हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस से लेकर डेली नीड्स के कुछ सामान और स्टेशनरी तक, तमाम चीजों पर अब 0% GST कर दिया गया है. ऐसे में लोगों को एक भ्रम हो गया है और वो समझ रहे हैं कि 0% GST वाली चीजें GST Free हो गई हैं. सुनने में ये दोनों शब्द आपको एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनके बीच बहुत बड़ा फर्क है, जिसे समझना बेहद जरूरी है. यहां जानिए इस बारे में
1/6बहुत से लोग सोचते हैं कि 0% GST और GST Free एक ही चीज है, लेकिन ऐसा नहीं है. इन दोनों के बीच एक बहुत बड़ा कानूनी और वित्तीय अंतर है, और वो अंतर है इनपुट टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit - ITC) का. ये एक ऐसा फर्क है जो किसी भी बिजनेस के मुनाफे और लागत पर सीधा असर डालता है.
2/60% GST का मतलब है चीजें या सेवाएं GST के दायरे में तो हैं, लेकिन उन पर टैक्स की दर शून्य (0%) है. जब कोई कारोबारी 0% GST वाला सामान बेचता है, तो उसे उस सामान को बनाने में लगे कच्चे माल पर चुकाए गए GST का पूरा क्रेडिट (ITC) रिफंड के रूप में मिल जाता है.
3/6इसका सीधा मतलब है कि इन चीजों या सेवाओं को GST के दायरे से ही बाहर रखा गया यानी इन पर GST लगाने से पूरी तरह छूट है. जब कोई कारोबारी GST Free सामान बेचता है, तो उसे उस सामान को बनाने या खरीदने में इस्तेमाल हुए कच्चे माल पर चुकाए गए GST का क्रेडिट (ITC) नहीं मिलता. वो टैक्स उसकी लागत (Cost) का हिस्सा बन जाता है.
4/6ITC का मतलब है इनपुट टैक्स क्रेडिट. इसे उदाहरण से समझिए. मान लीजिए आप एक शर्ट बनाने वाले कारोबारी हैं. आपने शर्ट बनाने के लिए ₹500 का कपड़ा, धागा और बटन खरीदा, जिस पर आपने 5% की दर से ₹25 GST चुकाया. अब आपने शर्ट बनाकर उसे ₹800 में बेचा. इस पर 12% की दर से ₹96 GST लगा, जो आप ग्राहक से वसूलेंगे. जब आप सरकार को टैक्स चुकाने जाएंगे, तो आप पूरे ₹96 जमा नहीं करेंगे. आप अपनी जेब से पहले ही चुकाए गए ₹25 (जो आपका ITC है) को इसमें से घटा देंगे. तो आपको सरकार को सिर्फ ₹96 - ₹25 = ₹71 ही चुकाने होंगे. पहले वाले ₹25 ITC के रूप में एडजस्ट हो गए. ये जो ₹25 का फायदा आपको मिला, यही इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) है.
5/6रेडी टू ईट रोटी, रेडी टू ईट पराठा, सभी तरह के ब्रेड, पिज्जा, पनीर, यूएचटी दूध, छेना. इसके अलावा शिक्षा से जुड़े सामान पेंसिल, कटर, रबर, नोटबुक, नक्शे-चार्ट, ग्लोब, वॉटर सर्वे चार्ट, एटलस, प्रैक्टिस बुक, ग्राफ बुक, लैबोरेटरी नोटबुक वगैरह पर अब 0% GST होगा.
6/6सरकार ने जीरो जीएसटी के दायरे में जीवनरक्षक दवाएं और इंश्योरेंस को भी शामिल किया है. काउंसिल की बैठक में 33 जीवन रक्षक दवाओं पर 0% जीएसटी कर दिया है. इनमें तीन कैंसर की दवाइयां भी शामिल है. वहीं अब सभी तरह की इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज-चाहे वह टर्म लाइफ, ULIP (यूनिट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) या एंडॉवमेंट पॉलिसी हों-इन पर कोई GST नहीं लगेगा. इसके साथ ही इन पॉलिसीज के रीइंश्योरेंस पर भी कोई टैक्स नहीं होगा. सभी इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसीज, जिसमें फैमिली फ्लोटर पॉलिसीज और सीनियर सिटीजन पॉलिसीज शामिल हैं, पर भी अब GST पूरी तरह से हट गया है.