15 साल कंपनी में काम किया और 1,00,000 आखिरी सैलरी, कितनी मिलेगी ग्रेच्‍युटी? क्‍या इस रकम पर देना पड़ेगा टैक्‍स!

15 साल की नौकरी और 1 लाख की आखिरी सैलरी पर कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी? आसान फॉर्मूले से समझें पूरा कैलकुलेशन और ग्रेच्‍युटी की रकम पर लगने वाले टैक्स के नियम.
15 साल कंपनी में काम किया और 1,00,000 आखिरी सैलरी, कितनी मिलेगी ग्रेच्‍युटी? क्‍या इस रकम पर देना पड़ेगा टैक्‍स!

नौकरीपेशा जब नौकरी छोड़ता है या फिर रिटायर होता है तो कंपनी से उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट किया जाता है. इसमें फाइनल सैलरी, लीव एन्‍कैशमेंट वगैरह तमाम चीजें शामिल होती हैं. अगर कोई व्‍यक्ति लगातार 5 साल तक किसी कंपनी में काम करता है तो वो ग्रेच्‍युटी का भी हकदार हो जाता है. लेकिन उसे कितनी ग्रेच्‍युटी मिलेगी, ये एक फॉर्मूले के हिसाब से तय किया जाता है. अगर आपने किसी कंपनी में 15 साल तक काम किया और आपकी आखिरी सैलरी 1 लाख रुपए महीना थी, तो आपको ग्रेच्युटी के तौर पर कितनी रकम मिलेगी? क्‍या इस रकम पर कोई टैक्स लगेगा? यहां जानिए इस बारे में.

क्‍या है ग्रेच्‍युटी?

ग्रेच्युटी का भुगतान 'पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972' के तहत किया जाता है. ये कंपनी की तरफ से अपने कर्मचारी को उसकी लंबी और निष्ठावान सेवा के लिए दिया जाने वाला एक इनाम है. इस कानून के अनुसार, कोई भी कर्मचारी ग्रेच्युटी का हक़दार तब बनता है, जब वह एक ही कंपनी में लगातार कम से कम 5 साल की नौकरी पूरी कर लेता है. ग्रेच्‍युटी का नियम उन सभी कंपनियों पर लागू होता है, जहां 10 या उससे ज़्यादा कर्मचारी काम करते हैं.

ग्रेच्युटी कैलकुलेट करने का फॉर्मूला क्या है?

जिन कंपनियों पर ग्रेच्युटी एक्ट लागू होता है, वहां कर्मचारियों की ग्रेच्युटी एक तय फॉर्मूले के आधार पर कैलकुलेट की जाती है. यह फॉर्मूला बेहद सरल है:

ग्रेच्युटी = (अंतिम सैलरी) x (काम किए गए साल) x (15/26)

अंतिम सैलरी: इसका मतलब आपकी आखिरी महीने की पूरी सैलरी नहीं होती. यहां 'सैलरी' का मतलब आपकी
बेसिक सैलरी (Basic Salary) + महंगाई भत्ता (Dearness Allowance - DA) से है. इसमें HRA, स्पेशल अलाउंस या अन्य भत्ते शामिल नहीं होते.

काम किए गए साल: आपने कंपनी में जितने साल काम किया है, वो यहां लिखा जाएगा.

15/26: महीने में 30 दिन होते हैं, लेकिन 4 रविवार को छुट्टी मानकर काम के दिन 26 गिने जाते हैं. फॉर्मूले में 15 दिन की सैलरी को आधार माना जाता है, इसलिए इसे 15/26 लिखा जाता है.

15 साल और 1 लाख सैलरी पर कितनी बनेगी ग्रेच्युटी?

अब अगर 15 साल की नौकरी और 1 लाख रुपए आखिरी सैलरी को लेकर कैलकुलेशन करें तो-
अंतिम सैलरी: ₹ 1,00,000
काम किए गए साल: 15 साल
फॉर्मूला: (1,00,000) x (15) x (15/26) = ₹ 8,65,384.61 रुपए

इस तरह आपको 15 साल की नौकरी और 1 लाख की अंतिम (बेसिक+DA) सैलरी पर आपको लगभग ₹ 8,65,385 की ग्रेच्युटी मिलेगी. ध्‍यान रहे कि यहां कैलकुलेशन के लिए हम ये मानकर चले हैं कि आपकी 1 लाख रुपए की अंतिम सैलरी ही आपकी 'बेसिक सैलरी + DA' है.

