PF और EPS में क्या अंतर है? जानें आपकी सैलरी से कटने वाला 12% हिस्सा कहां जाता है, समझें पीएफ और पेंशन फंड का पूरा गणित

PF और EPS में क्या फर्क है? क्या जानते हैं कि आपकी सैलरी का 12% कहां जाता है, कितना पैसा पेंशन फंड में और कितना PF में जमा होता है? तो फिर चलिए अब जानिए पेंशन का फॉर्मूला, 10 साल की सेवा का रूल, परिवार को मिलने वाला लाभ और रिटायरमेंट पर मिलने वाली पूरी जानकारी.
PF और EPS में क्या अंतर है? जानें आपकी सैलरी से कटने वाला 12% हिस्सा कहां जाता है, समझें पीएफ और पेंशन फंड का पूरा गणित

PF vs EPS difference

PF vs EPS Confusion: नौकरी करने वाले ज्यादातर लोगों के लिए प्रोविडेंट फंड (PF) फ्यूचर की सबसे बड़ी जमा-पूंजी होती है.असल में सैलरी स्लिप में हर महीने कटने वाली रकम देखकर अक्सर लोग समझते हैं कि पूरा पैसा उनके पीएफ खाते में जमा हो रहा है. लेकिन वैसे तो सच्चाई इससे थोड़ी अलग होती है.असल में आपकी सैलरी से जो 12% कटता है, वह पूरा पीएफ में नहीं जाता.जी हां उसका एक हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना यानी EPS में भी जमा होता है.तो यही वजह है कि PF और EPS को लेकर अक्सर कन्फ्यूजन बना रहता है.

सवाल: PF और EPS क्या एक ही स्कीम है?

जवाब :PF और EPS दोनों अलग-अलग योजनाएं हैं, लेकिन दोनों मिलकर आपके रिटायरमेंट की सुरक्षा करते हैं.
PF आपकी सेविंग्स है, जिस पर हर साल ब्याज मिलता है और नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट के समय निकाल सकते हैं.
जबकि EPS एक पेंशन स्कीम है, जो आपको बुढ़ापे में हर महीने तय राशि देती
है.

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सवाल: सैलरी से कितना पैसा कहां जाता है?

  • कर्मचारी की बेसिक सैलरी और डीए (महंगाई भत्ता) का 12% हिस्सा EPF में जमा होता है.
  • इतना ही 12% योगदान नियोक्ता यानी कंपनी भी देती है.
  • कंपनी के 12% योगदान में से पूरा पैसा EPF में नहीं जाता.
  • इसमें से 8.33% हिस्सा EPS यानी पेंशन फंड में चला जाता है और केवल 3.67% EPF खाते में जुड़ता है.

तो फिर मतलब साफ साफ ये हुआ कि कर्मचारी का पूरा 12% EPF में जाता है, लेकिन नियोक्ता के हिस्से का कुछ भाग पेंशन फंड में ट्रांसफर हो जाता है,तो इसलिए आपका PF बैलेंस उतना ज्यादा नहीं बढ़ता जितना आप सोचते हैं, क्योंकि उसमें से एक हिस्सा पेंशन के लिए अलग हो जाता है.

सवाल: पेंशन के लिए सैलरी सीमा क्या होती है?

  • सरकार ने EPS के लिए अधिकतम सैलरी लिमिट ₹15,000 तय कर रखी है.
  • पेंशन का कैलकुलेशन इसी लिमिट तक की सैलरी के आधार पर होता है.
  • भले ही चाहें आपकी वास्तविक सैलरी इससे ज्यादा हो.
  • लेकिन 8.33% योगदान अधिकतम ₹15,000 पर ही कैलकुलेट किया जाता है.pf vs epf

सवाल : EPF पर ब्याज, EPS पर पेंशन को कैसे समझें?

  • EPF खाते में जमा रकम पर हर साल सरकार की तरउ से तय ब्याज मिलता है.
  • यह ब्याज कंपाउंडिंग तरीके से जुड़ता है, जिससे लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार हो सकता है.
  • दूसरी ओर EPS में जमा राशि पर अलग से ब्याज नहीं मिलता.
  • असल में यह रकम पेंशन के रूप में आपको वापस मिल जाती है.

