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जिन सरकारी कर्मचारियों ने NPS चुना, उन्हें EPFO सबस्क्राइबर के मुकाबले ज्यादा अच्छा रिटर्न मिल रहा है. (Reuters)
केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2004 से नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) का फायदा मिल रहा है. इसमें सशस्त्र बल शामिल नहीं है. हालांकि बाद में राज्य सरकारों ने अपने कर्मचारियों को भी इसका पात्र बनने का अधिकार प्रदान किया है. हाल में आई 1 मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन सरकारी कर्मचारियों ने NPS चुना, उन्हें EPFO सबस्क्राइबर के मुकाबले ज्यादा अच्छा रिटर्न मिल रहा है.
साढ़े 9 प्रतिशत तक रिटर्न
हिन्दू बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक NPS में EPFO से ज्यादा अच्छा रिटर्न मिल रहा है. बीते 10 साल में NPS में 9.1% से 9.5% तक रिटर्न मिला है जबकि EPFO में 8.7% रिटर्न प्राप्त हुआ.
NPS ज्यादा स्मार्ट इनवेस्टमेंट ऑप्शन
सबस्क्राइबर को अधिक रिटर्न मिलने का सबसे बड़ा कारण फंड मैनेजर का सावधानी पूर्वक किया गया निवेश है. ये फंड अपने कॉरपस का 15 फीसदी तक निवेश इक्विटी में करते हैं जबकि शेष 85 फीसदी सरकारी सिक्योरिटी और कॉरपोरेट बॉन्ड में करते हैं.
SBI, LIC और UTI करते हैं प्रबंधन
SBI, LIC और UTI में सरकारी कर्मचारियों की रिटायरमेंट सेविंग का निवेश किया जाता है. फंड मैनेजर इसे तीनों संस्थाओं में निवेश की रकम को समान रूप से बांटकर लगाते हैं. अब तक इनके पास केंद्रीय कर्मचारियों का 1.1 लाख करोड़ रुपए और राज्य कर्मचारियों का 1.6 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया है.
1 अप्रैल से बदल गया यह नियम
PFRDA ने 1 अप्रैल से NPS के अंतर्गत निवेश विकल्प बदल दिए हैं. इसमें केंद्रीय कर्मचारियों को छूट दी गई है कि वे कोई भी 8 फंड मैनेजर चुनकर उसमें अपनी रिटायरमेंट सेविंग लगा सकें.