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अगर आप धोखाधड़ी या अनुशासनहीनता में पकड़े गए, तो कंपनी आपका पूरा पैसा रोक सकती है (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
प्राइवेट नौकरी करने वालों के लिए 'ग्रेच्युटी' वो चीज होती है जिसका इंतजार हर कर्मचारी अपनी वफादारी और मेहनत के बदले करता है. हालांकि अभी तक नियम ये था कि अगर आप किसी कंपनी में लगातार 5 साल तक टिके रहते हैं, तभी आप इस मोटी रकम के हकदार बनते थे. लेकिन अब सरकार ने 'नए लेबर कोड' (New Labour Codes) के जरिए खेल पूरी तरह बदल दिया है.
नए लागू हुए नए नियमों ने कर्मचारियों की मौज कर दी है, लेकिन साथ ही कुछ बातों को इग्नोर भी कभी ना करें. लेकिन क्या आप जानते हैं आपने और कोई एक गलती तक कर दी तो ग्रेच्युटी रुक सकती है, तो चलिए जानेंगे कब कंपनी आपको ग्रेच्युटी देने से पीछे हट सकती है.
आइए समझते हैं ग्रेच्युटी का नया गणित और वो खतरे जिनसे आपको बचकर रहना है.
नए लेबर कोड का सबसे बड़ा धमाका 'फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों' (Fixed-Term Employees) के लिए हुआ है. अब तक इन लोगों को 5 साल की पाबंदी के कारण अक्सर ग्रेच्युटी का एक रुपया भी नहीं मिलता था. लेकिन नए नियमों के मुताबिक, अगर आप कॉन्ट्रेक्ट (FTE) पर हैं, तो सिर्फ 1 साल की नौकरी के बाद भी आप ग्रेच्युटी के हकदार होंगे.
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ग्रेच्युटी कितनी मिलेगी, इसका सीधा कनेक्शन आपकी सैलरी से होता है. नए कोड के मुताबिक, आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता आपकी कुल सीटीसी का कम से कम 50% होना चाहिए. जी हां पहले कंपनियां अलाउंस के नाम पर बेसिक सैलरी कम रखती थीं जिससे ग्रेच्युटी कम बनती थी. लेकिन अब जब बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो आपकी ग्रेच्युटी की रकम भी अपने आप मोटी हो जाएगी.
ग्रेच्युटी आपका अधिकार तो है, लेकिन कुछ ऐसी गलतियां हैं जो आपकी पूरी मेहनत पर चूना लगा सकती हैं. कंपनी इन 3 मामलों में आपका पैसा रोक सकती है:
अगर आप कंपनी में रिश्वत लेते, हेराफेरी करते या फिर फर्जी कागजात के जरिए कंपनी को चूना लगाते यानी कि फ्रॉड करते पकड़े गए, तो फिर बॉस आपकी ग्रेच्युटी पर ताला लगा सकता है.
ऑफिस में किसी के साथ मारपीट करना, महिला कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार या ऑफिस के रूल्स को तोड़ना भी आपको भारी पड़ सकता है. तो अगर आप पर अनुशासनहीनता के आरोप साबित होते हैं, तो कंपनी 100% ग्रेच्युटी काट सकती है.
अगर आपकी किसी लापरवाही से कंपनी को फाइनेंशियल चपत लगी है, तो कंपनी उस नुकसान की भरपाई आपकी ग्रेच्युटी के पैसे से कर सकती है. नुकसान काटने के बाद अगर कुछ बचा, तभी वो आपको मिलेगा.
नहीं, इतना भी आसान नहीं होता है.तो अगर कंपनी आपकी ग्रेच्युटी रोकना चाहती है, तो उसे बाकायदा कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा. कंपनी को आपके खिलाफ ठोस सबूत पेश करने होंगे और आपको अपनी सफाई देने का पूरा मौका देना होगा. अगर आरोप साबित नहीं होते और कंपनी बिना वजह पैसा रोकती है, तो उसे बकाया राशि पर भारी ब्याज भी देना पड़ेगा.
नए लेबर कोड ने ग्रेच्युटी पाना आसान तो बना दिया है, लेकिन ऑफिस पॉलिटिक्स और अनुशासन के मामले में आपको और भी ज्यादा अलर्ट रहना होगा. याद रखिए ग्रेच्युटी आपकी बरसों की कंपनी में की गई मेहनत का फल है, इसे अपनी एक छोटी सी गलती की वजह से कंपनी के खाते में न जाने दें. इसलिए ऑफिस में अपना रिकॉर्ड साफ रखें और नए नियमों का पूरा फायदा उठाएं.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या परमानेंट स्टाफ को भी 1 साल में ग्रेच्युटी मिलेगी?
1 साल वाला नियम सिर्फ फिक्स्ड-टर्म (कॉन्ट्रैक्ट) वालों के लिए है. परमानेंट स्टाफ के लिए अब भी 5 साल की शर्त है.
Q2 अगर नौकरी के दौरान कर्मचारी की मौत हो जाए तो?
ऐसी स्थिति में 5 साल वाली शर्त लागू नहीं होती. परिवार को ग्रेच्युटी का पूरा पैसा तुरंत मिलता है.
Q3 क्या नौकरी करते हुए ग्रेच्युटी का पैसा निकाल सकते हैं?
जी नहीं. यह पैसा सिर्फ नौकरी छोड़ने, इस्तीफा देने या रिटायरमेंट के समय ही मिलता है.
Q4 ग्रेच्युटी के पैसे पर कितना टैक्स लगता है?
प्राइवेट कर्मचारियों के लिए 25 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स फ्री है.
Q5 अगर कंपनी पैसा देने में देरी करे तो क्या करें?
नियम के मुताबिक, 30 दिन से ज्यादा की देरी होने पर कंपनी को आपको ब्याज (Interest) सहित पैसा देना होगा.