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ज़ी बिज़नेस के ‘Bucks Talk’ शो में एक्सपर्ट संजय कथूरिया ने बताया कि लोन लेना गलत नहीं है, बस मैनेजमेंट सही होना चाहिए (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
आज के टाइम में Loan लेना आम बात हो गई है. कोई घर खरीदने के लिए Loan ले रहा है, कोई कार के लिए और कई लोग ट्रैवल या गैजेट्स के लिए भी EMI का सहारा ले रहे हैं. लेकिन असली सवाल यह है कि कौन सा Loan सही है और कौन सा गलत?
ज़ी बिज़नेस के Podcast शो ‘Bucks Talk’ में Finance Content Creator Sanjay Kathuria ने इसी सवाल का आसान भाषा में जवाब दिया. उन्होंने बताया कि Loan लेना कोई खराब बात नहीं है, लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि Loan किस चीज के लिए लिया जा रहा है और उसकी EMI आपकी कमाई के हिसाब से कितनी है.
Sanjay Kathuria के मुताबिक Loan को दो हिस्सों में बांटना चाहिए:
उन्होंने कहा कि जब आप Loan लेकर कुछ “create” करते हैं, तो वह Good Debt होता है.
जैसे:
घर खरीदना
बिजनेस शुरू करना
कोई productive asset बनाना
उन्होंने एक उदाहरण दिया कि एक महिला ने कैंडल बिजनेस शुरू करने के लिए 5-6 लाख रुपये का लोन लिया था. आज वह हर महीने करीब ₹20 लाख की बिक्री करती हैं और लगभग ₹4 लाख का मुनाफा कमा रही हैं.
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यानी:
जब Loan income create करे, तो वह Good Loan माना जा सकता है.
Good Loan का सबसे जरूरी Formula
Podcast में Sanjay Kathuria ने एक अहम नियम बताया:
“Total Cost of Ownership आपकी Income के 40% से कम होनी चाहिए.”
मतलब:
उन्होंने कहा:
आजकल लोग सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल के लिए भी Loan लेने लगे हैं.
इन्हें Sanjay Kathuria ने Bad Debt की कैटेगरी में रखा.
क्यों?
क्योंकि इन चीजों की वैल्यू समय के साथ घटती है. यानी पैसा खर्च हो जाता है लेकिन asset नहीं बनता.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर Bad Loan पूरी तरह गलत नहीं होता.
उन्होंने कहा अगर आप rules के अंदर रहकर खर्च करते हैं, तो दिक्कत नहीं होती.
उनके मुताबिक किसी भी Bad Loan की EMI आपकी income के 15% से कम होनी चाहिए
यानी कि अगर कोई व्यक्ति Travel Loan या gadget EMI लेता भी है, तो उसे अपनी कमाई के हिसाब से लिमिट में रखना चाहिए.
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Sanjay Kathuria ने इस पर भी साफ राय दी.
उनके मुताबिक अगला Loan तभी लेना चाहिए जब पुरानी EMI खत्म हो जाए या आपकी income बढ़ जाए
उन्होंने कहा कि Rule Based Spending सबसे जरूरी है.
यानी:
Spending हमेशा rules के हिसाब से होनी चाहिए
और Investments हमेशा goals के हिसाब से
Podcast में उन्होंने एक दिलचस्प बात कही. उनके मुताबिक लोग घर को Asset मानते हैं, लेकिन असल में वह एक Expense भी है. क्योंकि घर के साथ लगातार खर्च जुड़े रहते हैं.
इसलिए घर वही लेना चाहिए जिसे आप आराम से afford कर सकें. तो अगर कोई व्यक्ति तनख्वाह से तनख्वाह तक जिंदगी जी रहा है, तो उसे अपनी EMI तय करते समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए.
लोन जिंदगी खराब नहीं करता. गलत कैलकुलेशन और uncontrolled EMI करती है.तो अगर EMI इनकम के हिसाब से है,खर्च के नियम में है और लोन किसी ज़रूरत या क्रिएशन के लिए लिया गया है. इसलिए लोन एक अच्छा फाइनेंशियल टूल बन सकता है. लेकिन अगर हर इच्छा EMI पर पूरी होने लगे, तो वही सुविधा धीरे-धीरे फाइनेंशियल प्रेशर बन सकती है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 कई छोटी-छोटी EMI का CIBIL स्कोर पर क्या असर पड़ता है?
इससे स्कोर गिर सकता है. बैंक को लगता है कि आप छोटे-छोटे खर्चों के लिए भी कर्ज पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं
Q2 अगर EMI सैलरी के 40% से ज्यादा हो, तो क्या नया लोन मिलेगा?
बैंक आमतौर पर 50% से ज्यादा EMI होने पर लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देते हैं या ब्याज दर बढ़ा देते हैं
Q3 क्या 'No Cost EMI' पर सामान लेना भी 'बैड डेट' है?
क्योंकि यह एक फिजूलखर्ची (Consumption) है. ब्याज न सही, पर यह आपकी मंथली बचत को कम कर देती है.
Q4 क्या होम लोन को समय से पहले चुका देना चाहिए?
अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसा है और निवेश पर ब्याज से कम रिटर्न मिल रहा है, तो लोन चुकाना ही समझदारी है
Q5 EMI शुरू करने से पहले सबसे जरूरी काम क्या है?
6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं, इससे मुसीबत के समय आपकी EMI बाउंस नहीं होगी और सिबिल खराब नहीं होगा