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तेजी से बढ़ रही महंगाई के बीच कई बार खर्च इस कदर बढ़ जाते हैं कि हम इनके चक्कर में अपने फ्यूचर प्लानिंग में लापरवाही बरतने लगते हैं और इसे टालते रहते हैं. लेकिन एक पुरानी कहावत है, "जवानी में किया गया निवेश, बुढ़ापे में आराम देता है." ये बात 100% सच है. आपकी उम्र का हर दशक खास फाइनेंशियल जिम्मेदारियां और मौके लेकर आता है. इसलिए, 20s, 30s, और 40s पर एक सोचा-समझा फाइनेंशियल प्लान होना बहुत जरूरी है. तो चलिए, समझते हैं कि उम्र के इन तीन अहम पड़ावों पर आपको अपने पैसों को कैसे मैनेज और इन्वेस्ट करना चाहिए.
ये वो दशक है जब आप कमाना शुरू करते हैं, जिम्मेदारियां कम होती हैं और रिस्क लेने की क्षमता सबसे ज्यादा होती है. ये समय अपनी फाइनेंशियल लाइफ की नींव रखने का सबसे बेहतरीन समय है.
सबसे पहले अपनी कमाई और खर्चों का हिसाब रखना शुरू करें. 80/20 का नियम अपना सकते हैं, जिसमें 80% कमाई खर्चों के लिए और 20% बचत और निवेश के लिए रखी जाती है. इससे आपको पता चलेगा कि आपका पैसा कहां जा रहा है और आप कहां कटौती कर सकते हैं.
नौकरी छूटना, मेडिकल इमरजेंसी जैसी अप्रत्याशित स्थितियों के लिए तैयार रहना जरूरी है. अपने 3 से 6 महीने के जरूरी खर्चों के बराबर रकम एक अलग सेविंग्स अकाउंट में रखें. मान लीजिए आपका महीने का खर्च 20,000 रुपए है, तो आपका इमरजेंसी फंड 60,000 से 1,20,000 रुपए के बीच होना चाहिए.
इस उम्र में प्रीमियम कम होता है. इसलिए, एक अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस और एक टर्म इंश्योरेंस प्लान जरूर खरीदें. टर्म इंश्योरेंस आपकी गैर-मौजूदगी में आपके परिवार को वित्तीय सुरक्षा देता है और हेल्थ इंश्योरेंस आपको मेडिकल खर्चों से बचाता है.
ये सबसे जरूरी कदम है. आप जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, कम्पाउंडिंग की ताकत से आपका पैसा उतनी ही तेजी से बढ़ेगा.
हर महीने एक छोटी रकम, जैसे 500 रुपए से भी आप म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू कर सकते हैं. ये लंबी अवधि में एक बड़ा फंड बनाने का सबसे आसान तरीका है. जब आप नियमित रूप से निवेश करते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी कम हो जाता है, जिसे रुपी कॉस्ट एवरेजिंग कहते हैं.
ये एक सरकारी स्कीम है जो गारंटीड रिटर्न और टैक्स लाभ देती है. इसमें सालाना 500 रुपए से लेकर 1.5 लाख रुपए तक जमा कर सकते हैं. इसका 15 साल का लॉक-इन पीरियड इसे लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए बेहतरीन बनाता है.
30 की उम्र तक आते-आते शादी, बच्चे, घर खरीदने जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्य सामने आ जाते हैं. इस दशक में आपकी कमाई तो बढ़ती है, लेकिन खर्चे भी आसमान छूने लगते हैं.

अपने नए लक्ष्यों (बच्चों की पढ़ाई, घर का डाउन पेमेंट) के हिसाब से अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग को अपडेट करें.
जैसे-जैसे आपकी सैलरी बढ़े, अपनी SIP की रकम भी बढ़ाते जाएं (टॉप-अप SIP). कोशिश करें कि अपनी कमाई का कम से कम 30-40% हिस्सा निवेश करें.
