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Digital Gold vs Gold ETF Investment : भारत में सोने में निवेश करना एक परंपरा की तरह है. ये मुश्किल वक्त का साथी भी है और समृद्धि का प्रतीक भी. लेकिन अब वो जमाना गया, जब सोना खरीदने के लिए सुनार की दुकान पर जाकर मोलभाव करना पड़ता था. आज के डिजिटल दौर में सोना खरीदने के दो सबसे स्मार्ट और पॉपुलर तरीके हैं - डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) और गोल्ड ETF (Gold Exchange Traded Fund).
लेकिन इन दोनों के नाम सुनकर लगता है कि ये एक ही हैं, इसलिए ज्यादातर लोग कन्फ्यूज हो जाते हैं. जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. दोनों के काम करने का तरीका, फायदे, नियम और चार्ज बिल्कुल अलग हैं. आइए जानते हैं कि आपके लिए कौन सा विकल्प ज्यादा 'दमदार' है.
ये सोना खरीदने का सबसे आसान और नया तरीका है.
आप अपने पसंदीदा पेमेंट ऐप (जैसे Paytm, Google Pay, PhonePe) या MMTC-PAMP जैसी कंपनियों की वेबसाइट से सीधे 24 कैरेट शुद्ध सोना खरीद सकते हैं. आपका खरीदा हुआ सोना आपके नाम पर एक बीमित वॉलेट में सुरक्षित रख दिया जाता है.
ये उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो पहली बार सोने में निवेश कर रहे हैं, जिनके पास डीमैट अकाउंट नहीं है, और जो बहुत छोटी रकम (जैसे ₹1, ₹10, ₹100) से शुरुआत करना चाहते हैं.
ETF का मतलब होता है Exchange Traded Fund.
गोल्ड ETF एक तरह का म्यूचुअल फंड है जो सोने में निवेश करता है. आप इसे बिल्कुल किसी कंपनी के शेयर की तरह स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE) पर खरीद और बेच सकते हैं. 1 गोल्ड ETF की यूनिट आमतौर पर 1 ग्राम सोने के बराबर होती है.
ये उन निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए बना है जिनके पास डीमैट अकाउंट है, जो सोने में ट्रेडिंग करना चाहते हैं, और जिन्हें ज्यादा लिक्विडिटी (आसानी से खरीदने-बेचने की सुविधा) चाहिए.
डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF, दोनों ही फिजिकल सोना खरीदने से कहीं बेहतर विकल्प हैं. दोनों में से कौन 'दमदार' है, ये आपकी अपनी जरूरत पर निर्भर करता है.
अगर आप एक आम, छोटे निवेशक हैं. ऐसा सोना खरीदना चाहते हैं जिसमें सोने की शुद्धता की गारंटी हो, और भविष्य में उसे असली सोने (फिजिकल गोल्ड) में बदलवाने की क्षमता भी हो, तो डिजिटल गोल्ड आपके लिए सही हो सकता है. ये छोटी-छोटी, नियमित खरीदारी के लिए बहुत अच्छा है
दूसरी ओर, अगर आप पहले से ही शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं और सोने की कीमतों पर नजर रखने के लिए एक कम लागत वाला और रेगुलेटेड (नियमों के तहत चलने वाला) तरीका चाहते हैं, तो गोल्ड ETF समझदारी भरा फैसला है. ये उन निवेशकों के लिए सही है जिन्हें असली सोने की डिलीवरी नहीं चाहिए और जो अपने डीमैट खाते में लंबी अवधि के लिए, बिना ज्यादा झंझट के, सोने में निवेश करना चाहते हैं.
जवाब: हां. जब आप किसी प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म (जैसे MMTC-PAMP) से डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं तो आपका सोना 100% बीमित वॉलेट में सुरक्षित रखा जाता है और इसकी निगरानी एक स्वतंत्र ट्रस्टी करता है.
जवाब: दोनों पर टैक्स के नियम बिल्कुल एक जैसे हैं. अगर आप 3 साल से पहले बेचते हैं तो मुनाफा आपकी इनकम में जुड़कर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा (शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स). अगर 3 साल के बाद बेचते हैं तो मुनाफे पर 20% का टैक्स इंडेक्सेशन के फायदे के साथ लगेगा (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स).
जवाब: गोल्ड ETF को फिजिकल सोने में बदलवाना बहुत मुश्किल और महंगा है. इसके लिए आपके पास बहुत बड़ी मात्रा में (आमतौर पर 500 ग्राम या 1 किलो) ETFs होने चाहिए. इसलिए, अगर आपका लक्ष्य फिजिकल सोना लेना है, तो डिजिटल गोल्ड ही बेहतर है.
जवाब: हां, जब आप डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं, तो आपको उस पर 3% GST देना पड़ता है, बिल्कुल फिजिकल सोने की तरह ही. हालांकि, बेचते समय GST नहीं लगता.
जवाब: हां, आप अपने ब्रोकर के जरिए गोल्ड ETF में भी SIP कर सकते हैं.