सवाल: आखिर मंथली पेंशन कैसे तय होती है?

  • EPS के जरिए मिलने वाली पेंशन एक तय फॉर्मूले से निकलती है.
  • फॉर्मूला है: पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70
  • पेंशन योग्य वेतन आमतौर पर लास्ट 60 मंथ के औसत वेतन पर आधारित होती है (₹15,000 की सीमा तक).
  • पेंशन योग्य सेवा का मतलब है कुल नौकरी के साल.

उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी ने 25 साल सेवा की है और उसका पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 है, तो पेंशन होगी-15,000 × 25 ÷ 70 = ₹5,357 (लगभग). यानी कि साफ है कि उसे हर महीने करीब 5,300 रुपये पेंशन मिल सकती है.

पेंशन कब शुरू होती है?

  • EPS के तहत नॉर्मल पेंशन 58 साल की उम्र में शुरू होती है.
  • कोई कर्मचारी 50 साल के बाद पेंशन लेना चाहता है, तो वह अर्ली पेंशन ले सकता है.
  • इसमें हर साल करीब 4% की कटौती हो सकती है.
  • जबकि अगर कोई कर्मचारी 58 साल के बाद भी काम करता है और पेंशन को टाल देता है
  • तो उसे हर साल करीब 4% एक्स्ट्रा फायदा मिल सकता है.pf vs epf

सवाल: कौन लोग EPS का फायदा नहीं उठा सकते?

  • जिनकी सेवा 10 साल से कम है और जिन्होंने पूरा पैसा निकाल लिया
  • जिनकी एज 50 साल से कम है
  • जिनकी कंपनी EPFO के दायरे में नहीं आती
  • जिनका PF कटता ही नहीं है

सवाल: PF या EPS में कौन ज्यादा जरूरी?

  • PF आपकी जमा राशि है, जिससे आप जरूरत के समय पैसा निकाल सकते हैं.
  • EPS आपकी फ्यूचर की गारंटीड इनकम है.
  • असल में एक आपकी बचत है, दूसरा आपकी सामाजिक सेफ्टी.

तो अगर आप लंबे टाइम तक नौकरी में बने रहते हैं और 10 साल से ज्यादा वर्किंग हैं, तो EPS आपके लिए रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम का जरिया बन सकता है. वहीं PF आपको एक बड़ा फंड देता है, जिसे आप इन्वेस्टमेंट या जरूरत के अनुसार यूज कर सकते हैं.

आखिर समझदारी क्या है?

आपको बता दें कि सबसे पहले अपनी सैलरी स्लिप और EPF पासबुक को ध्यान से देखें. आप सबसे समझें कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा कहां जा रहा है.इसलिए कभी बी नौकरी बदलते समय EPS सर्विस हिस्ट्री ट्रांसफर करना न भूलें.जी हां बिना सोचे-समझे पूरा PF निकालना फ्यूचर की पेंशन को नुकसान पहुंचा सकता है.असल में PF और EPS को समझना जरूरी है, क्योंकि यह केवल कटौती नहीं, बल्कि आपके फ्यूचर की सेफ्टी भी है.असल में आज की छोटी-सी जागरूकता, कल की बड़ी राहत बन सकती है.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी वित्तीय सलाहाकार से उचित राय लें)

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 PF और EPS में मुख्य अंतर क्या है?

PF आपकी बचत है जिस पर ब्याज मिलता है, जबकि EPS पेंशन योजना है जो रिटायरमेंट के बाद हर महीने तय राशि देती है.

Q2 सैलरी का कितना हिस्सा EPS में जाता है?

नियोक्ता के 12% योगदान में से 8.33% EPS में और 3.67% EPF में जमा होता है

Q3 EPS पेंशन पाने के लिए कितनी सेवा जरूरी है?

कम से कम 10 साल की नौकरी पूरी करना जरूरी है

Q4 पेंशन कैसे कैलकुलेट होती है?

फॉर्मूला है: पेंशन योग्य वेतन × सेवा वर्ष ÷ 70

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