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बीमा नियामक IRDAI ने बनाया नियम. (Dna)
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां अब किसी भी बीमारी का क्लेम देने से मना नहीं कर पाएंगी. खासकर दफ्तर में कामकाज के दौरान जोखिम भरे काम और अन्य बीमारियों मसलन-मानसिक रोग, एज फैक्टर और जन्म से जुड़ी बीमारी. आपको बता दें कि बीमा नियामक IRDAI ने इसके लिए एक पैनल बनाया था, जिसने दिसंबर 2018 में रिपोर्ट सौंप दी थी. इस रिपोर्ट में ही हर तरह की बीमारी के कवरेज की सिफारिश थी. IRDAI अब इसे लागू करने की तैयारी में है.
IRDAI ने कहा कि कई बार कंपनियां कैटरैक्ट सर्ज, नी-कैप रिप्लेसमेंट, अल्जाइमर और पार्किंसन के इलाज को कवरेज में शामिल नहीं करतीं. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक अब हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों को इन बीमारियों का कवरेज देना होगा.
स्टैंडर्डाइजेंशन ऑफ डिजीज
IRDAI को दी गई सिफारिशों में स्टैंडर्डाइजेंशन ऑफ डिजीज की बात है यानि कौन से डिजीज बाहर रखे जा सकते हैं और किन्हें शामिल किया जाएगा. अब हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी Epilepsy, किडनी रोग या HIV, AIDS को बाहर करना चाहती है तो उसे इसे हाइलाइट करना होगा. यानि कुछ दिन बाद कवर देना होगा.
बढ़ सकता है प्रीमियम
जानकारों की मानें तो अगर हेल्थ इंश्योरेंस में सभी बीमारियों को कवरेज देने की बात आई तो फिर इससे प्रीमियम महंगा हो सकता है. IRDAI के इस फैसले से लाखों पॉलिसीधारकों को हर फायदा होगा. उन्हें हर उस बीमारी का कवर मिलेगा, जिसे हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां शुरू में ही बाहर कर देती हैं.
क्या थी सिफारिश
कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया कि बीमा कंपनियां Alzhiemer, parkinson, HIV या AIDS जैसी बीमारी को कवर से बाहर नहीं कर सकतीं.