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दिल्ली-एनसीआर में रहना एक सपना भी है और एक चुनौती भी. जब आप अकेले होते हैं या सिर्फ पति-पत्नी होते हैं, तो खर्चों पर कंट्रोल करना आसान होता है. लेकिन जैसे ही परिवार में दो बच्चे, एक खुद का घर (EMI पर) और एक कार शामिल होती है, तो कैलकुलेशन पूरी तरह बदल जाता है. आइए, एक ऐसे परिवार का उदाहरण लेते हैं जहां पति-पत्नी और उनके दो बच्चे (5 साल और 8 साल) हैं, जो अपने घर और कार के साथ एक 'सेटल' लाइफ जी रहे हैं.
किराए के घर से निकलकर खुद के घर में जाना हर किसी का सपना होता है. मान लेते हैं कि आपने ₹60 लाख का एक 2BHK फ्लैट लिया है, जिसके लिए आपने ₹50 लाख का होम लोन लिया है.
ईएमआई (EMI): ₹50 लाख के लोन पर (लगभग 8.5% से 9% ब्याज दर और 20 साल की अवधि मानकर) आपकी मासिक किस्त ₹40,000 आती है.
असर: यह आपकी सैलरी का वह हिस्सा है जो हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच सबसे पहले आपके खाते से कटेगा. यह निवेश भी है और एक बड़ा फिक्स्ड खर्च भी.
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दिल्ली जैसे शहर में बच्चों के साथ ट्रैवल करने के लिए कार अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है. मान लेते हैं आपने ₹10 लाख की एक कार ली है, जिसे 5 साल के लोन पर फाइनेंस कराया है.
ईएमआई (EMI): ₹10 लाख की कार पर 5 साल के लिए लगभग ₹20,000 प्रति माह की किस्त जाती है.
मेंटेनेंस और फ्यूल: कार सिर्फ ईएमआई नहीं मांगती, बल्कि पेट्रोल/CNG और सर्विसिंग का खर्च भी जोड़ती है. ऐसे में कार पर महीने करीब ₹5000 का पेट्रोल और सालाना ₹10,000 का मेंटेनेंस तो लगेगा ही. यानी हर महीने कार मेंटेनेंस और फ्यूल पर आपका करीब ₹6,000 का खर्च आएगा.
दो बच्चे (5 और 8 साल) अब स्कूल जाने लगे हैं. दिल्ली-एनसीआर के एक औसत प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई काफी महंगी है.
सालाना फीस: दोनों बच्चों की कुल सालाना फीस कम से कम ₹2,00,000 तक तो होगी ही. इसे महीने के हिसाब से देखें तो यह करीब ₹16,666 बैठती है यानी करीब ₹17,000.
स्कूल बस का खर्च: दोनों बच्चों का सालाना बस खर्च ₹50,000 है, जो महीने का लगभग ₹4,166 होता है. यानी करीब ₹4000.
कुल शिक्षा खर्च: देखा जाए तो महीने का करीब ₹21,000 सिर्फ बच्चों की पढ़ाई और ट्रांसपोर्ट पर खर्च होगा.
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4 लोगों के परिवार (2 वयस्क और 2 बच्चे) के लिए किचन का बजट सिर्फ पति-पत्नी के मुकाबले काफी बढ़ जाता है.
राशन और दूध: फल, सब्जियां, दूध, अनाज और स्नैक्स मिलाकर महीने का कम से कम ₹15,000 से ₹18,000 का खर्च आता है. बच्चों की बढ़ती उम्र के कारण दूध और पौष्टिक आहार का खर्च बढ़ना स्वाभाविक है. हम इसे औसत ₹16,000 मान सकते हैं.
खुद का घर होने पर सोसाइटी मेंटेनेंस चार्जेस देना अनिवार्य होता है.
मेंटेनेंस: 2BHK के लिए औसत मेंटेनेंस ₹2500 से ₹3000 के बीच होता ही है.
बिजली: गर्मियों में एसी और सर्दियों में गीजर के कारण बिजली का बिल औसतन ₹5000 आ ही जाएगा.
इस तरह यूटिलिटीज पर महीने का ₹8,000 का खर्च तय है.
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बच्चों और परिवार की सुरक्षा के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण सबहेड है.
मेडिकल: बच्चों के साथ छोटे-मोटे संक्रमण या रूटीन चेकअप चलते रहते हैं. महीने का औसत मेडिकल खर्च ₹5000 रखना ही चाहिए.
