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भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) ने जीएसटी परिषद द्वारा किए गए नए सुधारों का स्वागत किया है. संगठन ने कहा कि ये सुधार भारत की टैक्स प्रणाली में पारदर्शिता, स्थिरता और पूर्वानुमान लाएंगे. फिक्की के अनुसार, 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाले इस नए द्वि-स्तरीय जीएसटी फ्रेमवर्क (GST 2.0) से श्रम-प्रधान उद्योगों, परिवारों और उपभोग आधारित विकास को बड़ा फायदा मिलेगा.
फिक्की ने कहा कि जीएसटी 2.0 सुधारों के तहत कपड़ा, उर्वरक और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को सही किया गया है. इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और भारतीय उत्पादों की ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी.
एफएमसीजी प्रोडक्ट्स जैसे साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, हेयर ऑयल और पैकेज्ड फूड पर टैक्स दरें घटाने से सीधे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी. इससे घरेलू बजट आसान होगा और खपत में बढ़ोतरी होगी.
फिक्की का मानना है कि सीमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी डिवाइस और कंस्ट्रक्शन मटेरियल पर कम जीएसटी से आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति मिलेगी. यह कदम सरकार के सभी के लिए आवास विजन को सपोर्ट करेगा.
फिक्की के अध्यक्ष हर्षवर्धन अग्रवाल ने कहा कि ये सुधार वर्गीकरण से जुड़ी विवादित स्थितियों को कम करेंगे और अनुपालन आसान बनाएंगे. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि टैक्स दरों में कमी से सरकार की रेवेन्यू पर असर पड़ेगा, लेकिन इससे डिमांड बढ़ेगी और महंगाई पर भी नियंत्रण होगा.
Q1. GST 2.0 सुधार कब से लागू होंगे?
ये सुधार 22 सितंबर 2025 से लागू होंगे.
Q2. GST 2.0 से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा?
परिवारों, किसानों, श्रम-प्रधान उद्योगों और MSME को सबसे ज्यादा फायदा होगा.
Q3. FMCG प्रोडक्ट्स पर GST कम होने से क्या असर होगा?
साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और पैकेज्ड फूड सस्ते होंगे और घरेलू बजट आसान होगा.
Q4. क्या किसानों को भी राहत मिलेगी?
हां, कृषि उत्पादों पर टैक्स कम होने से किसानों की लागत घटेगी और ग्रामीण आय बढ़ेगी.
Q5. क्या हाउसिंग और इंफ्रा सेक्टर को भी फायदा होगा?
हां, सीमेंट और कंस्ट्रक्शन मटेरियल पर कम GST से हाउसिंग और इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलेगा.
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