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फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD सालों से निवेश का सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा जरिया रहा है. इसमें एक निश्चित समय के लिए पैसा जमा किया जाता है और बैंक उस पर एक तय ब्याज देता है. लेकिन बीते कुछ समय में ज्यादातर बैंकों ने FD पर ब्याज दरें कम कर दी हैं. ऐसे में निवेशकों को मुनाफा कम होता दिख रहा है और इसलिए उन्हें निवेश के ऐसे ऑप्शंस की तलाश है, जहां उन्हें बेहतर ब्याज भी मिल जाए और उनके निवेश में बहुत जोखिम भी न हो. अगर आप भी एफडी के ऑप्शन की तलाश में हैं तो आपके पास दो ऐसे विकल्प हैं जो फायदेमंद साबित हो सकते हैं. यहां जानिए इनके बारे में.
जब बैंक को पैसों की जरूरत होती है, तो वो आपसे FD के रूप में पैसा लेता है. ठीक उसी तरह, जब बड़ी और स्थापित कंपनियों को अपने कारोबार के लिए पैसों की जरूरत होती है, तो वे आम जनता से एक निश्चित ब्याज दर पर पैसा उधार लेती हैं. इसी को कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट या कंपनी FD कहा जाता है.
कॉर्पोरेट FD का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी ब्याज दर है. ये ब्याज आमतौर पर बैंक FD की तुलना में 1% से 3% तक ज्यादा होता है. जहां बैंक में आपको 5 से 7 या 7.5% तक ब्याज मिलेगा, वहीं एक अच्छी कंपनी की FD पर आपको 8 से 10% तक रिटर्न मिल सकता है. कॉर्पोरेट एफडी का मैच्योरिटी पीरियड भी 1 से 5 साल तक होता है. बैंक की तरह इसमें भी अलग-अलग अवधि के लिए ब्याज दर अलग हो सकती है. इसके अलावा बैंक FD की तरह ही, इसमें भी आपको एक तय रिटर्न मिलता है, जो बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता.
इसमें सबसे बड़ा जोखिम कंपनी के डिफॉल्ट होने का है. अगर कंपनी किसी कारणवश डूब जाती है, तो आपका पैसा फंस सकता है. जबकि बैंक FD में DICGC द्वारा 5 लाख रुपए तक की जमा राशि बीमित होती है, लेकिन कॉर्पोरेट FD में ऐसी कोई गारंटी नहीं होती.
हमेशा अच्छी क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों में ही निवेश करें. कॉर्पोरेट एफडी में निवेश करने से पहले उस कंपनी का 10-20 साल का रिकॉर्ड देख लें. उन्हीं कंपनियों में निवेश करें जो मुनाफा कमा रही हैं. अगर AAA या AA रेटिंग वाली कंपनियां FD ऑफर कर रही हैं तो उनमें निवेश किया जा सकता है. बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों की FD में निवेश करना एक सुरक्षित कदम हो सकता है.
डेट म्यूचुअल फंड, म्यूचुअल फंड का ही एक प्रकार है. इसमें एक फंड मैनेजर आप जैसे कई निवेशकों से पैसा इकट्ठा करता है और उसे फिक्स्ड-इनकम देने वाले विकल्पों में लगाता है, जैसे - सरकारी बॉन्ड, कॉर्पोरेट बॉन्ड, ट्रेजरी बिल वगैरह. आसान भाषा में कहें तो आपका पैसा किसी एक कंपनी में नहीं, बल्कि कई सारी सुरक्षित जगहों पर थोड़ा-थोड़ा करके लगाया जाता है.
सबसे पहला फायदा है Diversification. इसमें आपका पैसा कई बॉन्ड्स में बंटा होता है, जिससे किसी एक कंपनी के डिफॉल्ट होने का खतरा लगभग खत्म हो जाता है. हालांकि डेट फंड में रिटर्न की गारंटी नहीं होती, लेकिन पिछले तमाम रिकॉर्ड्स बताते हैं कि डेट फंड में FD से बेहतर रिटर्न मिल जाता है. लंबी अवधि में आप 7% से 9% तक के रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं. इसके अलावा अगर आप 3 साल से ज्यादा समय के लिए डेट फंड में निवेश करते हैं, तो आपको इंडेक्सेशन बेनिफिट (Indexation Benefit) मिलता है. इससे आपका टैक्स काफी कम हो जाता है.