EPFO की ‘सिंगल पूल’ स्कीम चर्चा में है क्योंकि इससे PF निवेश का तरीका बदल सकता है.असल में पांच अलग-अलग स्कीमों का फंड एक साथ ETF में निवेश होगा, जिससे प्रक्रिया सरल और व्यवस्थित बनेगी. लंबी अवधि में इससे रिटर्न की स्थिरता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.
1/9देश के करोड़ों पीएफ खाताधारकों के बीच इन दिनों एक शब्द खूब चर्चा में है EPFO की ‘सिंगल पूल’ या सिंपल पूल स्कीम. सवाल यह है कि आखिर यह है क्या और इससे आपके पीएफ रिटर्न पर क्या असर पड़ेगा? तो आइए आसान भाषा में पूरी कहानी समझते हैं.
2/9EPFO अपने पास जमा फंड का एक हिस्सा शेयर बाजार से जुड़े ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) में लगाता है. साल 2015 से यह व्यवस्था लागू है और आमतौर पर 5 से 15 फीसदी तक रकम ETF में निवेश की जाती है. अभी तक EPFO की अलग-अलग पांच स्कीमों से पैसा अलग-अलग अकाउंट के जरिए हर महीने निवेश किया जा सकता है. यानी कि निवेश का प्रोसेस थोड़ा बिखरा हुआ और बार-बार होने वाला है.
3/9अब EPFO इन पांचों स्कीमों के फंड को मिलाकर एक सिंगल पूल बना सकती है. यानी कि ETF में निवेश के लिए एक ही कॉमन अकाउंट से पैसा लगाया जा सकता है. इतना ही नहीं, हर महीने इन्वेस्टमेंट करने के बजाय साल में एक बार बड़ा निवेश करने की योजना है. इस चेंज का मकसद है-प्रक्रिया को आसान बनाना, नियमों का पालन बेहतर तरीके से करना और ऑपरेशनल दिक्कतें कम करना.
4/9अलग-अलग स्कीम की जगह एक ही अकाउंट से इन्वेस्टमेंट होगा, जिससे डाक्यूमेंट्स और तकनीकी झंझट कम होंगे.मार्केट नियामक के रूल को मानना आसान होगा. सालाना इन्वेस्टेंट से बाजार में उतार-चढ़ाव का असर संतुलित करने की रणनीति अपनाई जा सकती है. तो ETF खरीद-बिक्री और रिडेम्पशन के लिए साफ समयसीमा तय की जा सकती है.
5/9सीधे शब्दों में कहें तो EPFO का उद्देश्य निवेश को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है.तो जब फंड एक जगह इकट्ठा होकर निवेश होगा तो बेहतर प्लानिंग संभव हो सकेगी. इससे लंबी अवधि में रिटर्न की स्थिरता बढ़ सकती है. हालांकि ब्याज दर (इंटरेस्ट रेट) का फैसला अलग प्रोसेस से होता है और वह सालाना घोषित किया जाता है.असल में अगर ETF निवेश अधिक कुशल तरीके से होगा तो ओवरऑल कमाई में सुधार की उम्मीद की जा सकती है, जिसका फायदा अंततः पीएफ मेंबर्स को मिलता है.
6/9माना जा रहा कि EPFO दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट लिमिटेड (DMEDL) के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) के बायबैक ऑफर में हिस्सा ले सकता है.तो इसका मतलब है कि जिन बॉन्ड में पहले निवेश किया गया था, उन्हें तय प्राइस पर वापस बेचकर मुनाफा कमाने का मौका मिल सकता है.
7/9इन प्रस्तावों को EPFO की इन्वेस्टमेंट कमिटी ने मंजूरी दी सकती है. अब इन्हें सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ की बैठक में अंतिम स्वीकृति के लिए रखा जाएगा. मंजूरी मिलते ही नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू हो सकता है.
8/9अभी पीएफ खाताधारकों को कोई अलग कदम उठाने की जरूरत नहीं है. जी हां आपका योगदान पहले की तरह जमा होता रहेगा। बदलाव केवल EPFO के निवेश करने के तरीके में होगा.
9/9असल मेंपीएफ देश का सबसे बड़ा रिटायरमेंट फंड है और करोड़ों कर्मचारियों की बचत इससे जुड़ी है.इन्वेस्टमेंट के तरीके में बदलाव का मतलब है कि आने वाले समय में रिटर्न की संरचना भी ज्यादा संगठित और पारदर्शी हो सकती है.तो कुल मिलाकर, ‘सिंगल पूल’ स्कीम का मकसद निवेश को सरल, व्यवस्थित और नियमों के अनुरूप बनाना है. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो इसका फायदा लंबे समय में पीएफ मेंबर्स को बेहतर और स्थिर रिटर्न के रूप में मिल सकता है.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी वित्तीय सलाहाकार से उचित राय लें)