इंश्योरेंस: परिवार के मुखिया का टर्म प्लान और पूरे परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस (फ्लोटर प्लान) अनिवार्य है. इसका मासिक प्रीमियम औसत ₹3000 मान सकते हैं.
महीने में कम से कम 2 बार बाहर खाना या बच्चों को मॉल/पार्क ले जाना मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है.
खर्च: फिल्म, डिनर या छोटे-मोटे ट्रिप मिलाकर महीने का ₹8,000-₹10,000 का खर्च हो जाता है. इसे हम न्यूनतम ₹8,000 ही मान लेते हैं.
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होम लोन और कार लोन होने के बावजूद भविष्य के लिए निवेश करना नहीं छोड़ना चाहिए.
SIP: बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए कम से कम ₹10,000 की मासिक SIP या निवेश करना जरूरी है.
इमरजेंसी फंड: हर महीने ₹5000 किसी अलग खाते में डालने चाहिए ताकि अचानक आने वाली किसी जरूरत (जैसे कार रिपेयर या मेहमानों का आना) को पूरा किया जा सके.
आइए अब सभी सबहेड्स को एक साथ जोड़कर देखते हैं:
| खर्च का विवरण (Heads) | मासिक अनुमानित खर्च (₹) |
|---|---|
| होम लोन ईएमआई (Home Loan EMI) | 40,000 |
| कार लोन ईएमआई (Car Loan EMI) | 20,000 |
| कार फ्यूल और मेंटेनेंस (Fuel) | 6,000 |
| बच्चों की स्कूल फीस/बस चार्ज (Monthly Avg) | 21,000 |
| किचन और राशन (Grocery) | 16,000 |
| घर का मेंटेनेंस और बिजली (Utilities) | 8,000 |
| मेडिकल खर्च (Medical) | 5,000 |
| इंश्योरेंस प्रीमियम (Insurance) | 3,000 |
| लाइफस्टाइल और आउटिंग (Lifestyle) | 8,000 |
| निवेश / SIP (Investment) | 10,000 |
| इमरजेंसी फंड / Misc (Savings) | 5,000 |
| कुल मासिक खर्च (Total Monthly Expense) | ₹1,42,000 |
ऊपर दिए गए कैलकुलेशन के अनुसार, एक परिवार की सभी बुनियादी जरूरतों, ईएमआई और बच्चों की शिक्षा को पूरा करने के लिए कम से कम ₹1.42 लाख की जरूरत तो हर महीने है ही. लेकिन ध्यान रहे, यह सिर्फ 'खर्च' है. जीवन में कभी भी इंक्रीमेंट न होना, टैक्स का बढ़ना या अचानक कोई बड़ा खर्च आ जाना (जैसे कार का टायर बदलना या घर का पेंट कराना) भी शामिल होता है. तो आपकी इन हैंड सैलरी कम से कम 1.5 लाख रुपये तो होनी ही चाहिए. ध्यान रहे, ये सीटीसी नहीं है. यहां उस सैलरी की बात हो रही है जो टैक्स कटौती के बाद आपको मिलेगी.
1- क्या ₹1.5 लाख की सैलरी में दिल्ली में घर और कार दोनों मैनेज हो सकते हैं?
मैनेज हो सकते हैं, लेकिन तब आपको निवेश (SIP) और लाइफस्टाइल (बाहर घूमना) में काफी कटौती करनी होगी.
2- होम लोन की ईएमआई सैलरी के कितने प्रतिशत होनी चाहिए?
आपकी ईएमआई आपकी इन-हैंड सैलरी के 30-35% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
3- बच्चों की स्कूल फीस के लिए अलग से बचत कैसे करें?
सालाना फीस के लिए 'लिक्विड फंड' या 'शॉर्ट टर्म आरडी' (RD) शुरू करना सबसे अच्छा तरीका है, ताकि साल के अंत में बोझ न पड़े.
4- क्या खुद का घर लेने के बजाय किराए पर रहना बेहतर है?
अगर आपकी ईएमआई किराए से बहुत ज्यादा है और आप निवेश के अन्य विकल्प (Equity) से ज्यादा रिटर्न पा सकते हैं, तो किराया बेहतर हो सकता है. लेकिन भावनात्मक सुरक्षा के लिए खुद का घर दिल्ली में प्राथमिकता होती है.
5- इमरजेंसी फंड कितना होना चाहिए?
आपके कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड हमेशा बैंक खाते में होना चाहिए.
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