EPFO में अब विदेशी कर्मचारी भी बनेंगे मेंबर! दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, कहा- यहां नौकरी करते हैं तो...

Delhi High Court ने बड़ा फैसला सुनाया है. अब भारत में काम करने वाले विदेशी कर्मचारी भी EPFO के सदस्य बनेंगे. कंपनियों को PF नियमों का पालन करना होगा. जानिए इस आदेश से क्या बदलेगा और कर्मचारियों को क्या फायदा होगा.
EPFO में अब विदेशी कर्मचारी भी बनेंगे मेंबर! दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, कहा- यहां नौकरी करते हैं तो...

भारत में काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों (expatriates) को अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सदस्यता से बाहर नहीं रखा जा सकेगा. दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए साफ कहा है कि भारत में किसी भी भारतीय कंपनी में काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों पर भी EPFO के नियम समान रूप से लागू होंगे. कोर्ट ने माना कि कोई भी नियोक्ता (employer) विदेशी कर्मचारियों को ये कहकर छूट नहीं दे सकता कि वे भारत में अस्थायी तौर पर काम कर रहे हैं या उनकी सैलरी भारतीय नियमों से ऊपर है.

ये फैसला न केवल कंपनियों के लिए बड़ा संकेत है, बल्कि भारत के सोशल सिक्योरिटी फ्रेमवर्क के लिए एक अहम बदलाव भी माना जा रहा है. अब मल्टीनेशनल कंपनियों और विदेशी प्रोफेशनल्स. दोनों को PF और पेंशन से जुड़े भारतीय कानूनों का पालन करना होगा.

भारत में काम करोगे, तो भारतीय PF नियम मानने होंगे

दिल्ली हाई कोर्ट ने साफ कहा कि भारत में काम करने वाले सभी कर्मचारियों पर EPFO के प्रावधान लागू होते हैं. चाहे वो भारतीय हों या विदेशी. कोर्ट ने कहा कि EPFO एक्ट 1952 की धारा-2(f) के तहत “कर्मचारी” की परिभाषा में किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता का फर्क नहीं किया गया है. इसलिए अगर कोई व्यक्ति भारत की किसी कंपनी से सैलरी ले रहा है और येां काम कर रहा है, तो उसे EPFO का सदस्य बनना ही होगा.

ये आदेश उन कंपनियों के लिए एक बड़ा संकेत है जो अब तक विदेशी कर्मचारियों को “Non-Applicable” बताकर EPFO से बाहर रखती रही हैं. कोर्ट ने कहा. “भारतीय भूमि पर काम करने वाले सभी कर्मचारियों पर भारतीय श्रम कानून लागू होंगे, ये असमानता नहीं बल्कि समानता का सिद्धांत है.”

कंपनियों को क्यों लगा झटका?

अब तक कई भारतीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियां विदेशी कर्मचारियों के लिए PF योगदान को वैकल्पिक मानती थीं. उनका तर्क होता था कि विदेशी प्रोफेशनल्स कुछ वर्षों के लिए ही भारत में नियुक्त किए जाते हैं या उनकी सैलरी भारतीय सीमा से बहुत ऊपर होती है. लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के बाद ये बहाना नहीं चलेगा. इस फैसले का मतलब ये है कि अब कंपनियों को हर विदेशी कर्मचारी के लिए PF अकाउंट खोलना होगा. उसका 12% योगदान और कंपनी का 12% हिस्सा, दोनों EPFO में जमा करना होगा. अगर किसी कंपनी ने पहले ऐसा नहीं किया, तो उस पर बकाया राशि और पेनल्टी दोनों का सामना करना पड़ सकता है.

विदेशी कर्मचारियों के लिए क्यों है राहतभरी खबर

ये फैसला विदेशी कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि अब उन्हें भी वही सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स मिलेंगे जो भारतीय कर्मचारियों को मिलते हैं. PF सेविंग्स, पेंशन स्कीम और रिटायरमेंट फंड का फायदा. अब कंपनियां ये कहकर उन्हें बाहर नहीं कर सकेंगी कि “आप कुछ साल के लिए आए हैं, PF का फायदा नहीं मिलेगा.”

कानूनी रूप से अब वे भी “International Workers” कैटेगरी में आएंगे,
जिसका मतलब है कि उनका PF योगदान सुरक्षित रहेगा और
यदि भारत और उनके देश के बीच “Social Security Agreement” (SSA) है,
तो वे वापस लौटने के बाद वह फंड अपने देश में ट्रांसफर भी कर सकते हैं.

