&format=webp&quality=medium)
इन-ऑपरेटिव अकाउंट को ट्रैक करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन नामुमकिन नहीं.
प्रोविडेंट फंड को लेकर रिटायरमेंट प्लानिंग कर रहे हैं तो EPFO के नियम जानने बहुत जरूरी हैं. नियम नहीं पता होने की स्थिति में आपको नुकसान हो सकता है. ऐसा कई लोगों के साथ होता है कि अलग-अलग संस्थानों में काम करने के दौरान अलग-अलग पीएफ अकाउंट हो जाते हैं. इसकी वजह से पुराना पीएफ अकाउंट इन-ऑपरेटिव हो जता है. हालांकि, EPFO ने अब एक ही पीएफ अकाउंट को जारी रखना का विकल्प दे दिया है. अब कर्मचारी को नई कंपनी ज्वाइन करने पर पुराना PF नंबर ही देना होगा. ऐसे में कोई भी पीएफ खाता इनऑपरेटिव नहीं रहेगा. इस परिस्थिति में भी पुराना पीएफ अकाउंट इन-ऑपरेटिव हो जाता है.
तुरन्त करें खाते की रकम ट्रांसफर
इन-ऑपरेटिव अकाउंट को ट्रैक करना थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन नामुमकिन नहीं. ऑनलाइन इसे ट्रैक किया जा सकता है. अकाउंट ट्रैक होने पर इसमें जमा राशि को ट्रांसफर किया जा सकता है या फिर निकाला भी जा सकता है.
कौन से अकाउंट होते हैं इन-ऑपरेटिव?
इन-ऑपरेटिव अकाउंट उन अकाउंट्स को माना जाता है, जिनमें तीन साल (36 महीने) से कोई ट्रांजेक्शन नहीं हुआ है. मतलब कर्मचारी या कंपनी की तरफ से कोई अंशदान जमा नहीं किया गया है. 1 अप्रैल 2011 के बाद से सरकार ने ऐसे अकाउंट में जमा राशि पर इंट्रेस्ट देना बंद कर दिया था. हालांकि, 2016 में इस फैसले को वापस ले लिया गया और अब बंद खातों पर भी ब्याज मिलता है. वहीं, नियम के मुताबिक अगर इन-ऑपरेटिव अकाउंट पर 7 साल तक कोई दावा नहीं किया गया तो सरकार इसे सिनियर सिटिजन के लिए वेलफेयर फंड में डाल देती है.
क्या कहता है 7-साल का नियम?
पीएफ खाते के निष्क्रिय होने पर जिस रकम पर क्लेम नहीं किया जाता है, वह 'सीनियर सिटीजंस वेलफेयर फंड' में चली जाती है. नियमों के अनुसार, बिना दावे वाली रकम को खाते के सात साल तक निष्क्रिय रहने पर सीनियर सीटीजन वेलफेयर फंड में ट्रांसफर करना है. यहां तक कि ईपीएफ व एमपी एक्ट, 1952 की धारा 17 से छूट पाने वाले ट्रस्ट भी सीनियर सिटीजंस वेलफेयर फंड के नियमों के दायरे में आते हैं. इन्हें भी नियमों के अनुसार खाते की रकम को वेलफेयर फंड में ट्रांसफर करना होता है.
कैसे ट्रेस करें अपना अकाउंट?
पहले पीएफ की वेबसाइट www.epfindia.gov.in पर जाएं. यहां इन-ऑपरेटिव अकाउंट हेल्पडेस्क ऑप्शन को चुनना है. शिकायत बॉक्स में अपनी समस्या के बारे में पूरी जानकारी देनी है. बाद में आपसे निजी जानकारी मांगी जाएगी. नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्मदिन, पति या पिता का नाम, एंप्लॉयर नेम भरना होगा. इन तमाम जानकारी की मदद से आपका अकाउंट आसानी से ट्रेस हो सकता है. अकाउंट ट्रेस होने के बाद फंड निकाला जा सकता है या ट्रांसफर किया जा सकता है.
ज़ी बिज़नेस LIVE TV यहां देखें
पैसा ट्रांसफर करने के लिए फोलो करें स्टेप्स