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अगर आप डेबिट कार्ड से ईएमआई पर शॉपिंग करते हैं तो भी आपके सिबिल स्कोर पर असर होगा. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
आजकल ऑनलाइन शॉपिंग करते समय या दुकानों से सामान खरीदते समय 'डेबिट कार्ड ईएमआई' (Debit Card EMI) का विकल्प बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. स्मार्टफोन, फ्रिज, टीवी से लेकर घर के अन्य सामानों को खरीदने के लिए लोग अब इसका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके जरिए आपको सामान लेते समय एक साथ पूरा पैसा नहीं चुकाना पड़ता, बल्कि वह रकम आसान मासिक किस्तों में बदल जाती है.
लेकिन इस सुविधा का उपयोग करने वाले अधिकांश लोगों के मन में एक बहुत बड़ा सवाल हमेशा रहता है- "क्या डेबिट कार्ड से ईएमआई पर सामान लेने से हमारे सिबिल (CIBIL Score) या क्रेडिट स्कोर पर कोई असर पड़ता है?" आइए इस पूरी बात को बिल्कुल आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं.
ईएमआई मतलब किसी लोन को अलग-अलग महीनों में एक तय पैसे देते हुए चुकाना. तो जब आप कोई शॉपिंग करते हैं और उसे ईएमआई में बदलवाते हैं तो आप पूरे पैसों का भुगतान नहीं करते. क्रेडिट कार्ड में आपकी उतनी लिमिट ब्लॉक हो जाती है, जितने का प्रोडक्ट होता है. वहीं डेबिट कार्ड में ऐसा कुछ नहीं होता, तो यह लोन बैंक के लिए और ज्यादा रिस्की है. भले ही आप शॉपिंग क्रेडिट कार्ड से करें या डेबिट कार्ड से, आपकी हर ईएमआई चुकानी की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट की ही जाएंगी. यानी अगर आप ईएमआई चुकाने में कोई गड़बड़ करते हैं, तो उसका असर सिबिल स्कोर पर दिखना तय है.
बहुत से लोग सोचते हैं कि डेबिट कार्ड तो उनके खुद के बैंक खाते (सेविंग्स अकाउंट) से जुड़ा होता है, इसलिए इसका लोन या क्रेडिट स्कोर से क्या लेना-देना! लेकिन यह एक बहुत बड़ी गलतफहमी है. जब आप डेबिट कार्ड ईएमआई का विकल्प चुनते हैं, तो वित्तीय संस्थान (बैंक या फाइनेंस कंपनी) इसे एक छोटे लोन (Consumer Durable Loan) के रूप में देखते हैं. बैंक इस लोन की जानकारी तुरंत देश की प्रमुख क्रेडिट ब्यूरो संस्थाओं (जैसे CIBIL, Experian, Equifax या CRIF High Mark) को रिपोर्ट कर देता है. इसलिए, इस लोन को चुकाने में आपका व्यवहार कैसा है, इस पर आपकी पूरी क्रेडिट हिस्ट्री निर्भर करती है.
मान लीजिए आपको ₹75,000 का एक लैपटॉप खरीदना है और आपके पास तुरंत देने के लिए पूरे पैसे नहीं हैं. जब आप डेबिट कार्ड ईएमआई का विकल्प चुनते हैं, तो आपके खाते से तुरंत ₹75,000 नहीं कटते. इसके बजाय, आपका बैंक आपकी तरफ से दुकानदार (Merchant) को तुरंत पूरे ₹75,000 चुका देता है. अब, बैंक इस चुकाई गई रकम को आपकी पसंद के अनुसार 3, 6 या 9 महीने की किस्तों में बदल देता है और हर महीने एक निश्चित तारीख पर आपके खाते से वह किस्त (EMI) काटता रहता है.
आपका क्रेडिट स्कोर 300 से 900 अंकों के बीच होता है, जो पूरी तरह इस बात पर तय होता है कि आप अपना कर्ज कितने अनुशासन से चुकाते हैं:
समय पर किस्त चुकाने पर (Positive Impact): अगर आपके खाते से हर महीने ईएमआई का पैसा समय पर और बिना किसी रुकावट के कट रहा है, तो इससे आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री मजबूत होती है. बैंकों की नजर में आप एक अनुशासित और भरोसेमंद ग्राहक बनते हैं, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर बहुत तेजी से ऊपर जाता है.
किस्त चूकने या बाउंस होने पर (Negative Impact): अगर किसी महीने आपके खाते में पैसे कम होने के कारण ईएमआई बाउंस हो जाती है, तो इसे 'डिफॉल्ट' माना जाता है. इससे आपका क्रेडिट स्कोर तुरंत नीचे गिर जाता है. भविष्य में जब आप कोई बड़ा लोन (जैसे होम लोन या कार लोन) लेने जाएंगे, तो बैंक आपकी इस लापरवाही को देखकर लोन देने से मना कर सकते हैं.
