एक ही निवेश में ज्यादा रकम तो नहीं.
  • ज्यादा पैसे वाले निवेश को धीरे-धीरे कम करें.
  • पैसा सेफ और मल्टीपल ऑप्शन में शिफ्ट करें.
  • बदलाव एक साथ नहीं, धीरे-धीरे करना बेहतर होता है.


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पोर्टफोलियो रीबैलेंस करना ना भूलें

  • टाइम-टाइम पर पोर्टफोलियो रीबैलेंस करना जरूरी है.
  • हर 6 महीने या साल में एक बार रिव्यू करें.
  • बदलते मार्केट के हिसाब से प्लानिंग अपडेट करें.
  • उम्र और आमदनी के अनुसार निवेश बदलें.
  • अपने फाइनेंशियल टारगेट को ध्यान में रखें.
  • सिर्फ मुनाफे पर नहीं, सेफ्टी पर भी फोकस करें.
  • सेफ पैसा ही लंबे समय में असली कमाई देता है.(नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, निवेश के लिए वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव लें)

खबर से जुड़े 5 अहम FAQs

Q1. केंद्रित पोर्टफोलियो क्या होता है?
जब किसी निवेशक का ज्यादा पैसा सिर्फ एक या दो जगह लगा हो, तो उसे केंद्रित पोर्टफोलियो कहा जाता है.

Q2. केंद्रित पोर्टफोलियो जोखिम भरा क्यों है?
क्योंकि एक ही सेक्टर या शेयर में गिरावट आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर पड़ता है.

Q3. डायवर्सिफिकेशन क्या होता है?
अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश को डायवर्सिफिकेशन कहते हैं, जिससे जोखिम कम होता है.

Q4. पोर्टफोलियो को कितनी बार रीव्यू करना चाहिए?
कम से कम साल में एक बार पोर्टफोलियो की समीक्षा जरूर करनी चाहिए.

Q5. क्या छोटे निवेशक भी डायवर्सिफिकेशन कर सकते हैं?
हां, म्यूचुअल फंड और SIP के जरिए छोटे निवेशक भी आसानी से डायवर्सिफिकेशन कर सकते हैं.

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ऐश्वर्य अवस्थी

ऐश्वर्य अवस्थी

असिस्टेंट न्यूज एडिटर, ज़ी बिज़नेस डिजिटल

ऐश्वर्य अवस्थी, ज़ी बिज़नेस डिजिटल टीम में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (Assistant News Editor) के पद पर हैं. जर्नल

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