रिटायरमेंट पर 'बड़ा झटका': EPS-2026 के नए नियमों से 'Higher Pension' का क्लॉज गायब! EPFO ने क्या कहा? कर्मचारियों पर क्या होगा असर?

Employees’ Pension Scheme के नए EPS-2026 नियमों में Higher Pension से जुड़ा विवादित क्लॉज शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इसे समयबद्ध और अब अप्रासंगिक माना गया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और पहले से दाखिल आवेदनों के चलते Higher Pension का मुद्दा अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.
रिटायरमेंट पर 'बड़ा झटका': EPS-2026 के नए नियमों से 'Higher Pension' का क्लॉज गायब! EPFO ने क्या कहा? कर्मचारियों पर क्या होगा असर?

EPFO के दस्तावेज़ के अनुसार, यह प्रावधान समयबद्ध (time-bound) था. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)

Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) के तहत चलने वाली Employees’ Pension Scheme (EPS) में एक अहम बदलाव सामने आया है. EPS-2026 के नए ड्राफ्ट नियमों में वह विवादित प्रावधान शामिल नहीं किया गया है, जो कर्मचारियों को Higher Salary के आधार पर पेंशन चुनने का विकल्प देता था.

EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ (CBT) की तरफ से मंजूर किए गए नए नियमों में यह क्लॉज हटा दिया गया है. आधिकारिक दस्तावेज़ों में इसे “obsolete” यानी अप्रासंगिक बताते हुए हटाया गया है.

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ सालों से Higher Pension का मुद्दा कर्मचारियों, पेंशनर्स और अदालतों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ था.

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कौन सा क्लॉज हटाया गया?

EPS-1995 में पैराग्राफ 11(4) नाम का एक प्रावधान था.

यह प्रावधान कर्मचारियों और नियोक्ताओं को यह विकल्प देता था कि वे वेतन सीमा से अधिक सैलरी पर भी योगदान करके अधिक पेंशन का विकल्प चुन सकते हैं.

2014 में EPS में संशोधन के समय यह क्लॉज जोड़ा गया था. उस समय नियमों में कहा गया था कि:

कर्मचारी और नियोक्ता एक साल के भीतर संयुक्त विकल्प (joint option) देकर ₹15,000 की वेतन सीमा से अधिक सैलरी पर योगदान कर सकते हैं.

इसी आधार पर कर्मचारी भविष्य में Higher Pension का लाभ लेने के पात्र बन सकते थे.

लेकिन EPS-2026 के नए नियमों में यह पैराग्राफ शामिल नहीं किया गया है.

EPFO ने इसे ‘obsolete’ क्यों कहा?

EPFO के दस्तावेज़ के अनुसार, यह प्रावधान समयबद्ध (time-bound) था.

2014 में नियम बदलने के बाद कर्मचारियों और नियोक्ताओं को केवल एक साल की अवधि दी गई थी, जिसमें वे Higher Pension का विकल्प चुन सकते थे.

चूंकि यह समय सीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी थी, इसलिए नए EPS-2026 नियमों में इसे obsolete यानी अप्रासंगिक मानते हुए शामिल नहीं किया गया.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या हुआ था?

Higher Pension को लेकर विवाद तब बढ़ा जब कई कर्मचारियों और पेंशनर्स ने शिकायत की कि वे 2014-15 के दौरान इस विकल्प का उपयोग नहीं कर पाए.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2022 में महत्वपूर्ण फैसला दिया.

कोर्ट ने कर्मचारियों और पेंशनर्स को Higher Pension के लिए आवेदन करने का एक और मौका देने की अनुमति दी. इसके बाद EPFO ने कर्मचारियों से आवेदन स्वीकार किए.

कितने लोगों ने Higher Pension के लिए आवेदन किया?

सरकार ने संसद में जानकारी दी थी कि:

लगभग 15.24 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स के आवेदन EPFO को भेजे गए

यह आवेदन 31 जनवरी 2025 तक जमा किए गए थे.

