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अगर आप नौकरीपेशा हैं और आपकी सैलरी से PF कटता है, तो ये बात आप जानते होंगे कि आपका और कंपनी का कॉन्ट्रिब्यूशन दो हिस्सों में बंटता है- एक हिस्सा PF अकाउंट में जाता है और दूसरा हिस्सा EPS यानी Employee Pension Scheme में. PF का पैसा जरूरत पड़ने पर निकाला जा सकता है, लेकिन पेंशन के लिए अलग नियम लागू होते हैं.
EPFO ने EPS और PF से जुड़े कामों के लिए अलग-अलग फॉर्म बनाए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन फॉर्म 10C और 10D को लेकर होती है. चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं. आखिर कौन-सा फॉर्म कब भरना होता है.
अगर EPS में 10 साल तक योगदान किया गया है, तो रिटायरमेंट के बाद मेंबर पेंशन पाने का हकदार बन जाता है. लेकिन अगर योगदान 10 साल से कम है, तो मेंबर पेंशन की जगह फुल एंड फाइनल सेटलमेंट ले सकता है. यही तय करता है कि फॉर्म 10C भरना है या फॉर्म 10D.
Form 10C की जरूरत तब पड़ती है जब:
यानी ये फॉर्म पेंशन लेने के लिए नहीं, बल्कि EPS से जुड़े सेटलमेंट और सर्टिफिकेट के लिए होता है.
अगर EPS में 10 साल या उससे ज्यादा योगदान हुआ है, तो मेंबर रिटायरमेंट के बाद पेंशन पाने का हकदार होता है. ऐसे में पेंशन शुरू करवाने के लिए Form 10D भरना जरूरी है. इसके अलावा किसी अन्य स्थिति में भी अगर व्यक्ति ईपीएफओ से पेंशन पाने का हकदार है जैसे डिसएबिलिटी पेंशन के लिए, मेंबर की मौत के बाद फैमिली पेंशन क्लेम करने के लिए वगैरह स्थितियों में भी फॉर्म 10D भरना पड़ता है.
PF के पैसे की निकासी के लिए Form 31 और Form 19 की जरूरत पड़ती हैऋ नौकरी के दौरान पैसों से जुड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए जब आप अपने पीएफ बैलेंस का कुछ हिस्सा या Advance PF निकालते हैं, तब आपको पीएफ निकासी फॉर्म 31 की जरूरत पड़ती है. इसे ईपीएफ क्लेम फॉर्म 31 (EPF Claim Form 31) भी कहा जाता है. जरूरत के हिसाब से निकासी के नियम अलग-अलग होते हैं. वहीं जब आपको ईपीएफ के पूरे फंड की निकासी करनी होती है तो आप पीएफ निकासी फॉर्म 19 का इस्तेमाल करते हैं. इसे ईपीएफ क्लेम फॉर्म 19 (EPF Claim Form 19) भी कहा जाता है.
आपको Form 10C भरना होगा, क्योंकि 10 साल पूरे नहीं हुए हैं.
हां, EPFO की वेबसाइट या UMANG ऐप से फॉर्म ऑनलाइन सबमिट किया जा सकता है.
हां, अगर आप नौकरी छोड़ चुके हैं और पेंशन शुरू करवाना चाहते हैं.
रिटायरमेंट के बाद या पात्रता नियम पूरे होने पर.