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दिवाली का त्योहार पूरे भारत में खुशियों और उत्साह का प्रतीक माना जाता है. इसी समय सरकारी कर्मचारियों को बोनस मिलना भी एक परंपरा बन चुका है.हाल ही में रेवले कर्मचारियों और PSU कर्मचारियों को बोनस मिलने का ऐलान किया गया है. लेकिन सवाल यह है कि बोनस सिर्फ दिवाली पर ही क्यों? आइए, समझें कि यह परंपरा कैसे शुरू हुई, क्यों जारी है, लाभ क्या हैं, और क्या नियम हैं.
भारत में बोनस का ऐलान दिवाली से पहले होता है, क्योंकि यह त्योहार धनतेरस से शुरू होकर दीपावली तक चलता है.असल में त्योहारों के समय खर्चे बढ़ जाते हैं-नए कपड़े, मिठाई, तोहफे और परिवार की खुशियां. तो ऐसेमें सरकार का मकसद है कि कर्मचारियों को फेस्टिव सीजन में आर्थिक मदद मिले. पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 के तहत बोनस8.33% या ₹100 वेज पर न्यूनतम मिलता है, लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट कर्मचारियों को नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (एड-हॉक) मिलता है। यह 30 दिन की सैलरी के बराबर होता है.
माना जाता है कि दिवाली पर बोनस की परंपरा भारत में 1940 में ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी. उस समय कर्मचारियों को साल के 52 हफ्तों का वेतन मिलता था, जिसे 48 हफ्तों में बदलने का डिसीजन लिया गया. कर्मचारियों ने इस बदलाव का विरोध किया, जिससे उस समय की सरकार को उनके हित में कदम उठाना पड़ा. इसी विरोध को शांत करने के लिए 1940 में कर्मचारियों को दिवाली बोनस देने का अनांउस किया गया था. यह कदम कर्मचारियों को न केवल फाइनेंशियल राहत देता था, बल्कि त्योहार के अवसर पर मानसिक संतोष भी प्रदान करता था. हालांकरि बाद में, 1965 में पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट के तहत यह बोनस कानूनी अधिकार बन गया. आज यह परंपरा सिर्फ आर्थिक लाभ ही नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्य और त्योहार की खुशियों का प्रतीक भी बन गई है.
1965 में भारत सरकार ने 'पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट' पारित किया था. यानी कि 1965 में दिवाली बोनस को कानूनी रूप दिया. स्वतंत्र भारत में भी यह प्रथा जारी रही. इस एक्ट के तहत कंपनियों को मुनाफे का कम से कम 8.33% बोनस के रूप में कर्मचारियों को देना जरूरी कर दिया गया. जी हां आज यह ना केवल कर्मचारी साल भर इस बोनस का इंतजार करते हैं और इसे अपने आर्थिक और व्यक्तिगत उत्सव की तैयारी में यूज करते हैं.
दिवाली पर बोनस की परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जब त्योहारों पर एक्स्ट्रा पेमेंट दिया जाता था। आजादी के बाद यह जारी रही. 2024-25 में 3.8 मिलियन कर्मचारियों को 30 दिन का बोनस मिला, जो 2023-24 के 7,000 रुपये जैसा ही था। यह फैसला फाइनेंस मिनिस्ट्री के डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर द्वारा लिया जाता है.
फेस्टिव मदद: दिवाली खर्चों में सहारा, जैसे शॉपिंग, गिफ्ट.
मोटिवेशन: कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है.
इकोनॉमी बूस्ट: त्योहारों पर खर्च बढ़ने से बाजार चमकता है.
समावेशी: यूनियन टेरिटरी और सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्सेस को भी.
सरकारी कर्मचारियों को दिवाली पर बोनस त्योहारों की खुशी के लिए है. 30 दिन की सैलरी से फायदा और योग्यता पूरी करें.(नोट: खबर केवल सामान्य जानकारी पर ही आधारित है, हम इस पर पूरी तरह से मुहर नहीं लगा रहे हैं)
5 FAQs
Q1-दिवाली बोनस क्या है?
A-दिवाली बोनस कर्मचारियों को त्योहार पर अतिरिक्त भुगतान या 13वें महीने का वेतन होता है.
Q2-दिवाली बोनस की शुरुआत कब हुई?
A-यह परंपरा 1940 में ब्रिटिश शासन के दौरान शुरू हुई थी.
Q3-कौन से कर्मचारी दिवाली बोनस पाने के योग्य हैं?
A-सरकारी कर्मचारी, PSU कर्मचारी और यूनियन/पैरामिलिट्री फोर्सेज इसके लिए योग्य हैं.
Q4-कितना बोनस मिलता है?
A-पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 के तहत न्यूनतम 8.33% या 30 दिन की सैलरी के बराबर बोनस मिलता है.
Q5-बोनस का क्या लाभ है?
A-आर्थिक राहत, त्योहार की खुशियों में मदद, कर्मचारी मनोबल और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि.
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