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उम्र जैसे-जैसे 40 के करीब पहुंचती है, वैसे-वैसे जिम्मेदारियां बढ़ने लगती हैं. करियर, परिवार, बच्चों की पढ़ाई और हेल्थ- सब एक साथ ध्यान मांगते हैं. इसी भागदौड़ के बीच कई बार लोगों को बेहतर फाइनेंशियल प्लानिंग करने का समय नहीं मिल पाता, या फिर वो मौज-मस्ती के बीच इसे सीरियस नहीं लेते. अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ है तो 40 की उम्र होने तक कुछ गलतियों को जरूर सुधार लें, वरना इसका सीधा असर आपके बुढ़ापे पर दिखेगा और बाद में सिर्फ पछतावा बचेगा. यहां जानिए ऐसी 5 गलतियां तो 40 की उम्र तक हर हाल में सुधार लेनी चाहिए ताकि रिटायरमेंट के बाद की लाइफ सुकून भरी हो.
सबसे आम गलती यही है कि लोग बचत और निवेश को टालते रहते हैं. 20s और 30s अक्सर मौज-मस्ती और खर्चों में निकल जाती हैं. जब 40 की उम्र पार होने लगती है, तब एहसास होता है कि निवेश शुरू करने में देर हो गई.
असल नुकसान ये होता है कि कंपाउंडिंग का फायदा हाथ से निकल जाता है. अगर आप 40 से पहले या 40 के आसपास भी निवेश शुरू कर देते हैं, तो 60 की उम्र तक एक अच्छा-खासा फंड तैयार किया जा सकता है. SIP, म्यूचुअल फंड और PPF जैसे ऑप्शन इसमें मददगार हो सकते हैं.
हेल्थ से जुड़े खर्चे कभी बता कर नहीं आते. 40 की उम्र के बाद BP, शुगर और हार्ट जैसी दिक्कतें आम होने लगती हैं. ऐसे में बड़े मेडिकल बिल जेब पर भारी पड़ सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि आप समय रहते एक अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस लें. इसमें क्रिटिकल इलनेस कवर जरूर शामिल करें. इसके साथ-साथ एक अलग हेल्थ फंड भी बनाएं, ताकि इमरजेंसी में सेविंग्स पर असर न पड़े.
यंग एज में बड़ा घर या लग्ज़री गाड़ी लेने का जोश अक्सर भारी पड़ जाता है. 40 के बाद वही लोन तनाव की वजह बन जाता है, खासकर क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन जैसे हाई-इंटरस्ट कर्ज. समझदारी इसी में है कि जरूरी लोन ही लें और पुराने कर्ज को जल्दी निपटाने पर फोकस करें. कोशिश करें कि 50 की उम्र तक आप कर्ज-मुक्त हो जाएं, ताकि रिटायरमेंट की प्लानिंग आराम से हो सके.
कई लोग सोचते हैं कि इंश्योरेंस बाद में देखेंगे. लेकिन अगर अचानक कुछ हो जाए और टर्म इंश्योरेंस न हो, तो परिवार पर बड़ा आर्थिक बोझ आ सकता है. जितनी कम उम्र में टर्म इंश्योरेंस लिया जाए, प्रीमियम उतना ही कम रहता है. इसलिए सही समय पर पर्याप्त कवर लें, ताकि आपके न होने पर भी परिवार की जिंदगी पटरी से न उतरे.
“बाद में देखेंगे” वाला रवैया रिटायरमेंट के मामले में सबसे खतरनाक होता है. कई लोग मानते हैं कि बच्चे संभाल लेंगे या कोई न कोई रास्ता निकल आएगा. हकीकत ये है कि बिना प्लानिंग के रिटायरमेंट के साल काफी मुश्किल हो सकते हैं. महंगाई, हेल्थ खर्च और लाइफस्टाइल को ध्यान में रखकर अभी से रिटायरमेंट के लिए निवेश शुरू करें. NPS, EPF और म्यूचुअल फंड इसमें मदद कर सकते हैं.
नहीं, देर जरूर होती है लेकिन नामुमकिन नहीं. सही प्लानिंग से अब भी अच्छा फंड बनाया जा सकता है.
टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस दोनों बेहद जरूरी हैं.
हाई-इंटरस्ट लोन पहले चुकाएं और फालतू खर्चों पर कंट्रोल रखें.
जितनी जल्दी शुरू करें उतना बेहतर है, लेकिन 40 के आसपास इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.
हां, सही फैसलों से 50 के बाद भी बहुत कुछ सुधारा जा सकता है.