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EPFO के तहत EPS यानी Employees' Pension Scheme चलाई जाती है. अगर आप ईपीएफओ में 10 साल तक कॉन्ट्रिब्यूशन करते हैं तो आप EPS के तहत रिटायरमेंट के बाद पेंशन पाने के हकदार बन जाते हैं. पेंशन की रकम नौकरी की अवधि और EPS में डाले गए योगदान पर निर्भर करती है. आपको कितनी पेंशन मिलेगी, इसे एक निश्चित फॉर्मूले के आधार पर तय किया जाता है. आमतौर पर ईपीएफओ से पेंशन 58 साल पर मिलती है. लेकिन आप चाहें तो इसे 58 से पहले या 58 के बाद में भी ले सकते हैं. आपको ये दोनों विकल्प मिलते हैं. ये एक डिसीजन आपकी पूरी पेंशन पर असर डालता है. यहां जानिए EPFO का ये रूल.
ईपीएफओ के मुताबिक अगर आप 58 से पहले पेंशन क्लेम करना चाहते हैं तो ये Early Pension कहलाती है. इसके लिए आप 50 से 58 साल के बीच कभी भी अप्लाई कर सकते हैं. लेकिन इसके साथ एक नुकसान है वो ये कि हर साल आपको 4% पेंशन कम मिलती है.
अगर कोई मेंबर 56 साल में पेंशन लेना चुनता है, तो उसे 2 साल पहले पेंशन लेने की वजह से 8% कम पेंशन मिलेगी. यानी जो पेंशन उसे 58 की उम्र पर मिलती, उससे 8 प्रतिशत घटकर यानी 92% पेंशन मिलेगी. जितने साल कम होंगे, उसी हिसाब से 4% का नुकसान होता जाएगा. Early Pension के लिए Composite Claim Form और Form 10D भरना ज़रूरी है.
58 साल की उम्र EPFO की डिफॉल्ट रिटायरमेंट उम्र मानी जाती है. इस उम्र में पेंशन लेने पर ना कटौती होती है और ना ही बोनस. लेकिन तमाम मेंबर्स नहीं जानते कि नियम के मुताबिक अगर कोई मेंबर चाहें तो 58 साल के बाद 2 साल तक आगे भी EPS में योगदान कर सकते हैं. इस दौरान पेंशन रोककर रखी जाती है और बोनस मिलता है. अगर आप पेंशन 58 की बजाय 60 साल पर लेते हैं, तो आपका फायदा बढ़ जाता है क्योंकि इससे आपकी पेंशन बढ़ जाती है.
मतलब साफ है कि अगर आप 60 साल तक पेंशन का इंतजार कर लें तो आपको हर साल 4% एक्स्ट्रा यानी 8% ज़्यादा पेंशन मिल सकती है और वो भी जीवनभर के लिए.
अगर आपके EPS में 10 साल पूरे नहीं हुए हैं, तो आपके पास दो ऑप्शन हैं:
कम से कम 10 साल EPS में योगदान पूरा होने के बाद रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है.
नहीं, क्योंकि Early Pension लेने पर हर साल 4% कम पेंशन मिलती है.
हां, प्रत्येक साल इंतज़ार करने पर 4% बोनस मिलता है. दो साल पर कुल 8%.
हां, अगर नौकरी 10 साल से कम है तो EPS राशि निकाल सकते हैं.
नहीं, कॉन्ट्रिब्यूशन जारी रखने और पेंशन रोकने का विकल्प सिस्टम में उपलब्ध रहता है.
अगर आपको जल्दी पैसों की ज़रूरत नहीं है तो पेंशन 58 की बजाय 60 साल पर लेना ज़्यादा फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि इससे आपकी मासिक पेंशन पर ज़िंदगीभर के लिए 8% का फर्क पड़ता है. रिटायरमेंट की प्लानिंग समझ-समझकर करें, ताकि आगे चलकर पैसों की कमी महसूस ना हो.