GST 2.0: सिर्फ उपभोक्ता ही नहीं, कंपनियों को भी सरकार ने दी राहत, पुरानी पैकिंग पर ही बेच सकेंगे बचा हुआ स्टॉक

GST दरों में कटौती का फायदा अब सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा. सरकार ने कंपनियों को पुरानी पैकिंग पर नया MRP लिखने की छूट दी है. यह राहत 31 दिसंबर 2025 तक लागू रहेगी.
GST 2.0: सिर्फ उपभोक्ता ही नहीं, कंपनियों को भी सरकार ने दी राहत, पुरानी पैकिंग पर ही बेच सकेंगे बचा हुआ स्टॉक

GST 2.0: सरकार ने आम आदमी को GST दरों में कटौती का सीधा फायदा पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. उपभोक्ता मामले विभाग के लीगल मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट ने एक सर्कुलर जारी कर कंपनियों को अनुमति दी है कि वे अपने पुराने पैकिंग स्टॉक पर ही संशोधित रेट (MRP) लिख सकती हैं. इस फैसले से जहां उपभोक्ताओं को कम दाम पर सामान मिलेगा, वहीं कंपनियों को भी नए पैकिंग बनाने के खर्च से राहत मिलेगी.

FMCG कंपनियों को मिली राहत

FMCG और अन्य कंपनियों की ओर से लंबे समय से मांग की जा रही थी कि नए पैकिंग तैयार करने में उन्हें भारी नुकसान होगा, क्योंकि उनके पास पहले से ही लाखों पुरानी पैकिंग का स्टॉक मौजूद है. अब सरकार ने उन्हें यह राहत दी है कि वे पुरानी पैकिंग पर ही नया दाम लिखकर (स्टिकर या स्टैम्प के जरिए) सामान बेच सकती हैं.

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पुराने दाम को काटा नहीं जा सकेगा

सर्कुलर के मुताबिक, पैकेट पर छपे पुराने MRP को काटकर नया नहीं लिखा जा सकता. बल्कि पुराने दाम को जस का तस दिखाना होगा और उसके साथ ही नया दाम चिपकाना या प्रिंट करना होगा. इससे उपभोक्ता को साफ दिखेगा कि GST दर में कमी या बढ़ोतरी की वजह से नया दाम क्या तय किया गया है.

31 दिसंबर 2025 तक की छूट

सरकार ने कंपनियों को 31 दिसंबर 2025 तक यह छूट दी है. यानी इस अवधि तक कंपनियां पुरानी पैकिंग का इस्तेमाल कर सकती हैं. या फिर जब तक पुराना पैकिंग स्टॉक खत्म नहीं हो जाता. इस बीच उन्हें सिर्फ इतना ध्यान रखना होगा कि GST में जो भी बदलाव हुआ है, उसी हिसाब से नया दाम साफ तौर पर लिखा जाए.

दाम बढ़ाने पर भी रोक

सरकार ने यह भी साफ किया है कि नया दाम किसी भी हालत में टैक्स में बढ़ोतरी से ज्यादा नहीं होना चाहिए. यानी अगर GST बढ़ा है तो उतना ही दाम बढ़ेगा, उससे ज्यादा नहीं. वहीं अगर टैक्स घटा है, तो दाम उसी अनुपात में कम करना होगा. कंपनियां मनमर्जी से कीमतें नहीं बढ़ा सकतीं.

विज्ञापन और नोटिस की शर्त

सर्कुलर के अनुसार, कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे कम से कम दो बड़े अखबारों में विज्ञापन देकर उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी दें. साथ ही डीलर्स और लीगल मेट्रोलॉजी डिपार्टमेंट को भी नोटिस भेजना अनिवार्य होगा. इसका मकसद यह है कि रेट बदलाव की पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहकों को सही जानकारी मिले.

उपभोक्ताओं को सीधा फायदा

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उपभोक्ताओं को होगा. अब जैसे ही किसी प्रोडक्ट पर GST घटेगा, कंपनियों को नया रेट तुरंत लिखना होगा. यानी ग्राहक को कम दाम पर वही प्रोडक्ट मिलेगा. पहले ऐसा होता था कि कंपनियां पुराने स्टॉक पर भी ज्यादा दाम वसूलती रहती थीं.

उद्योग जगत में भी खुशी

इस फैसले का FMCG सेक्टर और दूसरे उद्योगों ने स्वागत किया है. कंपनियों का कहना है कि इससे पैकिंग का नुकसान नहीं होगा और उपभोक्ता को भी सही समय पर GST दरों का फायदा मिलेगा. उद्योग जगत का मानना है कि इससे बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ता का भरोसा भी मजबूत होगा.

FAQs

Q1. क्या कंपनियां पुरानी पैकिंग पर नया दाम लिख सकती हैं?

Ans: हां, सरकार ने 31 दिसंबर 2025 तक यह अनुमति दी है.

Q2. क्या कंपनियां पुराने दाम को काटकर नया लिख सकती हैं?

Ans: नहीं, पुराने दाम को काटा नहीं जा सकता. नया दाम बगल में स्टिकर या प्रिंट से लिखना होगा.

Q3. नया दाम किस हिसाब से तय होगा?

Ans: GST में जितना बदलाव हुआ है, उतना ही दाम घटेगा या बढ़ेगा. कंपनियां ज्यादा नहीं बढ़ा सकतीं.

Q4. क्या उपभोक्ताओं को जानकारी दी जाएगी?

Ans: हां, कंपनियों को कम से कम दो अखबारों में विज्ञापन और डीलर्स को नोटिस देना अनिवार्य है.

Q5. इस छूट का फायदा किसे होगा?

Ans: इससे कंपनियों को पैकिंग बदलने का खर्च बचेगा और ग्राहकों को GST घटने का फायदा तुरंत मिलेगा.

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