EPFO: अब फुल सैलरी पर मिलेगी पेंशन!किन कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत और किन्हें मिलेगा मोटा पैसा,जानिए क्या है 2014 से पहले का वो खास नियम?

EPFO ने फुल सैलरी पर पेंशन का पुराना विकल्प फिर बहाल किया है, लेकिन इसका फायदा हर कर्मचारी को नहीं मिलेगा.तो फिर जानिए 2014 के बाद क्या बदला, EPS की ₹15,000 सीमा कैसे असर डालती है और कौन है असली पात्र.
EPFO: अब फुल सैलरी पर मिलेगी पेंशन!किन कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत और किन्हें मिलेगा मोटा पैसा,जानिए क्या है 2014 से पहले का वो खास नियम?

क्या हर कर्मचारी को मिलेगी फुल सैलरी पर ज्यादा पेंशन?(फोटो: प्रतीकात्मक)

इन दिनों EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़ी पेंशन को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है.माना जा रहा है कि फुल सैलरी के आधार पर पेंशन देने का पुराना ऑप्शन फिर से बहाल कर दिया गया है. जबकि इसका मतलब यह नहीं है कि अब हर कर्मचारी को ज्यादा पेंशन मिलने लगेगी. असल में यह फैसला एक सीमित वर्ग के लिए राहत है.तो आइए पूरी बात आसान भाषा में समझते हैं.

सवाल: क्या 2014 के बाद फुल सैलरी पर पेंशन का विकल्प बंद हो गया था?

EPFO के नियमों के मुताबिक कर्मचारी और नियोक्ता दोनों अपनी बेसिक सैलरी और डीए का 12% हिस्सा EPF में जमा करते हैं.नियोक्ता के योगदान में से 8.33% हिस्सा कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है, जो रिटायरमेंट के बाद मंथली पेंशन के रूप में मिलता है. हालांकि EPS की गणना पेंशन योग्य वेतन पर होती है, जिसकी अधिकतम लिमिट ₹15,000 तय है.तो यही कारण है कि ज्यादा सैलरी पाने वालों को भी अक्सर कम पेंशन मिलती है.असल में 1 सितंबर 2014 से पहले कर्मचारियों को अपनी वास्तविक सैलरी के आधार पर ज्यादा पेंशन योगदान का विकल्प मिलता था, जिसका फायदा खासकर PSU कर्मचारियों को हुआ. लेकिन 2014 में वेतन सीमा तय होने के बाद यह हायर पेंशन विकल्प बंद हो गया और पहले से विकल्प चुन चुके कर्मचारियों के बीच भी भ्रम की स्थिति बन गई.

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यह भी पढ़ें: PF में ₹50,000 की सैलरी पर 25 साल बाद कितना मिलेगा? असली ग्रोथ, ब्याज और इम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन का गणित


सवाल: 2014 में क्या बदला था?

  • साल 2014 में सरकार ने पेंशन योग्य वेतन की सीमा ₹15,000 प्रति माह तय कर दी.
  • इससे पहले कर्मचारी अपनी रियल सैलरी के आधार पर ज्यादा पेंशन योगदान कर सकते थे.
  • नई सीमा लागू होने के बाद पेंशन की गणना ₹15,000 पर ही लिमिटेड हो गई.
  • इसका असर स्पेशली ज्यादा वेतन पाने वालों पर पड़ा है.
  • अधिकतम मासिक पेंशन करीब ₹7,500 तक सिमट गई.EPFO

सवाल: EPF और EPS कैसे काम करते हैं?

  • EPFO के तहत कर्मचारी और नियोक्ता दोनों बेसिक सैलरी का 12% PF में जमा करते हैं.
  • नियोक्ता के हिस्से में से 8.33% EPS यानी कर्मचारी पेंशन स्कीम में जाता है.
  • पेंशन की गणना EPS के तहत पेंशन योग्य वेतन और कुल सेवा सालों के आधार पर होती है.
  • जब सैलरी सीमा ₹15,000 तय कर दी गई, तो उसी लिमिट के आधार पर पेंशन तय होने लगी.

