Loan लेना सही है या गलत? संजय कथूरिया ने समझाया Good और Bad Debt का गेम, कैसे EMI चलाती है आपकी लाइफ?

ईएमआई (EMI) के बोझ से बचना है? ज़ी बिज़नेस के ‘Bucks Talk’ शो में एक्सपर्ट संजय कथूरिया ने बताया कि लोन लेना गलत नहीं है, बस मैनेजमेंट सही होना चाहिए. जानिए क्या है गुड और बैड डेट का '40% और 15%' वाला फॉर्मूला, जो आपकी लाइफ को कर्ज मुक्त और कंफर्टेबल बना सकता है.
Loan लेना सही है या गलत? संजय कथूरिया ने समझाया Good और Bad Debt का गेम, कैसे EMI चलाती है आपकी लाइफ?

ज़ी बिज़नेस के ‘Bucks Talk’ शो में एक्सपर्ट संजय कथूरिया ने बताया कि लोन लेना गलत नहीं है, बस मैनेजमेंट सही होना चाहिए  (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt) 

आज के टाइम में Loan लेना आम बात हो गई है. कोई घर खरीदने के लिए Loan ले रहा है, कोई कार के लिए और कई लोग ट्रैवल या गैजेट्स के लिए भी EMI का सहारा ले रहे हैं. लेकिन असली सवाल यह है कि कौन सा Loan सही है और कौन सा गलत?

ज़ी बिज़नेस के Podcast शो ‘Bucks Talk’ में Finance Content Creator Sanjay Kathuria ने इसी सवाल का आसान भाषा में जवाब दिया. उन्होंने बताया कि Loan लेना कोई खराब बात नहीं है, लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि Loan किस चीज के लिए लिया जा रहा है और उसकी EMI आपकी कमाई के हिसाब से कितनी है.

क्या लोन लेना गलत है?

  • Sanjay Kathuria के अनुसार असल में Problem Loan लेने में नहीं होती
  • Problem तब शुरू होती है जब EMI आपकी income पर हावी होने लगती है.

सबसे पहले समझिए: Good Debt और Bad Debt

Sanjay Kathuria के मुताबिक Loan को दो हिस्सों में बांटना चाहिए:

  • अच्छा कर्ज़
  • बुरा कर्ज

उन्होंने कहा कि जब आप Loan लेकर कुछ “create” करते हैं, तो वह Good Debt होता है.

जैसे:

घर खरीदना
बिजनेस शुरू करना
कोई productive asset बनाना

उन्होंने एक उदाहरण दिया कि एक महिला ने कैंडल बिजनेस शुरू करने के लिए 5-6 लाख रुपये का लोन लिया था. आज वह हर महीने करीब ₹20 लाख की बिक्री करती हैं और लगभग ₹4 लाख का मुनाफा कमा रही हैं.

यानी:

जब Loan income create करे, तो वह Good Loan माना जा सकता है.

Good Loan का सबसे जरूरी Formula

Podcast में Sanjay Kathuria ने एक अहम नियम बताया:

“Total Cost of Ownership आपकी Income के 40% से कम होनी चाहिए.”

मतलब:

  • सिर्फ EMI नहीं
  • बल्कि उस संपत्ति से जुड़े बाकी खर्च भी जोड़िए.

उन्होंने कहा:

  • अगर आपकी income ₹1 लाख है तो आपकी कुल EMI ₹40 हजार के आसपास रहनी चाहिए
  • Home Loan, Car Loan, iPhone EMI और Travel EMI सब मिलाकर भी यह सीमा कंट्रोल में रहनी चाहिए
  • उनके मुताबिक अगर EMI income के हिसाब से manageable है, तो जिंदगी कंफर्टेबल रहती है.

गुड लोन के लिए '40% का नियम'

  • EMI का कुल योग मासिक आय के 40% से ज्यादा नहीं होना चाहिए
  • ₹1 लाख कमाते हैं, तो आपकी EMI की लिमिट अधिकतम ₹40,000 होनी चाहिए
  • इस 40% की सीमा में होम लोन, कार लोन के साथ आईफोन और ट्रैवल ईएमआई भी जोड़ें
  • EMIऔर उस चीज से जुड़े बाकी खर्चों को मिलाकर कुल बोझ आय के 55% से ऊपर नहीं जाना चाहिए
  • इस लिमिट के दायरे में रहने से आप कभी भी कर्ज के जाल में नहीं फंसेंगे


सबसे तेजी से बढ़ रहा है ट्रैवल लोन

आजकल लोग सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल के लिए भी Loan लेने लगे हैं.

  • iPhone EMI
  • ट्रैवल EMI
  • इंस्टेंट लोन
  • कंजम्पशन लोन

इन्हें Sanjay Kathuria ने Bad Debt की कैटेगरी में रखा.

