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कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को PF के अलावा पेंशन और ₹7 लाख तक का बीमा भी मिलता है? (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
नौकरी करने वाले करोड़ों लोगों के लिए EPFO केवल रिटायरमेंट सेविंग का जरिया नहीं है, बल्कि परिवार की फाइनेंशियल सेफ्टी का भी बड़ा आधार है. लेकिन अगर किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान अचानक मौत हो जाए, तो परिवार को क्या-क्या अधिकार मिलते हैं? क्या केवल PF का पैसा मिलता है या पेंशन भी मिलती है? EDLI बीमा का लाभ किन हालात में मिलता है? और अगर नॉमिनेशन में गलती हो तो क्या होगा?
तो ऐसे कई सवाल हैं, जिनका जवाब बहुत से कर्मचारियों और उनके परिवारों को नहीं पता होता.लेकिन EPFO के मौजूदा नियम इन सभी स्थितियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं.तो आइए आसान भाषा में समझते हैं 5 बड़े सवालों के जवाब.
अगर EPFO सदस्य की मृत्यु हो जाती है, तो पात्र परिवार को तीन अलग-अलग तरह के बेनेफिट्स मिल सकते हैं
हालांकि इन तीनों लाभों के लिए पात्रता और क्लेम प्रक्रिया अलग-अलग होती है
EPFO के EPS-95 नियमों के अनुसार, अगर किसी सदस्य की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है और उसके लिए EPS योगदान जमा किया गया है, तो पात्र आश्रितों को फैमिली पेंशन का लाभ मिल सकता है, ऐसे मामलों में रिटायरमेंट पेंशन की तरह 10 साल की न्यूनतम सेवा की शर्त लागू नहीं होती
यदि कोई पूर्व सैनिक (Ex-Serviceman) सेना से रिटायर होने के बाद किसी EPFO कवर वाली नौकरी में कार्यरत था और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को सैन्य पेंशन के अलावा EPFO के तहत मिलने वाली फैमिली पेंशन का भी लाभ मिल सकता है, बशर्ते वह EPS के नियमों के तहत पात्र हो.यानी कि पात्र परिवार को Military Family Pension के साथ EPS-95 के तहत मिलने वाली Family Pension का लाभ भी मिल सकता है।
EDLI योजना को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम रहता है. असल में EPFO का EDLI बीमा लाभ तभी मिलता है, जब सदस्य की मृत्यु नौकरी के दौरान यानी "इन सर्विस" स्थिति में हुई हो
तो अगर कर्मचारी नौकरी छोड़ चुका था और उसके बाद उसकी मृत्यु हुई, तो EDLI बीमा का लाभ नहीं मिलेगा. असल में मौजूदा नियमों के तहत पात्र मामलों में EDLI के अंतर्गत अधिकतम ₹7 लाख तक का बीमा लाभ दिया जा सकता है.
कई बार क्लेम सिर्फ इसलिए अटक जाते हैं क्योंकि सदस्य ने ई-नॉमिनेशन अपडेट नहीं किया होता. तो अगर UAN पोर्टल पर वैध ई-नॉमिनेशन मौजूद है, तो क्लेम प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान हो जाती है. लेकिन यदि नॉमिनी का नाम आधार रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता या नॉमिनेशन दर्ज ही नहीं है, तो परिवार को ऑफलाइन क्लेम करना पड़ सकता है.
ऐसे मामलों में मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान पत्र, बैंक विवरण और अन्य दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं.यही वजह है कि EPFO बार-बार नॉमिनेशन अपडेट रखने की सलाह देता है.
आपको बता दें कि EPFO केवल रिटायरमेंट फंड नहीं, बल्कि परिवार के लिए एक जरूरी सुरक्षा कवच भी है.असल में कर्मचारी की मृत्यु के बाद PF बैलेंस, फैमिली पेंशन और EDLI बीमा जैसी सुविधाएं परिवार को फाइनेंशियल सहारा दे सकती हैं. लेकिन इसके लिए नॉमिनेशन, KYC और रिकॉर्ड का सही होना बेहद जरूरी है. वैसे कई बार सिर्फ जानकारी की कमी के कारण परिवार अपने अधिकार का पैसा समय पर नहीं ले पाता. तो इसलिए नौकरी के दौरान ही EPFO रिकॉर्ड अपडेट रखना सबसे समझदारी भरा कदम है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 कर्मचारी कुंवारा हो तो पैसा किसे मिलेगा?
सबसे पहले नॉमिनी को, और अगर नॉमिनी नहीं है तो सीधे माता-पिता को पैसा मिलता है
Q2 बच्चों को कब तक पेंशन मिलती है?
दो बच्चों को 25 साल की उम्र तक पेंशन मिलती है, दिव्यांग बच्चों के लिए यह उम्रभर है
Q3 क्या इस पैसे पर टैक्स भी देना पड़ता है?
बिल्कुल नहीं! परिवार को मिलने वाला PF, बीमा और पेंशन का सारा पैसा पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है
Q4 कंपनी बंद हो गई हो तो क्लेम कैसे होगा?
टेंशन न लें! बैंक मैनेजर या किसी गजटेड ऑफिसर से फॉर्म साइन कराकर सीधे EPFO में जमा कर दें
Q5 पैसा बैंक खाते में आने में कितना समय लगता है?
अगर काग सही हैं, तो 20 से 30 दिन के अंदर पैसा सीधा आपके बैंक खाते में आ जाता है