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त्योहारों के मौसम में ज्यादातर लोग अपनी जरूरतों और खर्चों को पूरा करने के लिए पर्सनल लोन (Personal Loan) लेना पसंद करते हैं. घर की सजावट, गिफ्टिंग या शॉपिंग- हर खर्च के लिए ये लोन मददगार साबित होता है. लेकिन अगर आपका क्रेडिट स्कोर (Credit Score) 575 या उससे कम है, तो बैंक या फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन (Financial Institution) से लोन लेना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
कम क्रेडिट स्कोर का मतलब होता है कि आपने पहले कभी लोन या क्रेडिट कार्ड पेमेंट (Credit Card Payment) समय पर नहीं किया, या कुछ पेमेंट मिस हो गए हैं. ऐसे में बैंक आपको “हाई रिस्क कस्टमर” मानते हैं. इसका असर लोन अप्रूवल (Loan Approval) और ब्याज दर (Interest Rate) दोनों पर पड़ता है. बता दें कि अच्छा क्रेडिट स्कोर 750 से ज्यादा होता है.
जिन लोगों का क्रेडिट स्कोर (Credit Report) 650 से नीचे होता है, उन्हें बैंक और NBFCs लोन देने में हिचकिचाते हैं. ऐसे ग्राहकों को या तो बहुत हाई इंटरेस्ट रेट पर लोन दिया जाता है या फिर कड़े रीपेमेंट टर्म्स (Repayment Terms) के साथ ऑफर किया जाता है.
लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप कुछ कदम सही दिशा में उठाते हैं, जैसे कि बेहतर डॉक्युमेंटेशन (Documentation) और भरोसेमंद लेंडर चुनना, तो आपकी लोन अप्रूवल की संभावना काफी बढ़ जाती है.
कम क्रेडिट स्कोर होने के बावजूद लोन लेने के कई रास्ते हैं.
हमेशा RBI-Regulated Lender से ही लोन लेना चाहिए, क्योंकि ये पारदर्शी (Transparent) और सुरक्षित (Safe) होते हैं. अभी RBI की वेबसाइट पर लगभग 1600 डिजिटल लेंडिंग ऐप्स लिस्टेड हैं जो रेगुलेटेड एंटिटी (Regulated Entities) के तहत काम करते हैं.
लोन लेने से पहले हमेशा नीचे दी गई चीजें जरूर चेक करें:
| जांचने की चीजें | क्यों जरूरी है |
|---|---|
| बैंक या NBFC का लाइसेंस | ये देखने के लिए कि लेंडर RBI द्वारा रेगुलेटेड है या नहीं |
| ब्याज दर (Interest Rate) | कम ब्याज दर वाले ऑफर से EMI का बोझ घटेगा |
| प्रोसेसिंग फीस | कई बार ये फीस बहुत ज्यादा होती है |
| छिपे चार्जेज | लोन एग्रीमेंट पढ़कर समझें |
| ग्राहक समीक्षा | ऑनलाइन रिव्यू से भरोसेमंद लेंडर चुनें |
पर्सनल लोन आसान लगता है, लेकिन इसके साथ कई जोखिम भी जुड़े हैं:
अगर आपका क्रेडिट स्कोर 575 है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. थोड़ी सावधानी, सही लेंडर और अनुशासन के साथ आप न केवल लोन पा सकते हैं बल्कि भविष्य में अपना स्कोर (Credit Improvement) भी सुधार सकते हैं. लोन लेते समय हमेशा यह ध्यान रखें कि आपकी रीपेमेंट क्षमता (Repayment Capacity) क्या है और आप कितना जोखिम उठा सकते हैं.
पर्सनल लोन लेना गलत नहीं है, लेकिन सोच-समझकर लेना जरूरी है. खासकर अगर आपका क्रेडिट स्कोर कम है तो हर कदम पर सतर्क रहें. सही बैंक चुनें, शर्तें ध्यान से पढ़ें और अपने बजट के हिसाब से EMI तय करें. याद रखें, समय पर लोन चुकाना आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को मजबूत बनाता है और भविष्य में बड़े लोन के लिए रास्ता खोलता है.
क्रेडिट स्कोर आपकी लोन रीपेमेंट हिस्ट्री का रिकॉर्ड होता है.
750 से ऊपर का स्कोर अच्छा माना जाता है.
हां, लेकिन ब्याज दर ज्यादा होगी.
RBI की ऑफिशियल वेबसाइट पर लिस्टेड लेंडर्स देखें.
पेनल्टी लगती है और स्कोर गिरता है.
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