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हवा और पानी, ये दो ऐसी चीजें हैं, जिनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. लेकिन आज के दौर में बढ़ता प्रदूषण और जहरीली हवा एक बड़ी चुनौती बन गई है. इसी समस्या को समझते हुए सरकार अब एक ऐसा कदम उठाने जा रही है जो सीधे आपकी जेब और सेहत से जुड़ा है.
खबरों की मानें तो जीएसटी काउंसिल अपनी अगली बैठक में एयर प्यूरीफायर (Air Purifiers) और वॉटर प्यूरीफायर (Water Purifiers) पर टैक्स की दरों को 18 प्रतिशत से घटाकर महज 5 प्रतिशत करने पर गंभीर विचार कर रही है. सरकार का मानना है कि ये उत्पाद अब 'ऐशो-आराम' की चीज नहीं बल्कि 'जरूरत' बन चुके हैं.
फिलहाल एयर और वॉटर प्यूरीफायर को 'कंज्यूमर ड्यूरेबल्स' की कैटेगरी में रखा गया है, जिस पर 18 प्रतिशत का भारी-भरकम टैक्स लगता है. अगर काउंसिल इसे घटाकर 5 प्रतिशत कर देती है, तो इन उत्पादों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की सीधी गिरावट आएगी.
उदाहरण के लिए, अगर कोई एयर प्यूरीफायर अभी 15,000 रुपये का मिल रहा है, तो टैक्स घटने के बाद उसकी कीमत करीब 2,000 रुपये तक कम हो सकती है. इससे मध्यमवर्गीय परिवार भी अपने घर की हवा और पानी को साफ रखने के लिए इन उपकरणों को आसानी से खरीद पाएंगे.
इस टैक्स कटौती के पीछे दिल्ली हाई कोर्ट का भी बड़ा हाथ है. हाल ही में दिल्ली-एनसीआर की खराब वायु गुणवत्ता पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि अगर सरकार नागरिकों को स्वच्छ हवा नहीं दे सकती, तो कम से कम हवा साफ करने वाली मशीनों पर टैक्स तो कम कर दे. अदालत ने सुझाव दिया था कि एयर प्यूरीफायर को 'मेडिकल डिवाइस' यानी चिकित्सा उपकरण माना जाना चाहिए क्योंकि ये पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे खतरनाक कणों को रोककर बीमारियों से बचाते हैं.
सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया है कि इस दिशा में काम चल रहा है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम तारीख तय नहीं हुई है. जीएसटी काउंसिल की आखिरी 56वीं बैठक सितंबर में हुई थी, लेकिन तब इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था. अब अगली बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां टैक्स की इस कैंची से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद है.
एक जनहित याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि हाई-क्वालिटी वाले एयर प्यूरीफायर सिर्फ हवा साफ नहीं करते, बल्कि ये फेफड़ों और दिल की बीमारियों को रोकने में 'निवारक चिकित्सा' (Preventive Medicine) का काम करते हैं. प्रदूषण की वजह से बढ़ते अस्थमा और एलर्जी के मामलों को देखते हुए इन्हें सस्ता करना अब समय की मांग बन गया है.
साफ हवा और सुरक्षित पानी पर भारी टैक्स वसूलना किसी भी समाज के लिए सही नहीं है. अगर जीएसटी काउंसिल यह फैसला लेती है, तो यह देश के स्वास्थ्य और बजट दोनों के लिए एक बड़ी जीत होगी. प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में मशीनों को सस्ता करना एक छोटा लेकिन बहुत प्रभावशाली कदम साबित हो सकता है.
A- वर्तमान में एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लिया जाता है.
A- अगर जीएसटी 18% से घटकर 5% होता है, तो प्यूरीफायर की कीमतें 10-15% तक कम हो सकती हैं.
A- कोर्ट ने कहा कि अगर नागरिकों को स्वच्छ हवा नहीं मिल रही है, तो प्यूरीफायर पर टैक्स कम या खत्म होना चाहिए.
A- फिलहाल काउंसिल की अगली बैठक की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है.
A- याचिकाकर्ताओं की मांग है कि इन्हें चिकित्सा उपकरण माना जाए क्योंकि ये प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से बचाते हैं.
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