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आज से जीएसटी काउंसिल मीटिंग (GST Council Meeting) का आग़ाज़ हो गया है. आज राज्यों के ऑफिसर की मीटिंग होगी जिसमें जीएसटी कौंसिल के एजेंडा को लेकर चर्चा होगी. इसके बाद 3 और 4 सितंबर 2025 को दो दिवसीय बैठक दिल्ली में होगी. ऐसे में आम आदमी के लिए राहत और ब्रांडेड शौकीनों के लिए थोड़ी चिंता की खबर है.
देश में जीएसटी की दरों को तय करने वाली सर्वोच्च संस्था, जीएसटी काउंसिल (GST Council) दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक के एजेंडे में कई बड़े प्रस्ताव शामिल किए गए हैं. इसमें एक प्रस्ताव कपड़े और जूतों पर जीएसटी की दरों में बदलाव को लेकर है. इसकी काफी चर्चा है. दरअसल केंद्र सरकार ने काउंसिल के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिससे आम आदमी की खरीदारी सस्ती हो सकती है, जबकि महंगे और ब्रांडेड कपड़े-जूते खरीदने वालों की जेब पर बोझ बढ़ सकता है.
सरकार ने कपड़े और जूतों पर टैक्स के लिए एक मिला-जुला प्रस्ताव दिया है, जिसमें कीमत के आधार पर दरें तय करने की बात कही गई है.
2500 रुपए से कम कीमत वाले कपड़े और जूतों पर जीएसटी की मौजूदा दर को 12% से घटाकर 5% करने का प्रस्ताव है. अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो आम आदमी द्वारा खरीदे जाने वाले ज्यादातर रेडीमेड गारमेंट्स, साड़ियां और जूते-चप्पल सीधे तौर पर सस्ते हो जाएंगे.
2500 रुपए से ज्यादा कीमत वाले कपड़े और जूतों पर जीएसटी की दर को 12% से बढ़ाकर 18% करने का प्रस्ताव है. जाहिर है कि इस कदम से ब्रांडेड शोरूम से महंगे कपड़े और जूते खरीदने वालों को अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी.
इस प्रस्ताव के पीछे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति है:
कपड़े और जूतों के अलावा, इस बैठक में कई और अहम फैसलों की उम्मीद है, जैसे: