&format=webp&quality=medium)
जीएसटी काउंसिल द्वारा टैक्स की दरों में की गई ऐतिहासिक कटौती का देश के उद्योग जगत ने खुले दिल से स्वागत किया है. PHDCCI और एसोचैम (ASSOCHAM) जैसी देश की शीर्ष इंडस्ट्री बॉडीज ने इस फैसले को न सिर्फ आम आदमी के लिए, बल्कि पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक 'गेम-चेंजर' करार दिया है. उनका मानना है कि यह कदम त्योहारी सीजन में मांग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा.
पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के अध्यक्ष हेमन्त जैन ने कहा, "नए जीएसटी सुधार के साथ सरकार ने फेस्टिव सीजन में आम आदमी के हाथ में ज्यादा पैसा देकर उन्हें एक बड़ा तोहफा दिया है. "इंडस्ट्री का मानना है कि जब टैक्स कम होने से चीजें सस्ती होंगी, तो लोग ज्यादा खरीदारी करेंगे. इससे बाजार में डिमांड बढ़ेगी, फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा और पूरी इकोनॉमी का पहिया तेजी से घूमेगा.
उन्होंने हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी को जीरो किए जाने को एक "बड़ा बदलाव" लाने वाला कदम बताया, जिसका सीधा फायदा आम आदमी को मिलेगा. अमेरिकी टैरिफ का असर होगा कम, 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूती मिलेगी. यह फैसला उस समय आया है जब अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ को लेकर अर्थव्यवस्था पर चिंता के बादल मंडरा रहे थे.
हेमन्त जैन ने कहा, "ट्रंप टैरिफ के बाद इकोनॉमी को लेकर कुछ नई परेशानियां खड़ी हुई थीं... हालांकि, नए जीएसटी सुधार से भारत की ग्रोथ स्टोरी बढ़ेगी. जीएसटी को लेकर नए सुधारों के साथ इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा."
जब घरेलू बाजार में ही मांग मजबूत होगी, तो निर्यात में आई संभावित कमी की भरपाई हो सकेगी. यह प्रधानमंत्री मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को भी मजबूती देगा. जैन ने यह भी कहा कि टैरिफ से सबसे ज्यादा परेशान छोटे व्यापारी और MSME थे. जीएसटी सुधार उनके लिए भी बड़ी राहत लेकर आए हैं.
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के महासचिव मनीष सिंघल ने इस फैसले को लेकर कहा, "यह आम आदमी के लिए काफी राहत भरा फैसला है. वस्तुओं के दाम घटने से आम आदमी अपना उपभोग (Consumption) बढ़ाएगा, उपभोग बढ़ने से इंडस्ट्री का उत्पादन (Production) बढ़ेगा. उत्पादन बढ़ने से निवेश (Investment) भी बढ़ेगा और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स सेक्टर भी बढ़ेगा." ये एक सकारात्मक आर्थिक चक्र (virtuous economic cycle) की शुरुआत है, जिसका असर हर सेक्टर पर देखने को मिलेगा.
मनीष सिंघल ने इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाने के सामाजिक प्रभाव की भी सराहना की. उन्होंने कहा, "हमारे देश में एक आम आदमी के लिए इंश्योरेंस लेना काफी महंगा पड़ रहा था. नए जीएसटी सुधारों से इंश्योरेंस लेने वालों की संख्या बढ़ जाएगी... आम आदमी अब अपनी फाइनेंशियल सिक्योरिटी को बढ़ाने पर ध्यान देगा. यह केंद्र सरकार का एक सराहनीय कदम है."
1. जीएसटी सुधारों पर उद्योग जगत इतना खुश क्यों है?
जवाब: क्योंकि टैक्स कम होने से चीजों की मांग बढ़ेगी. जब मांग बढ़ेगी तो फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा, जिससे कंपनियों का मुनाफा भी बढ़ेगा. यह पूरी सप्लाई चेन के लिए एक सकारात्मक खबर है.
2. इन सुधारों का 'आत्मनिर्भर भारत' से क्या संबंध है?
जवाब: जब घरेलू बाजार में ही मांग मजबूत होगी, तो भारतीय कंपनियों को विदेशी बाजारों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. इससे देश की अर्थव्यवस्था और अधिक आत्मनिर्भर बनेगी.
3. क्या जीएसटी कम होने से महंगाई पर असर पड़ेगा?
जवाब: हां, बिल्कुल. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जिन वस्तुओं पर टैक्स घटाया गया है, उनकी कीमतें कम होंगी, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी.
4. 'ईज-ऑफ-डूइंग बिजनेस' में कैसे सुधार होगा?
जवाब: टैक्स स्लैब की संख्या चार से घटकर दो हो जाने से जीएसटी का ढांचा बहुत सरल हो जाएगा. इससे कारोबारियों के लिए टैक्स का हिसाब-किताब रखना और उसका पालन करना (compliance) आसान हो जाएगा.
5. क्या लग्जरी आइटम्स पर टैक्स बढ़ाने का इंडस्ट्री ने विरोध नहीं किया?
जवाब: इंडस्ट्री का मानना है कि सरकार को राजस्व संतुलन बनाना भी जरूरी है. आम जरूरत की चीजों पर टैक्स घटाकर और लग्जरी आइटम्स (जिनका उपभोग सीमित लोग करते हैं) पर टैक्स बढ़ाकर सरकार ने एक संतुलित कदम उठाया है, जिसका आमतौर पर स्वागत किया गया है.