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GST को लेकर एक बड़ा अपडेट आ रहा है. सरकार एक बार फिर से GST की दरों में कटौती की चर्चा कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, सरकार ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट में GST कटौती करने पर चर्चा कर रही है. मौजूदा समय में ट्रैक्टर पर 12% GST लगता है, लेकिन अब इसे घटाकर 5% करने की योजना पर विचार किया जा रहा है. इसका फायदा Mahindra & Mahindra (M&M) और Force Motors जैसी कंपनियों को मिलने वाला है.
सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के बीच पिछले कुछ समय से GST को आसान और सस्ता बनाने की रणनीति पर चर्चा चल रही है. इसी कड़ी में वित्त मंत्री (FM) ने जून के अंतिम सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत प्रेजेंटेशन भी दिया था, जिसमें कई सामानों पर GST दरों में बदलाव के प्रस्ताव रखे गए.
फाइनेंस मिनिस्ट्री की इस प्रेजेंटेशन के बाद अब सरकार ट्रैक्टर सहित कई जरूरी वस्तुओं पर GST घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. माना जा रहा है कि अगला स्टेप होगा — राज्यों से राय-मशविरा. वित्त मंत्री अब राज्यों के साथ बैठकों का दौर शुरू करेंगी और उसके बाद GST काउंसिल इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लेगी.
मौजूदा समय में ट्रैक्टर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की दर 18% है, यानी ट्रैक्टर बनाने में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स और मटेरियल्स पर कंपनियां 18% GST भरती हैं, जो बाद में उन्हें क्रेडिट के रूप में मिल जाता है. लेकिन अगर ट्रैक्टर पर आउटपुट GST को 12% से घटाकर 5% कर दिया जाता है, तो कंपनियों को मिलने वाला ITC पूरा उपयोग नहीं हो पाएगा. ऐसे में ऑटो कंपनियों को टैक्स क्रेडिट में फायदा होगा.
अगर यह प्रस्ताव मंजूरी पाता है तो Mahindra & Mahindra (M&M) और Force Motors जैसी कंपनियों को बड़ा व्यावसायिक फायदा मिल सकता है. दोनों कंपनियां ट्रैक्टर और एग्रीकल्चर इक्विपमेंट सेगमेंट में बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं. कम GST के चलते इन कंपनियों की लागत घटेगी और उन्हें प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उत्पाद बेचने में सहूलियत होगी.
ट्रैक्टर ही नहीं, सरकार कुछ अन्य 12% GST वाली आम इस्तेमाल की वस्तुओं को भी 5% टैक्स स्लैब में लाने पर विचार कर रही है. ये वे उत्पाद हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोग होते हैं और आम जनता पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए इनकी दरों को भी घटाया जा सकता है.
सरकार की यह पूरी कवायद आगामी बजट और 2024-2025 के आर्थिक एजेंडे को ध्यान में रखकर की जा रही है. सरकार की कोशिश है कि कर व्यवस्था को सरल बनाया जाए और उस वर्ग को राहत दी जाए जिसे सीधे फायदा नहीं मिल पा रहा. अब सबकी नजरें GST काउंसिल की अगली बैठक पर टिकी हैं, जिसमें राज्यों की राय के आधार पर अंतिम मुहर लगेगी.