केंद्र सरकार ने लेबर कोड लागू होने के शुरुआती दो महीनों के बाद एक धारणा-आधारित (Perception-based) स्टडी कराई है. इस स्टडी में कर्मचारियों और नियोक्ताओं, दोनों की राय को शामिल किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, लेबर कोड को लेकर वर्कर्स और एम्प्लॉयर्स दोनों ही काफी हद तक सेटिस्फाइड नजर आ रहे हैं और जॉब सिक्योरिटी व सोशल सिक्योरिटी को लेकर बेहतर माहौल बनता दिख रहा है.
लेबर कोड के 2 महीने परसेप्शन पर सरकार ने की स्टडी क्या है?
एंप्लॉई और एम्प्लॉयर्स संतुष्ट हैं और जॉब सिक्योरिटी को लेकर बेहतर माहौल बनने का रास्ता साफ हो रहा है
सोशल सिक्योरिटी कवरेज का दायरा Gig Workers तक बढ़ने लगा है
डिजटल इंफ्रा से पेमेंट व्यवस्था में सुधार आ रहा है
महिलाओं के लिए माहौल बेहतर होने लगा है
इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स घटने की उम्मीद
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लेबर कोड की स्टडी में क्या आया है सामने
- गिग वर्कर्स तक सोशल सिक्योरिटी कवरेज का दायरा बढ़ने लगा है
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से पेमेंट सिस्टम में सुधार हो रहा है
- महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर माहौल पहले से बेहतर हो रहा है
- इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स (औद्योगिक विवाद) घटने की उम्मीद बढ़ी है
स्टडी कैसे की गई? (Data & Method)
- यह सरकारी स्टडी प्राइमरी सर्वे पर आधारित है.
- वर्कर्स और एम्प्लॉयर्स से वन-टू-वन इंटरव्यू, मीटिंग्स और फोकस्ड ग्रुप डिस्कशन के जरिए जानकारी जुटाई गई.
- सैंपल साइज
- कर्मचारी (Workers): 5,720
- नियोक्ता (Employers): 715
- कुल उत्तरदाता: 6,435
यह सर्वे 21 नवंबर 2025 से 21 जनवरी 2026 के बीच हुआ है,यानी लेबर कोड लागू होने के पहले दो महीनों में बनी शुरुआती एक्सपीरियंस को पेश करता है.
नियोक्ताओं की राय (Employers’ Perception)
सामाजिक सुरक्षा और मानक कर्मचारी
- गैर-मानक कर्मचारियों के लिए योगदान (Contribution) की जिम्मेदारियां अब ज्यादा साफ हो रही हैं.
- गिग और कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को जो फॉर्म-फिलिंग और ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे, उन परेशानियों को कम करने पर अब फोकस बढ़ा है.
- ज्यादा लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना एक अच्छा और सही कदम माना जा रहा है
रोजगार संबंध और सुरक्षा
- नियोक्ताओं का मानना है कि जब सभी वर्कर्स के लिए सेफ्टी के रूल बराबर होंगे, तो सिस्टम ज्यादा आसान और साफ रहेगा.
- बीमारी होने के बाद इलाज से बेहतर, पहले ही हेल्थ चेक-अप जैसी सुविधाओं को लोग आज के समय की स्मार्ट व्यवस्था मान रहे हैं.
- वर्किंग प्लेस को लेकर नियोक्ता की जिम्मेदारी अब ज्यादा अच्छी हो रही है.
- श्रम संहिता के नतीजे सेक्टर-विशेष जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं.
वेतन और रोजगार की शर्तें
- लोगों का मानना है कि फिक्स्ड-टर्म नौकरी आज के समय में एक सही और काम की व्यवस्था है.
- कंपनियों को यह भी लगता है कि अगर कर्मचारियों को जरूरत के हिसाब से काम पर रखा जा सके, तो बिजनेस ज्यादा समय तक टिकेगा.
- लेबर कोड को धीरे-धीरे लागू करना बेहतर माना जा रहा है, ताकि खर्च का दबाव एक साथ न पड़े.
- समय पर सैलरी मिलने से कामकाज में अनुशासन आएगा और जब वेतन से जुड़ी बातें साफ-साफ होंगी, तो झगड़े और विवाद भी कम होंगे.
कर्मचारियों की राय-जरूरी बातें (Workers’ Perception)
जागरूकता और समझ
- करीब 50% कर्मचारी लेबर कोड से वाकिफ हैं.
- 70% को भरोसा है कि समय के साथ उनकी समझ और बेहतर होगी.
- उतने ही कर्मचारियों का मानना है कि सही गाइडेंस मिलने पर वे लेबर कोड से फायदा उठा सकते हैं.
सेफ्टी और महिला भागीदारी
- 64% कर्मचारियों को शिकायत के सॉल्यूशन की जानकारी है.
- 63% मानते हैं कि अनिवार्य सुरक्षा उपकरण और नियम कामकाजी हालात सुधारेंगे.
- महिलाओं के मामले मे 66% का कहना है कि सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और निगरानी से उन्हें ज्यादा संरक्षण मिलेगा.
वेतन और इनकम सेफ्टी
- 64% कर्मचारियों को भरोसा है कि न्यूनतम वेतन और टाइम पर भुगतान जैसी ऑप्शन सुरक्षा बढ़ाएंगे.
- 76% मानते हैं कि वर्कफोर्स फ्लेक्सिबिलिटी से बिजनेस ज्यादा टिकाऊ होगा.