क्या था पूरा मामला

कई कंपनियों ने EPFO के नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी, जिसमें विदेशी कर्मचारियों को PF में शामिल करना अनिवार्य बताया गया था. कंपनियों ने तर्क दिया कि विदेशी कर्मचारी सीमित अवधि के लिए आते हैं, और उनकी सैलरी पर 12% PF योगदान लागू करना अनुचित है.

लेकिन कोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि “कानून सब पर बराबर लागू होता है. कर्मचारी की राष्ट्रीयता या सैलरी उसकी कानूनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकती.” अदालत ने ये भी स्पष्ट किया कि EPFO का उद्देश्य हर कर्मचारी को “भविष्य निधि और सामाजिक सुरक्षा” देना है, न कि केवल भारतीय नागरिकों को. इसलिए कोई भी नियोक्ता अब विदेशी कर्मचारियों को इस नियम से बाहर नहीं रख सकता.

EPFO 3.0 के दौर में मजबूत हुआ कानून

दिल्ली हाई कोर्ट का ये फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार EPFO को और आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है. “EPFO 3.0” नामक पहल के तहत संगठन को डिजिटल, पारदर्शी और ग्लोबल स्टैंडर्ड पर खड़ा किया जा रहा है. ऐसे में ये फैसला भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगत बनाएगा. अब भारत में काम कर रहे विदेशी पेशेवर भी भारतीय कानूनों के तहत वही सुविधा और सुरक्षा पाएंगे, जो किसी भारतीय कर्मचारी को दी जाती है, ये कदम “वर्कप्लेस इक्विटी” के लिए अहम साबित होगा.

कंपनियों के लिए अब क्या जरूरी हो गया है

इस फैसले के बाद कंपनियों को अपनी HR और Payroll नीतियों की तुरंत समीक्षा करनी होगी. उन्हें हर विदेशी कर्मचारी का UAN (Universal Account Number) जारी कराना होगा, उनका PF योगदान शुरू करना होगा और समय-समय पर EPFO को रिपोर्ट देनी होगी. अगर किसी विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति पहले हो चुकी है और उसका PF योगदान नहीं हुआ, तो कंपनी को बकाया भुगतान और इंटरेस्ट के साथ वह जमा करना पड़ेगा. यानी अब PF नियमों को हल्के में लेने का समय खत्म हो गया है.

भारत में ‘सोशल सिक्योरिटी’ का नया अध्याय

इस फैसले को सिर्फ कानूनी निर्णय के तौर पर नहीं, बल्कि भारत के सोशल सिक्योरिटी सिस्टम के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है. ये दिखाता है कि भारत अब अपने कामगारों को, चाहे वे भारतीय हों या विदेशी, समान अधिकार और सुरक्षा देने की दिशा में बढ़ रहा है. देश में विदेशी प्रोफेशनल्स की संख्या हर साल बढ़ रही है. आईटी, कंसल्टिंग, फाइनेंस और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में हजारों विदेशी कर्मचारी काम कर रहे हैं. अब उन्हें भी रिटायरमेंट सेविंग्स और पेंशन कवरेज मिलेगा, जो भारत को एक जिम्मेदार और भरोसेमंद एम्प्लॉयर-फ्रेंडली डेस्टिनेशन बनाता है.

Conclusion

दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश ने साफ कर दिया है कि भारत में काम करने वाला हर व्यक्ति EPFO नियमों के दायरे में आएगा. चाहे वो भारतीय नागरिक हो या विदेशी कर्मचारी. कंपनियों के लिए ये बड़ा संकेत है कि वे अब सामाजिक सुरक्षा कानूनों से नहीं बच सकते. ये फैसला सिर्फ कानून की व्याख्या नहीं, बल्कि “कामगारों के अधिकार” की नई परिभाषा है. जो कहती है, “अगर आप भारत में काम करते हैं, तो भारत आपके भविष्य की सुरक्षा करेगा.”

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1. EPFO क्या है?

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन जो भारत में कामगारों की PF और पेंशन स्कीम संभालता है.

Q2. EPFO सदस्यता से क्या लाभ होता है?

भविष्य निधि सेविंग्स, रिटायरमेंट पेंशन और सोशल सिक्योरिटी कवरेज मिलता है.

Q3. क्या विदेशी कर्मचारी भी EPFO में शामिल होंगे?

हां, दिल्ली हाई कोर्ट ने अब उन्हें भी अनिवार्य रूप से सदस्य बनने का आदेश दिया है.

Q4. EPFO में कितना योगदान होता है?

कर्मचारी और नियोक्ता दोनों 12-12% योगदान करते हैं, जिसमें 8.33% पेंशन फंड में जाता है.

Q5. क्या EPFO नियम सैलरी लिमिट से बंधे हैं?

नहीं, “इंटरनेशनल वर्कर्स” पर सैलरी लिमिट लागू नहीं होती. सभी को शामिल किया जाएगा.

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