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जीएसटी सुधार एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे आसान, पारदर्शी और अधिक किफायती टैक्स सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा। यह बयान यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) की ओर से दिया गया. यूएसआईबीसी ने बयान में कहा कि वह इन सुधारों को आगे बढ़ाने, द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने और अधिक समावेशी और टिकाऊ आर्थिक भविष्य में योगदान देने के लिए भारत सरकार और उसके हितधारकों के साथ अपनी साझेदारी जारी रखने के लिए तैयार है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी किए बयान में काउंसिल ने कहा, "इस तरह के दूरदर्शी सुधार न केवल भारत में कारोबारी माहौल में सुधार लाते हैं, बल्कि वैश्विक निवेशकों को भी एक मजबूत संकेत देते हैं."
जीएसटी के युक्तिकरण से 22 सितंबर से दोहरे स्लैब की संरचना में बदलाव आएगा. 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत का जीएसटी स्लैब वर्तमान 4-स्तरीय संरचना की जगह लेगा, साथ ही विलासिता और हानिकारक वस्तुओं (ज्यादातर नशीले पदार्थों) के लिए 40 प्रतिशत टैक्स लागू होगा.` क्रिसिल इंटेलिजेंस रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी दरों में कमी के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय उद्योग जगत का राजस्व 6-7 प्रतिशत बढ़ने की संभावना है. इन कटौती का उपभोग पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जो कॉर्पोरेट राजस्व का 15 प्रतिशत है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि कटौती का समय भी उपयुक्त है, क्योंकि यह वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हो रहा है, और भारत में त्योहारों और विवाह के मौसम के साथ मेल खाता है, जब खपत आमतौर पर प्रतिवर्ष चरम पर होती है.