क्यों?

क्योंकि इन चीजों की वैल्यू समय के साथ घटती है. यानी पैसा खर्च हो जाता है लेकिन asset नहीं बनता.

Bad Loan के लिए भी Rule जरूरी

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर Bad Loan पूरी तरह गलत नहीं होता.

उन्होंने कहा अगर आप rules के अंदर रहकर खर्च करते हैं, तो दिक्कत नहीं होती.

उनके मुताबिक किसी भी Bad Loan की EMI आपकी income के 15% से कम होनी चाहिए

यानी कि अगर कोई व्यक्ति Travel Loan या gadget EMI लेता भी है, तो उसे अपनी कमाई के हिसाब से लिमिट में रखना चाहिए.

ट्रैवल और आईफोन लोन: 'बैड डेट' और 15% का रूल

  • iPhone, गैजेट्स या ट्रैवल के लिए लिया गया लोन 'बैड लोन' कहलाता है
  • यह लोन कुछ बनाने के लिए नहीं, बल्कि केवल खर्च के लिए होता है
  • लिमिट में रहे तो ठीक, ज्यादा हुआ तो आपकी वित्तीय सेहत बिगाड़ देगा
  • बैड लोन की EMI कुल इनकम के 15% से ज्यादा कभी नहीं होनी चाहिए
  • नया बैड लोन तभी लें जब पिछला लोन पूरी तरह खत्म हो चुका हो
  • पिछला लोन चल रहा है, तो नया लोन तभी लें जब आपकी सैलरी बढ़ जाए
  • अपने खर्चों को हमेशा नियमों के आधार पर ही तय करें
  • अगर बैड लोन 15% के अंदर है, तो आप बिना किसी तनाव के लाइफ एन्जॉय कर सकते है


अगला Loan कब लेना चाहिए?

Sanjay Kathuria ने इस पर भी साफ राय दी.

उनके मुताबिक अगला Loan तभी लेना चाहिए जब पुरानी EMI खत्म हो जाए या आपकी income बढ़ जाए

उन्होंने कहा कि Rule Based Spending सबसे जरूरी है.

यानी:

Spending हमेशा rules के हिसाब से होनी चाहिए
और Investments हमेशा goals के हिसाब से

घर Asset है या Expense?

Podcast में उन्होंने एक दिलचस्प बात कही. उनके मुताबिक लोग घर को Asset मानते हैं, लेकिन असल में वह एक Expense भी है. क्योंकि घर के साथ लगातार खर्च जुड़े रहते हैं.

इसलिए घर वही लेना चाहिए जिसे आप आराम से afford कर सकें. तो अगर कोई व्यक्ति तनख्वाह से तनख्वाह तक जिंदगी जी रहा है, तो उसे अपनी EMI तय करते समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए.

आखिर में सबसे जरूरी बात

लोन जिंदगी खराब नहीं करता. गलत कैलकुलेशन और uncontrolled EMI करती है.तो अगर EMI इनकम के हिसाब से है,खर्च के नियम में है और लोन किसी ज़रूरत या क्रिएशन के लिए लिया गया है. इसलिए लोन एक अच्छा फाइनेंशियल टूल बन सकता है. लेकिन अगर हर इच्छा EMI पर पूरी होने लगे, तो वही सुविधा धीरे-धीरे फाइनेंशियल प्रेशर बन सकती है.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 कई छोटी-छोटी EMI का CIBIL स्कोर पर क्या असर पड़ता है?

इससे स्कोर गिर सकता है. बैंक को लगता है कि आप छोटे-छोटे खर्चों के लिए भी कर्ज पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं

Q2 अगर EMI सैलरी के 40% से ज्यादा हो, तो क्या नया लोन मिलेगा?

बैंक आमतौर पर 50% से ज्यादा EMI होने पर लोन एप्लीकेशन रिजेक्ट कर देते हैं या ब्याज दर बढ़ा देते हैं

Q3 क्या 'No Cost EMI' पर सामान लेना भी 'बैड डेट' है?

क्योंकि यह एक फिजूलखर्ची (Consumption) है. ब्याज न सही, पर यह आपकी मंथली बचत को कम कर देती है.

Q4 क्या होम लोन को समय से पहले चुका देना चाहिए?

अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसा है और निवेश पर ब्याज से कम रिटर्न मिल रहा है, तो लोन चुकाना ही समझदारी है

Q5 EMI शुरू करने से पहले सबसे जरूरी काम क्या है?

6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाएं, इससे मुसीबत के समय आपकी EMI बाउंस नहीं होगी और सिबिल खराब नहीं होगा

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