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अगर आप FD कराने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
अगर आप Fixed Deposit यानी FD कराने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ कौन-सा बैंक ज्यादा ब्याज दे रहा है, यही देखना काफी नहीं है. FD चुनते समय यह समझना भी जरूरी है कि आपको ब्याज हर महीने चाहिए या मैच्योरिटी पर बड़ा अमाउंट चाहिए. यहीं से Cumulative और Non-Cumulative FD का फर्क शुरू होता है.
आज के समय में कई लोग रिटायरमेंट प्लानिंग, Monthly Income और सुरक्षित निवेश के लिए FD का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन गलत विकल्प चुनने पर बाद में Cash Flow की दिक्कत हो सकती है. इसलिए निवेश से पहले दोनों FD के फायदे, नुकसान और टैक्स नियम समझना जरूरी हो जाता है.
Cumulative FD वह विकल्प है, जिसमें मिलने वाला ब्याज बीच में नहीं दिया जाता. बैंक उस ब्याज को आपकी मूल रकम में जोड़ देता है और अगली बार ब्याज बढ़ी हुई रकम पर मिलता है. यानी इसमें Compounding का फायदा मिलता है.
कैसे काम करती है Cumulative FD?
मान लीजिए आपने ₹5 लाख की FD कराई.
यानी “ब्याज पर ब्याज” मिलता रहता है और समय के साथ निवेश तेजी से बढ़ सकता है.
किन लोगों के लिए सही है Cumulative FD?
यह विकल्प खासतौर पर इन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है:
अगर आपको हर महीने पैसे की जरूरत नहीं है, तो यह विकल्प ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
Non-Cumulative FD में बैंक ब्याज को नियमित अंतराल पर आपके खाते में भेजता रहता है.
यह भुगतान हो सकता है:
इसमें ब्याज Principal में नहीं जुड़ता.
किन लोगों के लिए बेहतर है Non-Cumulative FD?
यह FD खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है:
अगर आपकी नौकरी नहीं है और घर खर्च के लिए नियमित आय चाहिए, तो यह विकल्प ज्यादा Practical माना जाता है.
| फीचर | Cumulative FD | Non-Cumulative FD |
| ब्याज भुगतान | मैच्योरिटी पर | नियमित अंतराल पर |
| Compounding | मिलता है | नहीं |
| Monthly Income | नहीं | हां |
| मैच्योरिटी अमाउंट | ज्यादा | कम |
| किसके लिए बेहतर | Wealth Creation | Regular Income |
अगर कोई व्यक्ति नौकरी छोड़ चुका है और हर महीने खर्च चलाने के लिए नियमित आय चाहता है, तो Non-Cumulative FD ज्यादा उपयोगी मानी जाती है. ऐसा इसलिए, क्योंकि इसमें ब्याज सीधे खाते में मिलता रहता है और निवेशक को Cash Flow बना रहता है.
| ब्याज दर | अनुमानित निवेश |
| 6% | ₹20 लाख |
| 7% | ₹17.14 लाख |
| 7.25% | ₹16.55 लाख |
| 7.5% | ₹16 लाख |
| 8% | ₹15 लाख |
अगर कोई निवेशक ₹50 लाख की FD कराता है और उसे 7% वार्षिक रिटर्न मिलता है, तो Quarterly Compounding के साथ 10 साल में रकम लगभग ₹1 करोड़ तक पहुंच सकती है. यही वजह है कि लंबे समय के निवेशकों के बीच Cumulative FD लोकप्रिय मानी जाती है.
हां. ज्यादातर बैंकों में दोनों FD पर ब्याज दर लगभग समान रहती है. देश के बड़े बैंक जैसे:
आमतौर पर बैंक 6% से 7.25% तक ब्याज दे रहे हैं. Senior Citizens को अतिरिक्त 0.5% तक ज्यादा ब्याज मिलता है.
नहीं.
एक बार FD बुक हो जाने के बाद आपकी ब्याज दर पूरी अवधि तक फिक्स रहती है. बाद में बैंक ब्याज दर बढ़ाए या घटाए, पुरानी FD पर असर नहीं पड़ता.
दोनों FD में ब्याज “Income From Other Sources” के तहत टैक्सेबल होता है, लेकिन दोनों में टैक्स लागू होने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है.
इसमें ब्याज भले मैच्योरिटी पर मिले, लेकिन हर साल जमा हुए ब्याज पर टैक्स लागू हो सकता है. यानी पैसा हाथ में न आने पर भी टैक्स देना पड़ सकता है.
इसमें जो ब्याज आपको सालभर में मिलता है, उसी वित्त वर्ष में वह टैक्सेबल माना जाता है.
अगर FD से सालाना ब्याज:
तो बैंक TDS काट सकता है. PAN न होने पर ज्यादा TDS लागू हो सकता है.
FD चुनने से पहले यह तय करना जरूरी है:
FD आज भी भारत में सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्पों में गिनी जाती है, लेकिन सही FD चुनना आपकी जरूरतों पर निर्भर करता है. अगर आपका लक्ष्य लंबे समय में बड़ा Corpus बनाना है, तो Cumulative FD बेहतर हो सकती है. वहीं अगर आपको हर महीने स्थिर आय चाहिए, खासकर रिटायरमेंट के बाद, तो Non-Cumulative FD ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है. निवेश से पहले अपनी Income Need, Financial Goal और Tax Situation जरूर समझ लें.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 Cumulative FD क्या होती है?
इसमें ब्याज Principal में जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर पूरा पैसा मिलता है.
Q2 Non-Cumulative FD किसके लिए सही है?
यह Monthly Income चाहने वाले निवेशकों और Senior Citizens के लिए बेहतर मानी जाती है.
Q3 क्या FD पूरी तरह सुरक्षित होती है?
बैंक FD को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है.
Q4 क्या FD बीच में तोड़ी जा सकती है?
हां, लेकिन Penalty लग सकती है.
Q5 FD पर टैक्स लगता है क्या?
हां, FD का ब्याज टैक्सेबल होता है.