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भारत में GST में किए गए सुधारों का असर अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है. इसका सबसे बड़ा फायदा रिटेल क्रेडिट मार्केट को मिला है. ताजा रिपोर्ट बताती है कि लोग अब पहले के मुकाबले ज्यादा भरोसे के साथ लोन ले रहे हैं और बैंक व NBFC भी कर्ज देने में ज्यादा सहज नजर आ रहे हैं.
वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में क्रेडिट मार्केट इंडिकेटर यानी CMI का स्कोर 98 से बढ़कर 99 पहुंच गया है. यह इशारा करता है कि कर्ज लेने और देने दोनों तरफ माहौल पॉजिटिव बना हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक GST सुधारों के बाद कई कैटेगरी में प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दबाव कम हुआ है. जब सामान थोड़ा सस्ता हुआ तो लोगों का खरीदने का मन भी बढ़ा. इसका सीधा असर लोन डिमांड पर पड़ा. खासकर ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर में लोगों ने EMI पर खरीदारी को फिर से अपनाना शुरू किया. यही वजह है कि CMI का ओवरऑल स्कोर मजबूत हुआ और बाजार में एक्टिविटी बढ़ी.
अगर डिमांड पिलर की बात करें तो सितंबर 2025 की तिमाही में इसका स्कोर 93 से बढ़कर 95 हो गया. यह दिखाता है कि लोग सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि सुविधा और लाइफस्टाइल के लिए भी कर्ज लेने लगे हैं. रिपोर्ट बताती है कि इस बढ़त के पीछे सबसे बड़ा हाथ वाहन वित्त और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग का रहा है. यानी लोग गाड़ी खरीदने और घर के इलेक्ट्रॉनिक सामान पर खर्च करने में ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस कर रहे हैं.
अक्टूबर 2025 में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के लिए लोन की मांग में जोरदार उछाल देखने को मिला. जहां पहले इसका इंडेक्स 128 के आसपास था, वहीं यह बढ़कर 189 तक पहुंच गया. इसका मतलब साफ है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की खरीदारी तेजी से बढ़ी है. आसान EMI, बेहतर ऑफर और GST सुधारों ने इस ट्रेंड को और मजबूत किया है.
ऑटो लोन सेगमेंट में भी अच्छी हलचल देखने को मिली. दो पहिया वाहनों के लिए लोन की मांग 249 से बढ़कर 272 हो गई. वहीं कार लोन की डिमांड भी 115 से बढ़कर 133 पर पहुंच गई. यह दिखाता है कि शहरी के साथ-साथ अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी लोग अब वाहन खरीदने का फैसला ले रहे हैं. बेहतर इनकम एक्सपेक्टेशन और फ्यूचर को लेकर भरोसा इस ट्रेंड के पीछे बड़ी वजह मानी जा रही है.
सिर्फ डिमांड ही नहीं, बल्कि लोन की सप्लाई साइड भी मजबूत हुई है. 2025 की तीसरी तिमाही में CMI के सप्लाई पिलर का स्कोर 91 से बढ़कर 97 हो गया. इसका मतलब है कि बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस अब ज्यादा खुलकर लोन दे रहे हैं. खासतौर पर गोल्ड लोन और कंज्यूमर लोन में तेजी देखने को मिली है. होम लोन, ऑटो लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन की सप्लाई में भी सुधार हुआ है, जबकि पिछले साल इन सेगमेंट्स में सुस्ती थी.
रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि कुल लोन सप्लाई में अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत रही. यह दिखाता है कि अब क्रेडिट ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों और गांवों में भी लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़ रहे हैं और फॉर्मल लोन को अपना रहे हैं. यह बदलाव लंबे समय के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
नए क्रेडिट उधारकर्ताओं की संख्या में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खास बात यह है कि 35 साल से कम उम्र के उधारकर्ताओं में 12 प्रतिशत का उछाल आया है. इसका मतलब है कि युवा अब अपने फ्यूचर प्लान्स के लिए लोन लेने से हिचकिचा नहीं रहे. पढ़ाई, नौकरी, वाहन और घर से जुड़े फैसलों में EMI एक अहम रोल निभा रही है.
हालांकि रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि तस्वीर पूरी तरह से गुलाबी नहीं है. कुल मिलाकर लोन की गुणवत्ता अभी स्थिर बनी हुई है, लेकिन कुछ सेक्टर में हाल के महीनों में तनाव के संकेत मिले हैं. खासकर माइक्रो लोन और छोटे होम लोन सेगमेंट में चुनौतियां उभर रही हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यहां ज्यादा सतर्क मैनेजमेंट की जरूरत होगी.
ट्रांसयूनियन सीआईबीएल जैन के एमडी और सीईओ भावेश जैन का कहना है कि यह समय लोन देने वाली कंपनियों के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है. नए तरह के उधारकर्ताओं और बदलती जरूरतों को समझकर अगर प्रोडक्ट्स डिजाइन किए जाएं, तो रिटेल क्रेडिट मार्केट में लॉन्ग टर्म ग्रोथ हासिल की जा सकती है. कुल मिलाकर GST सुधारों ने जिस तरह से क्रेडिट मार्केट में नई जान फूंकी है, उससे आने वाले महीनों में भी इस सेक्टर से अच्छी खबरें मिलने की उम्मीद की जा रही है.