&format=webp&quality=medium)
देश में टैक्स की दरों और नियमों को तय करने वाली सबसे बड़ी संस्था, जीएसटी काउंसिल (GST Council) की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक आज से शुरू हो रही है. सुबह 11 बजे जीएसटी परिषद की ये 56वीं बैठक शुरू होगी. इस बैठक में आम आदमी से जुड़े कई बड़े फैसलों (जैसे कपड़े, जूते और गाड़ियों पर टैक्स कम करना) की उम्मीद है. लेकिन, इस बैठक के शुरू होने से ठीक पहले, देश की राजनीति गरमा गई है.
विपक्ष द्वारा शासित आठ बड़े राज्यों ने जीएसटी काउंसिल में अपनी साझा रणनीति बनाने के लिए एक अलग बैठक की है. इस बैठक से साफ संकेत मिल रहे हैं कि काउंसिल के अंदर केंद्र सरकार और विपक्षी राज्यों के बीच कुछ मुद्दों पर जोरदार टकराव देखने को मिल सकता है.
VIDEO- Stocks To Buy: त्योहारी सीजन से पहले देखें Brokerage की टॉप 10 Stocks Picks
विपक्ष की इस रणनीति बैठक में तमिलनाडु, तेलंगाना, पंजाब, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और झारखंड जैसे राज्यों के वित्त मंत्री या प्रतिनिधि शामिल हुए. इन सभी राज्यों का एक साझा एजेंडा है, जिसे वे काउंसिल की बैठक में पूरी ताकत से उठाने की तैयारी में हैं.
इन 8 राज्यों की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण मांग है - 'जीएसटी कंपनसेशन सेस' (GST Compensation Cess) को जारी रखना.
VIDEO- iPhone 17 Pre-Booking: भारत में कब से मिलेगा?
चलिए, इसे आसान भाषा में समझते हैं:
जब 1 जुलाई, 2017 को पूरे देश में जीएसटी लागू किया गया था, तो कई राज्यों को डर था कि उन्हें टैक्स का भारी नुकसान होगा, क्योंकि उनके कई पुराने टैक्स (जैसे वैट) खत्म हो रहे थे. तब केंद्र सरकार ने राज्यों को यह गारंटी दी थी कि अगर जीएसटी लागू होने के बाद उनके राजस्व में 14% सालाना से कम की बढ़ोतरी होती है, तो उस नुकसान की भरपाई अगले 5 सालों तक (यानी जून 2022 तक) केंद्र सरकार करेगी. लेकिन कोरोना महामारी के हालातों को देखते हुए इसे मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया.
VIDEO- Bharat NCAP की 5-स्टार रेटिंग वाली 15 सबसे Safest Car!
दरअसल केंद्र सरकार ने कोविड-19 के दौरान राज्यों की मदद के लिए ₹2.69 लाख करोड़ का कर्ज लिया था. इस कर्ज को चुकाने के लिए कॉम्पेनसेशन सेस को मार्च 2026 तक बढ़ाया गया था. मजबूत जीएसटी कलेक्शन की वजह से सरकार यह कर्ज अक्टूबर 2025 तक चुकाने की राह पर है. ऐसे में आज की बैठक में कंपनसेशन सेस को 31 अक्टूबर 2025 तक बंद करने पर विचार कर सकती है.
लेकिन, विपक्षी राज्यों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति अभी भी डांवाडोल है. इन राज्यों का कहना है कि उनकी अर्थव्यवस्था अभी भी पटरी पर नहीं लौटी है. अगर केंद्र सरकार यह भरपाई बंद कर देगी, तो उन्हें अपनी कल्याणकारी योजनाएं चलाने और विकास कार्य करने में भारी मुश्किल होगी. इसलिए, ये सभी 8 राज्य मिलकर जीएसटी काउंसिल में यह मांग रखेंगे कि 'कंपनसेशन सेस' की व्यवस्था को अगले कुछ सालों के लिए और बढ़ाया जाए.
VIDEO- Silver Jewellery Hallmark ऐसे पहचानें!
ये मुद्दा जीएसटी काउंसिल की बैठक में टकराव का सबसे बड़ा कारण बन सकता है. केंद्र सरकार शायद इस मांग को आसानी से स्वीकार न करे, क्योंकि इससे केंद्र पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा और लग्जरी सामानों पर सेस जारी रखने से वे चीजें महंगी बनी रहेंगी. विपक्ष इसे 'राज्यों के अधिकारों' और 'संघीय ढांचे' का मुद्दा बनाकर केंद्र पर दबाव बनाने की पूरी कोशिश करेगा.
जवाब: यह एक अतिरिक्त टैक्स है जो कुछ चुनिंदा लग्जरी और सिन गुड्स पर लगाया जाता है. इससे जमा हुए पैसे का इस्तेमाल उन राज्यों के राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाता था, जिन्हें जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स का घाटा हुआ था.
जवाब: उनका तर्क है कि उनकी आर्थिक स्थिति अभी भी कमजोर है और इस भरपाई के बिना उन्हें अपनी जरूरी योजनाएं चलाने में मुश्किल होगी.
जवाब: इस बैठक में कपड़े, जूते, ऑटोमोबाइल, होटल और उर्वरकों पर जीएसटी की दरें कम करने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.
VIDEO- FASTag से फर्जी Toll कटा? ऐसे पाएं रिफंड
जवाब: जीएसटी काउंसिल में कोई भी फैसला तीन-चौथाई (75%) बहुमत से लिया जाता है. इसमें केंद्र सरकार के वोट का वजन एक-तिहाई (33.33%) होता है, और सभी राज्यों के वोटों का कुल वजन दो-तिहाई (66.67%) होता है.