सवाल: हायर पेंशन का पुराना विकल्प क्या था?

  • 2014 से पहले कुछ कर्मचारी, खासकर PSU में काम करने वाले, पूरी सैलरी के आधार पर पेंशन में ज्यादा योगदान चुन सकते थे.
  • इससे रिटायरमेंट के बाद उन्हें ज्यादा मंथली पेंशन मिलती थी.
  • नियम बदलने के बाद यह सुविधा लगभग खत्म हो गई.
  • जिन लोगों ने पहले से हायर पेंशन का ऑप्शन लिया था, उनके मामलों में भी भ्रम बना रहा.
  • कई जगह उनका एक्स्ट्रा योगदान भी सीमित कर दिया गया.

सवाल: अब क्या नया हुआ है?

  • EPFO ने साफ किया है कि फुल सैलरी के आधार पर पेंशन योगदान का पुराना ऑप्शन फिर से लागू किया जा रहा है.
  • यह कोई नई योजना नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद प्रावधान की बहाली है।
  • यह फायदा सिर्फ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्होंने 2014 से पहले हायर पेंशन का विकल्प चुना था.
  • यह सुविधा सभी EPFO सदस्यों पर अपने आप लागू नहीं होगी.

सवाल: क्या हर कर्मचारी को मिलेगा फायदा?

नहीं...

  • अगर 2014 से पहले हायर पेंशन का विकल्प नहीं चुना था, तो सीधे इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे.
  • इस ऑप्शन के लिए नियोक्ता की सहमति भी जरूरी है.
  • कर्मचारी अकेले अपने दम पर ज्यादा योगदान नहीं चुन सकता.

सवाल: किसे होगा असली फायदा?

यह चेंज अहम रूप से संगठित क्षेत्र या PSU में काम करने वाले उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद है, जिन्होंने पहले से ज्यादा योगदान का ऑप्शन चुना था.असल में ज्यादातर निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए, जहां PF योगदान सैलरी सीमा तक ही सीमित है, पेंशन में कोई बड़ा चेंज नहीं होगा.

EPFO

सवाल: आपको क्या करना चाहिए?

तो अगर आपको लगता है कि आपने 2014 से पहले हायर पेंशन का ऑप्शन चुना था, तो अपने EPFO रिकॉर्ड और नियोक्ता से जानकारी जरूर लें.असल में यह तय करें कि आपका योगदान सही तरीके से दर्ज हो रहा है.

कम शब्दों में समझें पूरी बात


फुल सैलरी पर पेंशन की वापसी की खबर जरूर बड़ी है, लेकिन इसका फायदा हर कर्मचारी को नहीं मिलेगा.असल में यह कदम पुराने मामलों को साफ करने और पहले से पात्र कर्मचारियों को राहत देने के लिए है. तो फिर इसलिए अफवाहों पर नहीं, बल्कि अपने EPFO रिकॉर्ड और रूल्स के आधार पर स्थिति समझें. सही जानकारी ही रिटायरमेंट की बेहतर योजना बनाने में आपकी मदद करेगी.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है)

FAQs

1. क्या 2014 के बाद फुल सैलरी पर पेंशन का विकल्प बंद हो गया था?
हाँ, 2014 में ₹15,000 की पेंशन योग्य वेतन सीमा लागू होने के बाद यह विकल्प लगभग बंद हो गया था

2. EPS में पेंशन की गणना कैसे होती है?
पेंशन योग्य वेतन (अधिकतम ₹15,000) और कुल सेवा वर्षों के आधार पर

3. क्या अब सभी कर्मचारियों को हायर पेंशन मिलेगी?
नहीं, सिर्फ उन्हीं को जिन्‍होंने 2014 से पहले यह विकल्प चुना था

4. क्या नियोक्ता की मंजूरी जरूरी है?
हाँ, बिना नियोक्ता की सहमति अतिरिक्त योगदान संभव नहीं है

5. निजी क्षेत्र के कर्मचारियों पर क्या असर होगा?
ज्यादातर मामलों में पेंशन ₹15,000 वेतन सीमा के आधार पर ही तय होती रहेगी

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