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फाइल फोटो.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि जीएसटी रिफॉर्म्स की मदद से देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से खुला और पारदर्शी बनाएंगे. इन सुधारों से नियम सरल होंगे, अनुपालन बोझ घटेगा और छोटे व्यवसायों को बड़ी राहत मिलेगी. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थीं. सीतारमण ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में जीएसटी रिफॉर्मस के लिए एक विशेष कार्यबल का गठन किया है, जिसका उद्देश्य संशोधित नियमों से स्टार्टअप्स, MSMEs के लिए अनुकूल वातावरण बनाना है.
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सीतारमण ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में इन सुधारों की योजनाबद्ध शुरुआत होगी, जिससे टैक्स अनुपालन और भी आसान हो जाएगा. वित्त मंत्री ने आगे कहा कि देश के विकसित भारत 2047 के विजन के तहत बैंकों को न केवल लोन बुक का विस्तार करना होगा बल्कि बुनियादी संरचना के विकास को भी गति देना होगा. उन्होंने MSME सेक्टर के लिए आवश्यकतानुसार समय पर वित्त पोषण सुनिश्चित करने और बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को बैंकिंग नेटवर्क में लाने की भी बात कही. इस बदलाव के तीन आधार स्तंभ होंगे- विवाद, प्रौद्योगिकी और पारदर्शिता.
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सीतारमण ने यह भी याद दिलाया कि पिछले 11 वर्षों में 56 करोड़ से अधिक जन-धन खाते खोले गए हैं, जिनमें से अधिकांश खाताधारक महिलाएं हैं और कुल जमा राशि 2.68 लाख करोड़ रुपए है. इसके साथ ही, भारतीय वाणिज्यिक बैंकों ने असेट क्वॉलिटी में उल्लेखनीय सुधार किया है. रेटिंग एजेंसी S&P ने भी पहली बार 18 वर्षों में देश की क्रेडिट रेटिंग को बेहतर बताया है.
इस प्रकार, आगामी जीएसटी सुधार बेहतर अनुपालन, व्यवसाय के लिए सरल प्रक्रियाओं और व्यापक वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देंगे, जिससे अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत एवं पारदर्शी होगी. छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी यह बदलाव फलने-फूलने का अवसर लाएगा और देश के समग्र आर्थिक विकास में मदद करेगा.