क्या इस रकम पर टैक्स देना होगा?

'पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट' के तहत आने वाले निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए, ₹ 20 लाख तक की ग्रेच्युटी की रकम पूरी तरह से टैक्स-फ्री होती है. आपके मामले में, ग्रेच्युटी की रकम ₹ 8,65,385 है, जो 20 लाख रुपए की सीमा से काफ़ी कम है. इसलिए, आपको इस पूरी रकम पर एक भी रुपये का टैक्स नहीं देना होगा. यह पूरी की पूरी रकम आपकी होगी. अगर किसी की ग्रेच्युटी 20 लाख से ज़्यादा बनती है (जैसे 22 लाख), तो सिर्फ अतिरिक्त 2 लाख रुपए पर ही उसकी इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्‍स लगेगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारी भी ग्रेच्युटी के हकदार होते हैं?

उत्तर: हां, बिल्कुल. पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के अनुसार, अगर कोई कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी (Contract Employee) भी एक ही नियोक्ता (Employer) के साथ लगातार 5 साल की सेवा पूरी कर लेता है, तो वो ग्रेच्युटी का हकदार बन जाता है. कर्मचारी का स्थायी (Permanent) या कॉन्ट्रैक्ट पर होना मायने नहीं रखता, बल्कि सेवा की निरंतरता (Continuous Service) महत्वपूर्ण है.

प्रश्न 2: मैंने 4 साल 9 महीने काम किया है, क्या मुझे ग्रेच्युटी मिलेगी?

उत्तर: हां, आपको ग्रेच्युटी मिलेगी. ग्रेच्युटी एक्ट के सेक्शन 2A के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी नौकरी के आखिरी साल में 240 दिन से ज़्यादा काम कर लेता है, तो उसकी सेवा को पूरा एक साल माना जाता है. इसलिए, 4 साल 9 महीने की नौकरी को 5 साल की सेवा मानकर आपको ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा.

प्रश्न 3: अगर कंपनी ग्रेच्युटी देने से मना करे तो क्या करना चाहिए?

उत्तर: अगर आप ग्रेच्युटी के हकदार हैं और कंपनी आपको भुगतान करने से मना करती है, तो आप कानूनी कदम उठा सकते हैं. सबसे पहले, आपको अपनी कंपनी को एक लीगल नोटिस भेजना चाहिए. अगर इसके बाद भी भुगतान नहीं होता, तो आप अपने क्षेत्र के लेबर कमिश्नर (Labour Commissioner) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जो इस मामले की सुनवाई करेंगे.

प्रश्न 4: क्या कंपनी किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी रोक सकती है?

उत्तर: हां, कुछ विशेष परिस्थितियों में कंपनी को कर्मचारी की ग्रेच्युटी को आंशिक या पूरी तरह से रोकने का अधिकार है. ऐसा तब हो सकता है जब कर्मचारी को कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या किसी अनैतिक या गैर-कानूनी व्यवहार के कारण नौकरी से निकाला गया हो. हालांकि, इसके लिए कंपनी को ठोस सबूत देने होते हैं.

प्रश्न 5: क्या ग्रेच्युटी कैलकुलेशन में HRA, स्पेशल अलाउंस और बोनस भी शामिल होता है?

उत्तर: नहीं. जिन कंपनियों पर 'पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट' लागू होता है, वहां ग्रेच्युटी की गणना केवल कर्मचारी की अंतिम बेसिक सैलरी (Basic Salary) और महंगाई भत्ते (Dearness Allowance - DA) के आधार पर ही की जाती है. हाउस रेंट अलाउंस (HRA), स्पेशल अलाउंस, बोनस, या किसी भी अन्य प्रकार के भत्ते को इस गणना में शामिल नहीं किया जाता है.

प्रश्न 6: मुझे नौकरी छोड़ने के कितने दिन बाद ग्रेच्युटी का पैसा मिल जाना चाहिए?

उत्तर: नियम के अनुसार, कर्मचारी द्वारा नौकरी छोड़ने या रिटायर होने के 30 दिनों के भीतर कंपनी को ग्रेच्युटी का भुगतान कर देना चाहिए. अगर कंपनी ऐसा करने में देरी करती है, तो उसे ग्रेच्युटी की रकम पर साधारण ब्याज (Simple Interest) के साथ भुगतान करना पड़ सकता है.


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