- 64% के अनुसार फिक्स्ड-टर्म रोजगार से जॉब क्रिएशन बढ़ेगा.
- उतने ही लोग मानते हैं कि समय पर वेतन से अनुशासन बेहतर होगा.
| संभावित सकारात्मक प्रभाव | आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 | नियोक्ताओं की राय | श्रमिकों की राय |
|---|
| भावित असर | आर्थिक सर्वे अनुमान | नियोक्ताओं की राय | श्रमिकों की राय |
|---|
| पंजीकरण व रिपोर्टिंग आसान होने से अनुपालन लागत में कमी | 30–40% तक | 50% | – |
| छंटनी सीमा बढ़ने से कंपनियों का छोटा बने रहना घटेगा | – | 62% | – |
| फिक्स्ड-टर्म रोजगार से भर्ती व स्थिरता बढ़ेगी | – | 64% | – |
| गिग वर्कर्स तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार | 2030 तक 2.35 करोड़ | 62% | 60% |
| UAN से प्रवासी श्रमिकों को लाभों की पोर्टेबिलिटी | – | – | 63% |
| वेतन सुधार से खपत बढ़ने की संभावना | ₹75,000 करोड़ | – | 64% |
| महिला श्रम भागीदारी में बढ़ोतरी (नाइट शिफ्ट आदि) | +3.3% अंक | 71% | 60% |
| संगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़ने की उम्मीद | 1.0–2.2% | 62% | 56% |
| औपचारिकरण व कुल सामाजिक सुरक्षा कवरेज में विस्तार | 60.4% → 75.5% | 62% | 56% |
रोजगार संबंध और सामाजिक सुरक्षा
- 73% कर्मचारी सभी श्रमिकों के लिए समान सुरक्षा मानकों का स्वागत करते हैं
- 63% का कहना है कि लेबर कोड से नियोक्ता की जिम्मेदारी साफ हुई है
- 59% निवारक हेल्थ सुविधाओं का समर्थन करते हैं
- 71% मानते हैं कि लेबर कोड से महिला श्रम भागीदारी बढ़ेगी
- 62% को भरोसा है कि सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा बढ़ेगा
आर्थिक सर्वे 2025-26 और परसेप्शन स्टडी में सामंजस्य
- स्टडी और आर्थिक सर्वे,दोनों के नतीजे बताते हैं कि
- अनुपालन(compliance) लागत 30–40% तक घट सकती है
- 2030 तक 2.35 करोड़ गिग वर्कर्स सामाजिक सेफ्टी के दायरे में आ सकते हैं
- वेतन सुधार से ₹75,000 करोड़ तक खपत बढ़ने के चांस है
- महिला श्रम भागीदारी में 3.3 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हो सकती है
- कुल सामाजिक सेफ्टी कवरेज 60.4% से बढ़कर 75.5% तक जा सकता है
Conclusion
स्टडी के मुताबिक, वर्कर्स और एम्प्लॉयर्स दोनों का मानना है कि लेबर कोड से जीवन-यापन आसान होगा और बिजनेस करना भी सरल बनेगा.
रिपोर्ट यह भी साफ करती है कि-
- लेबर कोड कोई एकतरफा सुधार नहीं है,
- यह श्रम सुधारों के लिए एक साझा और संस्थागत ढांचा तैयार कर रहा है
- इससे श्रमिकों के अधिकार मजबूत होंगे
- सोशल सिक्योरिटी का दायरा बढ़ेगा
- इनकम सेफ्टी और वेतन पारदर्शिता में सुधार आएगा
महिला कर्मचारी मानती हैं कि नए प्रावधान उनकी सेफ्टी बढ़ाएंगे, वहीं नियोक्ता भी नाइट शिफ्ट जैसी व्यवस्थाओं को लेकर सकारात्मक रुख दिखा रहे हैं. कुल मिलाकर, यह स्टडी भारत में आधुनिक और संतुलित लेबर सिस्टम की ओर बढ़ते कदम की तस्वीर पेश करती है.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 सरकार ने यह स्टडी क्यों कराई?
लेबर कोड लागू होने के शुरुआती असर को समझने और कर्मचारियों व नियोक्ताओं की राय जानने के लिए यह परसेप्शन-आधारित स्टडी कराई गई.
Q2 इस स्टडी में किन लोगों को शामिल किया गया?
इस सर्वे में 5,720 कर्मचारी और 715 नियोक्ता शामिल किए गए, यानी कुल 6,435 लोगों की राय ली गई.
Q3 गिग वर्कर्स को क्या फायदा होता दिख रहा है?
स्टडी के मुताबिक, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स तक सोशल सिक्योरिटी कवरेज का दायरा बढ़ने लगा है, जिसे बड़ा सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है.
Q4 महिलाओं के लिए क्या सुधार सामने आए हैं?
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, नाइट शिफ्ट की अनुमति, ट्रांसपोर्ट और मॉनिटरिंग जैसे प्रावधानों को ज्यादातर वर्कर्स और एम्प्लॉयर्स ने सकारात्मक बताया है.
Q5 लेबर कोड से भविष्य में क्या बदलाव आ सकते हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, लेबर कोड से जॉब सिक्योरिटी मजबूत होगी, वेतन पारदर्शिता बढ़ेगी, इंडस्ट्रियल विवाद कम होंगे और बिजनेस करना आसान होगा.