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सही जानकारी के अभाव में उनकी वेल्थ उस स्पीड से नहीं बढ़ पाती, जितनी बढ़नी चाहिए (प्रतीकात्मक फोटो)
पैसा कमाना वैसे तो आज के टाइम में शायद फिर भी आसान हो सकता है, लेकिन उस कमाए हुए पैसे को बचाना और उसे सही जगह निवेश करके बढ़ाना (Grow करना) ही असल में हर किसी के लिए सबसे बड़ा असली चैलेंज होता है. अक्सर लोग मेहनत से पैसा तो कमा लेते हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में उनकी वेल्थ उस स्पीड से नहीं बढ़ पाती, जितनी बढ़नी चाहिए. इसी कंफ्यूजन को सुलझाने के लिए ज़ी बिज़नेस के खास शो 'Paison Ki Pathshala' में टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने विस्तार से बताया है कि साल 2026 और उसके आगे के लिए एक निवेशक का नजरिया कैसा होना चाहिए.
जी हां इस खास चर्चा में बलवंत जैन ने 'PPF vs Mutual Funds' के से लेकर 'Emergency Fund' को बनाए रखने के सही तरीके तक पर खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि कैसे आप अपने पोर्टफोलियो को बैलेंस कर सकते हैं और 2026 के लिए सही एसेट एलोकेशन की प्लानिंग हर किसी की आखिर क्या होनी चाहिए.
असल में आज भी हमारी पुरानी जनरेशन फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) को म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले ज्यादा सेफ और सिक्योर मानती है. ऐसे में क्या 2026 के इस टाइम में पूरा पैसा केवल FD या PPF में डाल देना एक स्मार्ट डिसीजन है? या फिर क्या यह अपनी वेल्थ को ब्लॉक करने या उसे डूबाने जैसा है?
इस पर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन ने बहुत ही सटीक जवाब पेश किया. उन्होंने निवेश के सबसे बुनियादी नियम "Don’t put all your eggs in one basket" (अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें) का हवाला देते हुए 'एसेट एलोकेशन' के महत्व को समझाया है. उनके अनुसार, सारा पैसा किसी एक ही एसेट क्लास में रख देना रिस्क से भरा हो सकता है.
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इतना ही नहीं, बलवंत जैन ने सुझाव दिया कि आपको अपना पैसा केवल एक जगह न रखकर उसे बांटना चाहिए. अगर आप इक्विटी (Equity) में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं, तो फिर उसके साथ-साथ डेट का हिस्सा भी बैलेंस रखना जरूरी होता है. उन्होंने बताया कि डेट पोर्टफोलियो के लिए PPF (Public Provident Fund) आज भी एक बेहतरीन ऑप्शन है.
वैसे PPF की सबसे बड़ी खासियत बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें मिलने वाला 7.1% का रिटर्न पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो सेफ रिटर्न के साथ टैक्स बचाना चाहते हैं. इसके अलावा, जब मार्केट में उतार-चढ़ाव होता है, तो यही एसेट एलोकेशन आपको एक एसेट क्लास से दूसरे में जाने की सुविधा देता है, जिससे आपका पोर्टफोलियो बैलेंस बना रहता है.

जोखिम (Risk) को लेकर बलवंत जैन ने एक ऐसी बात कही जो हर निवेशक को समझनी चाहिए. उन्होंने निवेश के समय को रिस्क से जोड़ते हुए कहा कि शॉर्ट टर्म के लिए इक्विटी इन्वेस्टमेंट बहुत ज्यादा रिस्की हो सकता है, जबकि इस दौरान FD आपके लिए सेफ होता है.
इसके अलावा लॉन्ग टर्म के लिए इक्विटी इन्वेस्टमेंट सुरक्षित माना जाता है, जबकि लंबे टाइम के लिए केवल FD पर डिपेंड रहना रिस्की हो सकता है क्योंकि यह वेल्थ क्रिएट करने में उतनी मददगार नहीं होती है.
वैसे एक आम इंसान के मन में हमेशा यह कंफ्यूजन रहता है कि इमरजेंसी फंड यानी वो पैसा जिसकी जरूरत अचानक पड़ सकती है, उसे कहां रखा जाए? क्या उसे सेविंग्स बैंक अकाउंट में ही छोड़ देना चाहिए या लिक्विड फंड जैसे ऑप्शन को चुनना चाहिए?
