GST सुधार से आसान हुई टैक्स फाइलिंग, घटे टैक्स स्लैब से उद्योग और उपभोक्ता दोनों को मिलेगा फायदा: CII

CII के अनुसार, नए GST सुधारों से उद्योगों के लिए टैक्स फाइलिंग आसान हुई है और व्यापार में आसानी को बढ़ावा मिलेगा. टैक्स स्लैब को 4 से घटाकर 2 (5% और 18%) करने से कई वस्तुएं सस्ती हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ता और उद्योग दोनों को फायदा होगा.
GST सुधार से आसान हुई टैक्स फाइलिंग, घटे टैक्स स्लैब से उद्योग और उपभोक्ता दोनों को मिलेगा फायदा: CII

देश में 22 सितंबर से लागू हुए जीएसटी सुधार (GST 2.0) से उद्योगों के लिए टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया काफी आसान हो गई है और इससे देश में व्यापार में आसानी (Ease of Doing Business) को और बढ़ावा मिलेगा. यह बात कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष ऋषि कुमार बागला ने गुरुवार को कही. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए ये बदलाव न केवल उद्योगों के लिए बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी एक बड़ी राहत लेकर आए हैं.

क्या हैं नए GST सुधार?

राष्ट्रीय राजधानी में सीआईआई के एक कार्यक्रम में बोलते हुए ऋषि कुमार बागला ने जीएसटी 2.0 के दो प्रमुख बदलावों पर प्रकाश डाला :

  • टैक्स स्लैब में कटौती: सरकार ने मौजूदा चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) को घटाकर अब केवल दो - 5% और 18% - कर दिया है. इस बड़े बदलाव से कई चीजें सस्ती हो गई हैं और उपभोक्ताओं के लिए अधिक किफायती बन गई हैं.
  • सरल टैक्स प्रणाली: जीएसटी 2.0 में अप्रत्यक्ष कर प्रणाली को और भी सरल बनाया गया है. इससे टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया आसान हुई है, जिससे उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम होगा और वे अपने मुख्य व्यवसाय पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे.

नए जीएसटी फ्रेमवर्क के तहत, रोजमर्रा की जरूरी चीजों और जीवन रक्षक दवाओं सहित लगभग 370 उत्पादों पर टैक्स कम हो गया है. इसके अलावा, सरकार ने कई ऐसी वस्तुओं पर टैक्स को घटाकर शून्य कर दिया है, जिन पर पहले 5%, 12% या 18% का टैक्स लगता था.

उद्योग और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

सीआईआई का मानना है कि इन सुधारों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुआयामी और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

  • बढ़ेगा उपभोग: टैक्स कम होने से वस्तुएं सस्ती होंगी, जिससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और देश में उपभोग को प्रोत्साहन मिलेगा. जब लोग ज्यादा खर्च करेंगे, तो अर्थव्यवस्था का चक्र और तेजी से घूमेगा.
  • व्यापार में आसानी: सरल टैक्स फाइलिंग और कम स्लैब से उद्योगों, विशेषकर MSMEs और स्टार्टअप्स पर अनुपालन का बोझ कम होगा, जिससे वे अधिक कुशलता से काम कर सकेंगे.
  • बुनियादी ढांचे का विकास: बागला ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है. सरकार लगातार इन्फ्रास्ट्रक्चर पर निवेश कर रही है, गांवों को शहरों से जोड़ रही है, और नए एयरपोर्ट व हाईवे का निर्माण कर रही है. इन प्रयासों से आने वाले समय में नौकरियां बढ़ेंगी और लोगों के हाथ में पैसा आएगा, जो सीधे तौर पर उपभोग को बढ़ाएगा.
  • ऑटोमोबाइल और हाउसिंग सेक्टर को बूस्ट: सीमेंट, स्टील जैसी निर्माण सामग्री पर जीएसटी कम होने से घर बनाना सस्ता होगा, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा. इसी तरह, छोटी कारों और दोपहिया वाहनों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% करने से ऑटोमोबाइल उद्योग में मांग बढ़ने की उम्मीद है.

अमेरिकी टैरिफ पर क्या बोले बागला?

जब उनसे अमेरिकी टैरिफ के संभावित प्रभाव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत चल रही है, इसलिए इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. उन्होंने माना कि छोटी अवधि में टैरिफ का भारत की अर्थव्यवस्था पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में भारत की मजबूत घरेलू मांग के कारण इसका कोई खास असर नहीं होगा.

कुल मिलाकर, सीआईआई ने जीएसटी 2.0 को एक प्रगतिशील कदम बताया है जो न केवल कर प्रणाली को सरल बनाता है बल्कि भारत को एक अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल गंतव्य बनाने में भी मदद करेगा.

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. नए जीएसटी सुधार में कितने टैक्स स्लैब हैं?

A. नए जीएसटी सुधार के तहत, अब केवल दो टैक्स स्लैब हैं - 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत.

Q. जीएसटी सुधार कब से लागू हुए हैं?

A. नए जीएसटी सुधार 22 सितंबर, 2025 से पूरे देश में लागू हो गए हैं.

Q. इन सुधारों से आम आदमी को क्या फायदा होगा?

A. रोजमर्रा की जरूरी चीजों, जीवन रक्षक दवाओं और कई अन्य उत्पादों पर टैक्स कम हो गया है, जिससे वे सस्ते हो गए हैं और आम आदमी का खर्च घटेगा.

Q. उद्योगों के लिए इन सुधारों का क्या महत्व है?

A. उद्योगों के लिए टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया सरल हो गई है और अनुपालन का बोझ कम हुआ है, जिससे व्यापार करने में आसानी होगी.

Q. CII ने इन सुधारों पर क्या कहा है?

A. CII ने कहा है कि ये सुधार उद्योगों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए फायदेमंद हैं और इससे देश में उपभोग और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.

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