Gratuity Rules: 1 साल की नौकरी हो या 5 साल की...कर्मचारी ने की ये गलती तो कंपनी कर सकती है ग्रेच्‍युटी देने से इनकार!

ग्रेच्युटी नौकरी छोड़ते वक्त मिलने वाला महत्वपूर्ण फाइनेंशियल बेनिफिट है. नियमों में बदलाव के बाद अब कर्मचारी 1 साल के बाद इसके हकदार होंगे. हालांकि कुछ परिस्थितियों में कंपनी इस भुगतान से इनकार कर सकती है, यहां जानिए इसके बारे में.
Gratuity Rules: 1 साल की नौकरी हो या 5 साल की...कर्मचारी ने की ये गलती तो कंपनी कर सकती है ग्रेच्‍युटी देने से इनकार!

अगर आप नौकरी करते हैं तो ग्रेच्युटी आपके लिए एक बेहद ज़रूरी फाइनेंशियल बेनिफिट है. नए लेबर कोड के बाद अब ग्रेच्युटी के नियम बदल गए हैं और अब कर्मचारी को इसके लिए 5 साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सिर्फ 1 साल काम करने के बाद भी कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार मान लिया जाएगा.

लेकिन ध्यान रहे कुछ स्थितियों में कंपनी चाहे तो ये रकम देने से साफ मना कर सकती है. इसलिए ये जानना बेहद ज़रूरी है कि कौन सी गलतियां आपकी मेहनत की कमाई छीन सकती हैं.

किन हालातों में कंपनी ग्रेच्युटी देने से इनकार कर सकती है?

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कंपनी किसी कर्मचारी का ग्रेच्युटी पैसा बिना वजह नहीं रोक सकती. लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी हैं जहां कंपनी को ये अधिकार मिल जाता है कि वो इस भुगतान को रोक दे.

1. अनैतिक व्यवहार या गंभीर प्रोफेशनल मिसकंडक्ट

अगर कर्मचारी पर हिंसा, बदसलूकी, धमकी, उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप साबित हो जाते हैं, वो कंपनी की नीतियों का जानबूझकर उल्लंघन करता है तो तो कंपनी ग्रेच्युटी रोक सकती है.

2. कर्मचारी की लापरवाही से कंपनी को आर्थिक नुकसान

अगर कर्मचारी की किसी गलती या नेग्लिजेंस से कंपनी को भारी नुकसान हुआ है, तो कंपनी ग्रेच्युटी काट सकती है. लेकिन बिना सबूत कंपनी ऐसा नहीं कर सकती.

3. Fraud या Criminal Act साबित होना

अगर कर्मचारी ने चोरी, रिश्वत, फर्जी दस्तावेज, धोखाधड़ी जैसा अपराध किया है, तो कंपनी पूरी ग्रेच्युटी रोक सकती है.

4. कंपनी Gratuity Act के तहत रजिस्टर्ड न हो

अगर कंपनी Gratuity Act के दायरे में नहीं आती, तो ग्रेच्युटी देना या न देना कंपनी की मर्जी पर निर्भर करता है. इस स्थिति में कर्मचारी कानूनी दावा नहीं कर सकता.

कंपनी को सबूत और प्रक्रिया फॉलो करनी पड़ती है

कंपनी अगर किसी की ग्रेच्‍युटी रोकती है तो उसे पहले सबूत और उसकी वजह को पेश करना होता है. जो भी वजह कंपनी दे रही है, उसके लिए उसे कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी करना होता है. इसके बाद दोनों पक्षों की सुनवाई होती है. कर्मचारी के दोषी पाने के बाद ही ग्रेच्युटी का पैसा रोका जाएगा. लेकिन ऐसे में भी कंपनी उतनी रकम ही काटेगी, जितना उसे नुकसान हुआ है.

ग्रेच्युटी के नियम क्या कहते हैं?

  • अगर किसी कंपनी में 10 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, तो ग्रेच्युटी देना अनिवार्य है.
  • नए लेबर कोड के लागू होने के बाद अब कर्मचारी 1 साल काम करने के बाद ग्रेच्‍युटी पाने का हकदार है. पहले ये सीमा 5 साल की थी.
  • ग्रेच्‍युटी की गणना एक निश्चित फॉर्मूले से होती है. ग्रेच्युटी = ग्रेच्युटी की रकम = (अंतिम सैलरी) x (15/26) x (कंपनी में कितने साल काम किया).

FAQs

Q. क्या अब 1 साल नौकरी करने के बाद ग्रेच्युटी मिलेगी?

हां, नए लेबर कोड में ये प्रावधान है.

Q. कंपनी किस आधार पर ग्रेच्युटी रोक सकती है?

अगर कर्मचारी के खिलाफ misconduct, fraud, या नुकसान के सबूत हों.

Q. क्या बिना नोटिस या सबूत कंपनी ग्रेच्युटी रोक सकती है?

नहीं, कंपनी को कारण बताओ नोटिस देना और जांच करना जरूरी है.

Q. अगर कंपनी गलत तरीके से ग्रेच्युटी रोक ले तो क्या करें?

कर्मचारी श्रम निर्वाचन या जिला श्रम आयुक्त के पास शिकायत कर सकता है.

Q. क्या 4 साल 8 महीने काम करने पर 5 साल माना जाता है?

हां, कई केस में 4 साल 8 महीने सर्विस को 5 साल पूरा माना जाता है.

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