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दिवाली के त्योहार पर हर तरफ ऑफर्स की बाढ़ आ जाती है. बैंक (Banks) और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (E-commerce platforms) नए ग्राहकों को लुभाने के लिए बड़े-बड़े डिस्काउंट्स, कैशबैक और नो-कॉस्ट EMI स्कीम्स लेकर आते हैं. हर किसी को लगता है कि यह मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए.
लेकिन इस चमकदार माहौल में छिपे हैं कुछ ऐसे फाइनेंशियल ट्रैप्स (Financial Traps) जो आपकी दिवाली के बाद की जिंदगी मुश्किल बना सकते हैं. ये ऑफर्स जितने लुभावने दिखते हैं, उतने ही खतरनाक भी हो सकते हैं अगर आप सावधान नहीं रहे. आइए जानते हैं कि इस फेस्टिव सीजन में किन 5 क्रेडिट कार्ड ट्रैप्स से संभल कर रहने की जरूरत है.
आपको लगता है कि बिना ब्याज के EMI मिल रही है, लेकिन असल में कंपनियां या बैंक प्रोडक्ट का प्राइस पहले ही बढ़ा देते हैं या प्रोसेसिंग फीस जोड़ देते हैं. उदाहरण के लिए, ₹50,000 का फोन अगर ₹52,000 में मिल रहा है “नो-कॉस्ट EMI” पर, तो वह असल में ब्याज-मुक्त नहीं है.
दिवाली शॉपिंग में एक्साइटमेंट के चक्कर में लोग अपनी क्रेडिट लिमिट (Credit Limit) से ज्यादा खर्च कर बैठते हैं. इससे न सिर्फ ब्याज बढ़ता है बल्कि आपका क्रेडिट स्कोर (Credit Score) भी गिरता है.
अगर आपने अपने कार्ड का बिल समय पर नहीं भरा, तो बैंक 30-45% तक सालाना ब्याज (Interest Rate) वसूल सकता है. एक बार मिस करने के बाद ये रिकॉर्ड आपके क्रेडिट रिपोर्ट (Credit Report) में 7 साल तक रह सकता है.
क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना सबसे बड़ी गलती है. ऐसा करते ही ब्याज उसी दिन से लगना शुरू हो जाता है और 2-3% ट्रांजैक्शन चार्ज भी देना पड़ता है. त्योहार के नाम पर ऐसी भूल न करें, वरना ये “कैश” आपको महंगा पड़ेगा.
कई ब्रांड पहले कीमतें बढ़ाकर फिर “70% OFF” जैसी सेल लगाते हैं. आपको लगता है कि आप सस्ता खरीद रहे हैं, पर असल में वही प्रोडक्ट दूसरे प्लेटफॉर्म पर बिना डिस्काउंट के सस्ता मिल सकता है.
Annual Fee- ₹500 से ₹5000 तक
Late Payment Fee- ₹500 से ₹1200 तक
Cash Withdrawal Fee- 2–3%
GST- हर सर्विस पर 18% टैक्स
Foreign Transaction Fee- 1–3%
इन सब को जोड़ें तो आपकी “फ्री” शॉपिंग बहुत महंगी पड़ सकती है.
दिवाली की खुशी तब तक ही मीठी है जब तक वह आपकी जेब पर भारी न पड़े. क्रेडिट कार्ड आपकी सुविधा के लिए हैं, ना कि भावनाओं के लिए. इसलिए किसी भी ऑफर के पीछे भागने से पहले कुल ब्याज, चार्ज और रीपेमेंट क्षमता (Repayment Capacity) को जरूर समझें.
सही प्लानिंग से आप इस त्योहार को रोशनी से भर सकते हैं न कि उधारी से.
नहीं, ज्यादातर मामलों में प्रोडक्ट की कीमत या फीस में ब्याज छुपा होता है.
आपको एक्स्ट्रा चार्ज देना पड़ता है और क्रेडिट स्कोर भी गिरता है.
नहीं, इससे ब्याज बढ़ता है और बिल महीनों तक चलता रहता है.
हां, प्रोसेसिंग फीस और GST अक्सर लगते हैं.
जरूरत हो तो ही करें, वरना कैश या डेबिट कार्ड से पेमेंट करें.
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