इस उम्र में आपको थोड़ा संतुलित रुख अपनाना चाहिए. अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट दोनों को शामिल करें.आप अपने कुल निवेश का लगभग 40% इक्विटी (शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड) में लगा सकते हैं.
रिटायरमेंट दूर लग सकता है, लेकिन इसके लिए निवेश करने का ये सही समय है.
ये एक सरकारी रिटायरमेंट स्कीम है और इसमें टैक्स छूट के फायदे भी मिलते हैं. आप इसमें सालाना न्यूनतम 1,000 रुपए से निवेश शुरू कर सकते हैं. इसमें निवेश करके आप अपने लिए रिटायरमेंट कॉपर्स और पेंशन, दोनों की व्यवस्था कर सकते हैं.
अगर आपके ऊपर कोई लोन, खासकर हाई-इंटरेस्ट वाला पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया है, तो उसे जल्द से जल्द चुकाने की कोशिश करें.
ये दशक आपके करियर का पीक टाइम हो सकता है, लेकिन साथ ही ये रिटायरमेंट से पहले का आखिरी बड़ा मौका भी है. इस उम्र में अवेयरनेस तो होती है, पर समय कम होता है.

सबसे पहले ये कैलकुलेट करें कि आपको रिटायरमेंट के बाद हर महीने कितने पैसों की जरूरत होगी. महंगाई को ध्यान में रखते हुए, अपने मौजूदा सालाना खर्च का कम से कम 50 गुना फंड जुटाने का लक्ष्य रखें. अगर आपका मासिक खर्च 50,000 रुपए है, तो आपको लगभग 3 करोड़ रुपए का रिटायरमेंट कॉर्पस चाहिए होगा.
अगर आप रिटायरमेंट के करीब हैं, तो अपने निवेश में जोखिम कम करना समझदारी है. धीरे-धीरे अपना पैसा इक्विटी से निकालकर डेट फंड्स या फिक्स्ड इनकम वाले विकल्पों में शिफ्ट करें.
जांचें कि आपका हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस कवर आज की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त है या नहीं. अगर नहीं, तो उसे बढ़ाएं.
कोशिश करें कि रिटायरमेंट तक आपके ऊपर कोई बड़ा लोन, जैसे होम लोन या कार लोन न हो. इससे रिटायरमेंट के बाद आपकी मासिक आय पर दबाव नहीं पड़ेगा.
अगर आपने अभी तक बच्चों के भविष्य के लिए प्लानिंग नहीं की है, तो तुरंत अलग से फंड बनाना शुरू करें. इसके लिए आप अलग से SIP या PPF अकाउंट का इस्तेमाल कर सकते हैं.
आप म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए सिर्फ 500 रुपए प्रति माह से निवेश शुरू कर सकते हैं.
आपको कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए. इसे एक ऐसे सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड में रखना चाहिए जहां से आप आसानी से पैसा निकाल सकें.
हां, दोनों जरूरी हैं. हेल्थ इंश्योरेंस बीमारी के इलाज में होने वाले खर्चों को कवर करता है, जबकि टर्म इंश्योरेंस आपके न रहने पर आपके परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है.
PPF एक सुरक्षित निवेश है जिसमें गारंटीड रिटर्न मिलता है और ये टैक्स फ्री होता है. वहीं, NPS बाजार से जुड़ा है और इसमें रिटर्न की गारंटी नहीं होती, लेकिन लंबी अवधि में इससे ज्यादा फंड बनने की संभावना रहती है. युवाओं के लिए NPS और PPF का कॉम्बिनेशन एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
40 की उम्र में रिटायरमेंट प्लान करने के लिए आपको अपने रिटायरमेंट कॉर्पस का सही आकलन करना होगा, अपने निवेश को सुरक्षित विकल्पों में लगाना होगा, कर्ज मुक्त होना होगा और एक बड़ा हेल्थ इंश्योरेंस कवर सुनिश्चित करना होगा.