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भारत में टैक्स स्ट्रक्चर को सरल बनाने और रेवेन्यू बढ़ाने के उद्देश्य से GST काउंसिल ने बड़ा कदम उठाया है. 3 सितंबर 2025 को हुई 56वीं बैठक में यह फैसला लिया गया कि पुराने 12% और 28% टैक्स स्लैब को खत्म कर दिया जाएगा और अब केवल तीन स्लैब रहेंगे, 5%, 18% और नया 40%.
यह 40% की जीएसटी खासतौर से लग्ज़री और सिन (Sin) प्रोडक्ट्स के लिए बनाई गई है. सरकार का मकसद ऐसे सामानों पर टैक्स का बोझ बढ़ाना है जो या तो गैर-ज़रूरी हैं या जिनका सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है.
GST काउंसिल के अनुसार लग्ज़री प्रोडक्ट्स वे हैं जिन्हें सामान्य जीवन में आवश्यक नहीं माना जाता, जिनका इस्तेमाल अक्सर विलासिता का प्रतीक होता है और जिनकी खरीद आमतौर पर उच्च-आय वर्ग द्वारा की जाती है.
सिन प्रोडक्ट्स वे सामान हैं जिनका अत्यधिक सेवन समाज और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, जैसे तंबाकू, पान मसाला, ई-सिगरेट और शुगर युक्त ड्रिंक्स. इस कैटेगरी में शामिल उत्पादों पर अब 40% का भारी टैक्स लगाया जाएगा ताकि न केवल इनकी खपत को नियंत्रित किया जा सके, बल्कि सरकार के टैक्स रेवेन्यू को भी बढ़ावा मिले.
नए नियमों के तहत 40% GST का स्लैब कई कैटेगरीज में लागू होगा. इसमें पान मसाला, गुटखा, चबाने वाला तंबाकू, बिना प्रोसेस किया हुआ तंबाकू, सिगरेट और सिगार जैसे उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा सभी प्रकार के कार्बोनेटेड और फ्लेवर्ड ड्रिंक, शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक और कैफीन ड्रिंक को भी इसी हाई जीएसटी कैटेगरी में रखा गया है.
फ्रूट बेस्ड कार्बोनेटेड ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक भी अब इस 40% टैक्स स्लैब का हिस्सा बन गए हैं. निकोटीन उत्पादों जैसे ई-सिगरेट और वेप्स को भी इस कैटेगरी में शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य इन हानिकारक उत्पादों की खपत को सीमित करना और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करना है.
वाहनों की कैटेगरी में अब बड़े इंजन वाली गाड़ियां भी महंगी होंगी. 1200 सीसी से अधिक इंजन वाली पेट्रोल कारें और 1500 सीसी से अधिक इंजन वाली डीज़ल कारें 40% GST के दायरे में आ गई हैं. इसके अलावा 350 सीसी से अधिक इंजन वाली मोटरसाइकिल, SUV, MUV, MPV और XUV जैसी गाड़ियां भी इस नए टैक्स स्लैब में शामिल हैं.
लग्ज़री यॉट्स और प्राइवेट एयरक्राफ्ट पर भी अब 40% GST लगेगा. सरकार का मानना है कि इन हाई-एंड प्रोडक्ट्स पर टैक्स का बोझ बढ़ाने से आय असमानता को संतुलित करने में मदद मिलेगी, क्योंकि इन्हें आमतौर पर समाज के उच्च वर्ग द्वारा खरीदा जाता है.
सरकार ने खासतौर पर हेल्थ-हैज़र्ड ड्रिंक्स और तंबाकू उत्पादों पर फोकस किया है. अब सभी शुगर युक्त, फ्लेवर्ड और कार्बोनेटेड ड्रिंक पर 40% टैक्स लगेगा. इन ड्रिंक्स का अत्यधिक सेवन मोटापा, डायबिटीज़ और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है, इसलिए इन पर टैक्स बढ़ाने का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ विकल्प चुनने के लिए प्रोत्साहित करना है.
तंबाकू उत्पादों की बात करें तो बिना प्रोसेस किए हुए तंबाकू को छोड़कर लगभग सभी तंबाकू उत्पादों को 40% टैक्स स्लैब में डाल दिया गया है. इसमें सिगरेट, सिगार, वेप्स और रीकॉन्स्टिट्यूटेड तंबाकू उत्पाद शामिल हैं. यह कदम तंबाकू की खपत को नियंत्रित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है.
लग्ज़री प्रोडक्ट्स पर अब कितना GST लगेगा?
इन पर अब 40% GST लागू होगा, जो पहले 28% था.
नया GST स्लैब कब से लागू होगा?
यह नया टैक्स ढांचा 22 सितंबर 2025 से लागू होगा.
किन ड्रिंक्स पर 40% GST लागू होगा?
सभी कार्बोनेटेड, फ्लेवर्ड, शुगर युक्त और कैफीन ड्रिंक इस कैटेगरी में आएंगे.
इस बदलाव का उद्देश्य क्या है?
टैक्स कलेक्शन बढ़ाना, स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों की खपत कम करना और GST ढांचे को सरल बनाना.
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