असल में इस पर बलवंत जैन ने एक बहुत ही व्यावहारिक फॉर्मूला साझा किया. उन्होंने कहा कि इमरजेंसी फंड को दो हिस्सों में बांटना चाहिए. उन्होने बताया कि आपके महीने के 15 दिनों के खर्च के बराबर की राशि को आपको अपने सेविंग्स बैंक अकाउंट में ही रखना चाहिए. यह आपको तुरंत पैसा निकालने की सुविधा देता है.
इसके अलावा इमरजेंसी फंड का जो बाकी हिस्सा है, उसे लिक्विड फंड्स में इन्वेस्टमेंट करना चाहिए. लिक्विड फंड्स का फायदा यह है कि जब तक आप पैसा नहीं निकालते, तब तक आपको उस पर अच्छा ब्याज मिलता रहता है और जरूरत पड़ने पर (जैसे 3-4 महीने बाद) आप इसे आसानी से निकाल भी सकते हैं.
| निवेश का माध्यम | समय सीमा | रिस्क लेवल | एक्सपर्ट की राय |
| म्यूचुअल फंड्स (Equity) | लंबी अवधि (Long Term) | कम (लंबी अवधि में) | वेल्थ क्रिएशन के लिए सबसे जरूरी विकल्प. |
| PPF (Public Provident Fund) | लंबी अवधि (Debt) | शून्य | 7.1% टैक्स फ्री रिटर्न के लिए पोर्टफोलियो में जरूर रखें. |
| फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) | कम अवधि (Short Term) | बहुत कम | शॉर्ट टर्म में पैसा सुरक्षित रखने के लिए बेस्ट है. |
| सेविंग्स अकाउंट | तत्काल (Immediate) | शून्य | केवल 15 दिनों के खर्च जितना इमरजेंसी फंड यहाँ रखें. |
| लिक्विड फंड्स | इमरजेंसी (1-6 महीने) | कम | बाकी बचा इमरजेंसी फंड यहाँ रखें ताकि ब्याज बेहतर मिले. |
वैसे टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन की बातों से इतना तो क्लियर है कि 2026 के दौर में निवेश को लेकर 'स्मार्ट डिसीजन' लेना जरूरी है. केवल पुराने तरीकों पर टिके रहना आपकी वेल्थ क्रिएशन की राह में बाधा बन सकता है.
टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन के अनुसार, जब आप सही एसेट एलोकेशन के साथ चलते हैं, तो मार्केट के उतार-चढ़ाव के टाइम भी आप अपने इन्वेस्टमेंट को सही तरीके से मैनेज कर पाते हैं और फ्यूचर के लिए एक बड़ा कॉर्पस तैयार कर सकते हैं.
Disclaimer: यह खबर ज़ी बिज़नेस के शो 'Paison Ki Pathshala' में टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है. निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या म्यूचुअल फंड का मुनाफा भी PPF की तरह टैक्स-फ्री है?
PPF का पैसा पूरी तरह टैक्स-फ्री है, जबकि म्यूचुअल फंड के मुनाफे पर आपको 12.5% तक टैक्स देना पड़ सकता है. इसीलिए टैक्स बचाने के लिए PPF आज भी 'किंग' है
Q2 लिक्विड फंड में रिस्क कितना है? क्या पैसा डूब सकता है?
रिस्क बहुत ही मामूली है! यह बैंक जितना 'गारंटीड' तो नहीं, लेकिन इमरजेंसी फंड के लिए सेविंग्स अकाउंट से कहीं ज्यादा स्मार्ट और सुरक्षित विकल्प माना जाता है
Q3 एसेट एलोकेशन शुरू करने के लिए कितने पैसे चाहिए?
सिर्फ 500 रुपये! आप छोटी SIP या PPF जमा से शुरुआत कर सकते हैं. अहमियत इस बात की है कि आप पैसों को बांटते कैसे हैं, न कि आपके पास कितने पैसे हैं
Q4 क्या हर उम्र में निवेश का यह फॉर्मूला एक जैसा काम करता है?
कई फंड्स 'इंस्टेंट रिडेम्पशन' देते हैं, फिर भी बैकअप के तौर पर 15 दिन का कैश बैंक अकाउंट में रखना ही सबसे बेस्ट है