इनमें से:

  • लगभग 3.93 लाख लोगों को डिमांड लेटर जारी किए गए
  • करीब 2.33 लाख आवेदकों ने अतिरिक्त राशि जमा कर दी
  • लगभग 1.24 लाख लोगों को पेंशन भुगतान आदेश (PPO) जारी किए गए

इससे साफ है कि Higher Pension विकल्प का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने आवेदन किया था.

EPFO पहले Higher Pension के पक्ष में क्यों नहीं था?

EPFO लंबे समय तक Higher Pension के विचार का विरोध करता रहा था.

EPFO का तर्क था कि EPS-1995 का मूल उद्देश्य कम आय वाले कर्मचारियों को पेंशन सुरक्षा देना था.

अगर उच्च वेतन वाले कर्मचारियों को भी उसी योजना के तहत अधिक पेंशन मिलती है, तो यह एक तरह की “reverse subsidy” बन जाती है.

यानी कम वेतन वाले कर्मचारियों के योगदान से उच्च वेतन वालों को अधिक लाभ मिलने की स्थिति बन सकती है.

EPFO ने यह भी कहा था कि Employees’ Pension Fund में actuarial deficit यानी वित्तीय घाटा भी मौजूद है.

क्या Higher Pension का विकल्प पूरी तरह खत्म हो गया?

दिलचस्प बात यह है कि EPS-2026 में यह क्लॉज नहीं होने के बावजूद एक संबंधित व्यवस्था अभी भी मौजूद है.

नए Employees Provident Funds Scheme के नियमों में एक प्रावधान रखा गया है, जिसके तहत कर्मचारी और नियोक्ता संयुक्त रूप से लिखित अनुरोध देकर वेतन सीमा से अधिक सैलरी पर योगदान कर सकते हैं.

इस स्थिति में कर्मचारी को संबंधित लाभ मिल सकता है.

इसके अलावा नियमों में additional voluntary contribution का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि इसमें नियोक्ता पर अतिरिक्त योगदान की बाध्यता नहीं होगी.

कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है?

EPS-2026 में Higher Pension क्लॉज को हटाना मुख्य रूप से पुराने समयबद्ध प्रावधान को हटाना माना जा रहा है.

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पहले से Higher Pension के लिए आवेदन कर चुके लोगों के अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएंगे.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक:

पहले से स्वीकृत या प्रक्रिया में चल रहे मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और EPFO की मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार निर्णय होगा.

हालांकि भविष्य में Higher Pension के विकल्प को लेकर नियम किस तरह लागू होंगे, इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.

आपके काम की बात

Employees’ Pension Scheme के नए EPS-2026 नियमों में Higher Pension से जुड़ा विवादित क्लॉज शामिल नहीं किया गया है, क्योंकि इसे समयबद्ध और अब अप्रासंगिक माना गया है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और पहले से दाखिल आवेदनों के चलते Higher Pension का मुद्दा अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.

इसलिए EPFO के आगामी दिशानिर्देशों और नियमों पर नजर रखना कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा.

FAQs

Q. EPS में Higher Pension क्या है?
A. Higher Pension का मतलब है वास्तविक सैलरी के आधार पर ज्यादा पेंशन पाने का विकल्प.

Q. EPS-2026 में कौन सा क्लॉज हटाया गया है?
A. EPS-1995 का पैराग्राफ 11(4) नए नियमों में शामिल नहीं किया गया है.

Q. क्या अब Higher Pension पूरी तरह बंद हो गया है?
A. नहीं, पहले से दिए गए आवेदन और कोर्ट के आदेशों के आधार पर प्रक्रिया जारी रह सकती है.

Q. Higher Pension के लिए कितने आवेदन आए थे?
A. करीब 15.24 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स ने आवेदन किया था.

Q. EPS में पेंशन कब से मिलती है?
A. आमतौर पर 58 साल की उम्र के बाद पेंशन शुरू होती है.

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