एक साथ कई ईएमआई चालू रखने पर: यदि आप अपने डेबिट कार्ड पर एक साथ कई सामान ईएमआई पर खरीद लेते हैं, तो इससे आपकी जेब पर कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. इसे 'क्रेडिट हंग्री' (कर्ज के लिए भूखा) व्यवहार माना जाता है, जिससे आपके स्कोर पर थोड़ा नकारात्मक असर पड़ सकता है.
लोन सफलतापूर्वक बंद करने पर: जब आप अपनी सारी किस्तें पूरी करके इस ईएमआई लोन को सफलता से बंद (Close) कर देते हैं, तो यह आपकी क्रेडिट प्रोफाइल को बहुत शानदार और मजबूत बना देता है.
बड़ी खरीदारी आसान: इसकी मदद से आप बजट की चिंता किए बिना कोई भी जरूरी या महंगा सामान तुरंत घर ला सकते हैं.
क्रेडिट कार्ड की जरूरत नहीं: यह उन लोगों के लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है जो क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं करना चाहते या जिनके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है.
नया सिबिल स्कोर बनाने का मौका: जिन लोगों ने जिंदगी में कभी कोई लोन नहीं लिया है और उनका कोई सिबिल स्कोर नहीं है, वह डेबिट कार्ड ईएमआई के जरिए समय पर भुगतान करके एक बेहतरीन और नया क्रेडिट स्कोर खड़ा कर सकते हैं.
अक्सर ऑनलाइन कंपनियां '0% EMI' या 'No Cost EMI' का बोर्ड लगाकर ग्राहकों को लुभाती हैं. लेकिन याद रखें कि ऐसी डील्स में भी बैंक आपसे प्रोसेसिंग फीस, हिडन चार्ज (छिपे हुए शुल्क) या जीएसटी (GST) वसूल सकते हैं.
इसके अलावा, हर महीने ईएमआई कटने की तारीख से एक-दो दिन पहले अपने सेविंग्स अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस जरूर रखें, क्योंकि यदि ऑटो-डेबिट फेल हुआ, तो बैंक आपसे ₹250 से ₹500 तक का भारी बाउंसिंग चार्ज भी वसूलेंगे और आपका सिबिल स्कोर भी खराब करेंगे. किसी भी असमंजस की स्थिति में कभी भी जल्दबाजी में खरीदारी न करें, बल्कि पहले नियमों को समझें या किसी वित्तीय सलाहकार की मदद लें.
डेबिट कार्ड ईएमआई एक दुधारी तलवार की तरह है- यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसका इस्तेमाल कितने जिम्मेदार तरीके से करते हैं. अगर आप अपनी क्षमता के अनुसार ही खरीदारी करते हैं और समय पर किस्तें चुकाते हैं, तो यह आपके क्रेडिट स्कोर को बढ़ाएगा और आपको वित्तीय रूप से अनुशासित बनाएगा. हमेशा अपनी औकात और जेब देखकर ही उधार लें, ताकि आपकी आर्थिक सेहत हमेशा दुरुस्त रहे.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड की ईएमआई (EMI) दोनों से सिबिल स्कोर प्रभावित होता है?
हां, दोनों ही स्थितियों में बैंक आपको एक तरह का लोन (क्रेडिट) देता है, जिसकी पूरी रिपोर्ट सिबिल को भेजी जाती है. इसलिए दोनों की किस्तें समय पर चुकाना जरूरी है.
Q2 क्रेडिट कार्ड की ईएमआई (Credit Card EMI) और नॉर्मल लोन में क्या अंतर है?
क्रेडिट कार्ड ईएमआई में आपकी कार्ड की मौजूदा लिमिट ब्लॉक हो जाती है और हर महीने किस्त चुकाने पर धीरे-धीरे खुलती है, जबकि नॉर्मल लोन में बैंक आपके खाते में अलग से नई रकम डालता है.
Q3 एक अच्छा सिबिल स्कोर (CIBIL Score) कितना माना जाता है?
सिबिल स्कोर 300 से 900 के बीच होता है. 750 या उससे ऊपर के स्कोर को बहुत अच्छा माना जाता है, जिस पर बैंक आसानी से और कम ब्याज पर लोन दे देते हैं.
Q4 क्या बहुत सारे क्रेडिट कार्ड या लोन रखने से सिबिल स्कोर खराब होता है?
हां, अगर आप एक साथ कई सारे लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक बार-बार आपका सिबिल चेक करते हैं. इसे 'हार्ड इन्क्वायरी' कहते हैं, जिससे स्कोर कम हो जाता है.
Q5 'नो कॉस्ट ईएमआई' (No Cost EMI) का क्या मतलब होता है, क्या यह सचमुच मुफ्त है?
इसमें आपको ब्याज के बराबर की छूट सामान की कीमत पर पहले ही मिल जाती है, लेकिन बैंक इसके बदले आपसे प्रोसेसिंग फीस और उस फीस पर जीएसटी (GST) वसूलते हैं.