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EPFO के नियमों के मुताबिक डिजिटल सिग्नेचर और डेटा की उपलब्धता कैसे आपके क्लेम की स्पीड तय करती है (फाइल फोटो)
EPF ट्रांसफर क्लेम ऑनलाइन करने जा रहे हैं? जानिए अटेस्टेशन के लिए पुराना एम्प्लॉयर चुनना बेहतर है या नया. EPFO के नियमों के मुताबिक डिजिटल सिग्नेचर और डेटा की उपलब्धता कैसे आपके क्लेम की स्पीड तय करती है.
नौकरी बदलते टाइम सबसे बड़ा सवाल केवल नई सैलरी का नहीं होता, बल्कि पुराने PF का भी होता है.असल में लाखों कर्मचारी हर साल कंपनी बदलते हैं और फिर उन्हें समझ नहीं आता है कि आखिर पुराने PF अकाउंट का पैसा नए अकाउंट में कैसे ट्रांसफर होगा.
असल में पहले यह प्रोसेस काफी झंझट वाला था. पुराने या नए Employer से फॉर्म अटेस्ट करवाने पड़ते थे, कई बार हफ्तों इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब तो EPFO ने सिस्टम को काफी आसान और डिजिटल बना दिया है.
अगर आपका UAN (Universal Account Number) आधार से लिंक और KYC verified है, तो ज्यादातर मामलों में PF ट्रांसफर अपने आप यानी कि Auto Transfer हो सकता है.
EPFO नियमों के मुताबिक, हर केस में employer attestation जरूरी नहीं है
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तो EPFO verification के लिए employer approval मांग सकता है
अगर आपके कई PF अकाउंट्स हैं और डेटा मिसमैच है, तो manual intervention की जरूरत पड़ सकती है
Step 1:
EPFO मेंबर पोर्टल पर लॉगिन करें
Step 2:
Online सर्विंस’ में जाएं
Step 3:
One Member One EPF अकाउंट (Transfer Request)’ चुनें
Step 4:
पुराना और नया PF account वैरीफाई करें
Step 5:
OTP के जरिए रिक्वेस्ट सब्मिट करें
इसके बाद सिस्टम eligibility के हिसाब से ट्रांसफर प्रोसेस करता है
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सिस्टम में यह सवाल पहले जितना अबम नहीं रह गया है, लेकिन अगर मैनुअल वेरिफिकेशन की जरूरत है तो पुराने एम्प्लॉयर आपके सर्विस रिकॉर्ड्स को जल्दी वेरिफाई कर सकते हैं। नया एम्प्लॉयर करंट एम्प्लॉयमेंट कन्फर्म करता है,अगर पुराना डेटा अधूरा है, तो previous employer से verification जल्दी हो सकता है
PF ट्रांसफर में सबसे बड़ी परेशानी गलत KYC की वजह से आती है, इसलिएआधार लिंक रखें,PAN वेरिफाई करें,Date of Exit अपडेट करवाएं,UAN एक ही रखें.
ऑनलाइन पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए यह चेक करना जरूरी है कि किस कंपनी का डेटा और डिजिटल सिग्नेचर अपडेटेड है.तो कोशिश करें कि अगर मुमकिन हो, तो पुराने एम्प्लॉयर को ही अटेस्टेशन के लिए चुनें ताकि वेरिफिकेशन में देरी न हो.
EPFO का सिस्टम पहले के मुकाबले काफी आसान और डिजिटल हो चुका है। जी हां अब ज्यादातर कर्मचारियों को PF ट्रांसफर के लिए एम्प्लॉयर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन अगर KYC या सर्विस रिकॉर्ड्स में गड़बड़ी है, तो वेरिफिकेशन अटक सकता है. तो इसलिए समय रहते अपना EPFO प्रोफाइल अपडेट रखना सबसे जरूरी है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 पुरानी कंपनी बंद हो गई हो तो क्लेम कैसे अटेस्ट होगा?
ऐसी स्थिति में आप अपने मौजूदा (Present) एम्प्लॉयर को चुनें, अगर वह भी न हो, तो बैंक मैनेजर से फॉर्म अटेस्ट करवाना होगा
Q2 कंपनी का डिजिटल साइन रजिस्टर है या नहीं, यह कैसे जानें?
जब आप ऑनलाइन क्लेम फॉर्म में कंपनी सिलेक्ट करेंगे, तो पोर्टल खुद बता देगा कि वहां डिजिटल सिग्नेचर की सुविधा है या नहीं
Q3 क्या अटेस्टेशन के लिए कंपनी के दफ्तर जाना पड़ता है?
यह पूरी तरह ऑनलाइन प्रोसेस है, फॉर्म सबमिट करते ही आपकी कंपनी के पास रिक्वेस्ट ऑनलाइन पहुंच जाती है
Q4 अगर फिर भी काम न हो, तो EPFiGMS पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं
अगर फिर भी काम न हो, तो EPFiGMS पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं
Q5 क्या कई पुराने पीएफ अकाउंट एक साथ ट्रांसफर हो सकते हैं?
नहीं, आपको हर पुरानी कंपनी के अकाउंट के लिए अलग-अलग ट्रांसफर रिक्वेस्ट डालनी होगी