GST Council Meeting: सस्ते हो सकते हैं ₹2500 तक के कपड़े-जूते, महंगे ब्रांड्स पर बढ़ सकता है टैक्स!

देश में जीएसटी की दरों को तय करने वाली सर्वोच्च संस्था, जीएसटी काउंसिल (GST Council) दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक के एजेंडे में कई बड़े प्रस्ताव शामिल किए गए हैं. इसमें एक प्रस्‍ताव कपड़े और जूतों पर जीएसटी की दरों में बदलाव को लेकर है. इसकी चर्चा जोरों पर है क्‍योंकि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा.
GST Council Meeting: सस्ते हो सकते हैं ₹2500 तक के कपड़े-जूते, महंगे ब्रांड्स पर बढ़ सकता है टैक्स!

आज से जीएसटी काउंसिल मीटिंग (GST Council Meeting) का आग़ाज़ हो गया है. आज राज्यों के ऑफिसर की मीटिंग होगी जिसमें जीएसटी कौंसिल के एजेंडा को लेकर चर्चा होगी. इसके बाद 3 और 4 सितंबर 2025 को दो दिवसीय बैठक दिल्ली में होगी. ऐसे में आम आदमी के लिए राहत और ब्रांडेड शौकीनों के लिए थोड़ी चिंता की खबर है.

देश में जीएसटी की दरों को तय करने वाली सर्वोच्च संस्था, जीएसटी काउंसिल (GST Council) दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक के एजेंडे में कई बड़े प्रस्ताव शामिल किए गए हैं. इसमें एक प्रस्‍ताव कपड़े और जूतों पर जीएसटी की दरों में बदलाव को लेकर है. इसकी काफी चर्चा है. दरअसल केंद्र सरकार ने काउंसिल के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिससे आम आदमी की खरीदारी सस्ती हो सकती है, जबकि महंगे और ब्रांडेड कपड़े-जूते खरीदने वालों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है.

क्या है सरकार का 'डबल-एक्शन' प्रस्ताव?

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सरकार ने कपड़े और जूतों पर टैक्स के लिए एक मिला-जुला प्रस्ताव दिया है, जिसमें कीमत के आधार पर दरें तय करने की बात कही गई है.

आम आदमी को राहत

2500 रुपए से कम कीमत वाले कपड़े और जूतों पर जीएसटी की मौजूदा दर को 12% से घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है. अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो आम आदमी द्वारा खरीदे जाने वाले ज्यादातर रेडीमेड गारमेंट्स, साड़ियां और जूते-चप्पल सीधे तौर पर सस्ते हो जाएंगे.

महंगे ब्रांड्स पर बोझ

2500 रुपए से ज्यादा कीमत वाले कपड़े और जूतों पर जीएसटी की दर को 12% से बढ़ाकर 18% करने का प्रस्ताव है. जाहिर है कि इस कदम से ब्रांडेड शोरूम से महंगे कपड़े और जूते खरीदने वालों को अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी.

सरकार ऐसा क्यों कर रही है?

इस प्रस्ताव के पीछे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति है:

  • आम आदमी को राहत: 2500 रुपए से कम के उत्पादों पर टैक्स घटाकर सरकार महंगाई से जूझ रहे मध्यम वर्ग और निम्न-मध्यम वर्ग को सीधी राहत देना चाहती है.
  • राजस्व संतुलन: वहीं, महंगे उत्पादों पर टैक्स बढ़ाकर सरकार टैक्स कटौती से होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई करना चाहती है. यह एक तरह से "अमीरों पर ज्यादा टैक्स, गरीबों पर कम टैक्स" के सिद्धांत पर आधारित है.

बैठक में कई अहम फैसलों की उम्‍मीद?

कपड़े और जूतों के अलावा, इस बैठक में कई और अहम फैसलों की उम्मीद है, जैसे:

  • इलेक्ट्रिक व्हीकल जो 1500 CC से जायदा और 4000 MM se ज़्यादा है उस पर जीएसटी 28 परसेंट से बढ़ाकर 40 परसेंट करने का प्लान है्
  • इसके साथ ही कैसिनो, ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग पर भी जीएसटी को 28% से बढ़ाकर 40% करने का प्लान है.
  • जीएसटी में 253 आइटम 12% से 5% पर पर आ सकते हैं.
  • 58 आइटम 18% से 5% पर लाए जा सकते हैं.
  • 12 परसेंट के 38 आइटम को निल पर लाए जाने की उम्‍मीद है.
  • 18 परसेंट से निल पर 3 आइटम को लाया जा सकता है.
  • 5 परसेंट से निल पर 6 आइटम को लाया जा सकता है.
  • वहीं 12% से 18% के 19 आइटम के जीएसटी में बढ़ोतरी होने की संभावना है.
  • 18 परसेंट से 40 परसेंट पर एक आइटम को लाया जा सकता है.
  • 28 परसेंट की केटेगरी के 15 आइटम को 40 परसेंट पर लाया जा सकता है.
  • 5 परसेंट की कैटेगरी के तीन आइटम को 18 परसेंट पर लाया जा सकता है.
  • कुल मिलाकर उम्मीद की जा रही है कि इस बैठक से आम आदमी के लिए कुछ अच्छी खबरें निकलकर आ सकती हैं.

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