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क्रेडिट कार्ड यूजर अक्सर एक सवाल पूछते हैं कि क्या एक कार्ड से दूसरे क्रेडिट कार्ड का बिल (Credit Card Bill) भरा जा सकता है. सोशल मीडिया पर इस तरह के कई दावे देखने को मिलते हैं, लेकिन असलियत कुछ और है. भारत में सीधे तौर पर कार्ड-टू-कार्ड पेमेंट (Card To Card Payment) की अनुमति नहीं है. यह नियम इसलिए बनाया गया है, ताकि कर्ज का बोझ अनियंत्रित न बढ़े और यूजर सुरक्षित तरीके से पेमेंट कर सकें.
फिर भी इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा बिल्कुल संभव नहीं. कुछ अप्रत्यक्ष लेकिन वैध तरीके मौजूद हैं, जैसे बैलेंस ट्रांसफर (Balance Transfer) और कैश एडवांस (Cash Advance). हालांकि, ये तरीके अपने साथ शुल्क, समय पर ब्याज और कंडीशंस भी लेकर आते हैं. इसलिए इन्हें तभी इस्तेमाल करना चाहिए जब पूरी जानकारी हो. आगे हम इन तरीकों को आसान भाषा में एक-एक करके समझेंगे.
बैलेंस ट्रांसफर क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने का सबसे सामान्य और सुरक्षित तरीका है. इसमें आपका नया कार्ड पुरानी कार्ड कंपनी को आपका बकाया सीधे चुका देता है और आपका कर्ज नए कार्ड में शिफ्ट हो जाता है. मुख्य फायदे-
कई बड़े बैंक और कार्ड कंपनियां इस सुविधा को खास तौर पर प्रमोट करती हैं क्योंकि इससे ग्राहक कर्ज साफ तरीके से मैनेज कर पाते हैं.
कैश एडवांस में आप एक क्रेडिट कार्ड से कैश (Cash Withdrawal) निकालकर उसे बैंक अकाउंट में जमा करते हैं और फिर उससे दूसरे कार्ड का बिल भरते हैं. समस्या ये है कि:
इसी वजह से इसे एक "इमरजेंसी ऑप्शन" माना जाता है, ना कि एक सामान्य पेमेंट तरीका.
भारत में बैंकिंग नियम साफ कहते हैं कि क्रेडिट कार्ड का भुगतान केवल बैंक अकाउंट, NEFT, UPI या नेटबैंकिंग के जरिए ही होना चाहिए. कार्ड-टू-कार्ड पेमेंट इसलिए मान्य नहीं, क्योंकि-
यह नियम ग्राहक की सुरक्षा और बैंकिंग स्थिरता दोनों के लिए जरूरी है.
बहुत से लोग सोचते हैं कि वे वॉलेट या UPI ऐप के जरिए क्रेडिट कार्ड बिल एक कार्ड से दूसरे कार्ड में ट्रांसफर कर सकते हैं. लेकिन असल में:
इसलिए यह रास्ता काम नहीं करता.
अगर आपके बैंक अकाउंट में पैसे कम हैं और कार्ड बिल चुकाना जरूरी है, तो सबसे बेहतर विकल्प है कि बैलेंस ट्रांसफर ऑफर देखें. इसके जरिए अपना बैलेंस कम ब्याज वाले कार्ड में कर्ज शिफ्ट करें. क्या न करें:
इन गलतियों से आपका क्रेडिट स्कोर (Credit Score) खराब हो सकता है.
बैंक हर ग्राहक का जोखिम स्तर "कर्ज का प्रकार + भुगतान की आदत" देखकर तय करते हैं. अगर कोई ग्राहक एक कार्ड से दूसरे का बिल भरे, बार-बार बैलेंस ट्रांसफर करे, कैश एडवांस लेता रहे.. तो बैंक उसे "हाई रिस्क यूजर" मानता है. इसका असर ये होता है कि कार्ड लिमिट घट सकती है, नए कार्ड नहीं मिलेंगे, ब्याज दर बढ़ सकती है.
नहीं, अगर आप समय पर रीपेमेंट करते हैं. लेकिन हां, अगर बैलेंस ट्रांसफर के बाद भी आप बिल चुकाने में देरी करते हैं, तो स्कोर गिरता है.
सीधे तौर पर एक क्रेडिट कार्ड से दूसरे कार्ड का बिल भरना भारत में संभव नहीं है और न ही बैंक इसकी अनुमति देते हैं. फिर भी बैलेंस ट्रांसफर एक वैध और सुरक्षित तरीका है जिससे आप अपना कर्ज आसानी से मैनेज कर सकते हैं. लेकिन कैश एडवांस जैसे तरीके नुकसानदायक साबित होते हैं क्योंकि ये ब्याज, चार्ज और कर्ज का बोझ तेजी से बढ़ा देते हैं. सबसे जरूरी बात- अगर आप सही समय पर कार्ड बिल भरते हैं, लिमिट का सही इस्तेमाल करते हैं और गलत रास्तों से बचते हैं, तो आपका क्रेडिट स्कोर भी हमेशा सुरक्षित रहेगा और आपकी फाइनेंशियल हेल्थ भी.
नहीं, भारत में यह तरीका अनुमति नहीं है.
एक कार्ड का कर्ज दूसरे कार्ड में शिफ्ट करना बैलेंस ट्रांसफर कहलाता है.
इसे सिर्फ इमरजेंसी में करें, क्योंकि इसमें ब्याज बहुत ज्यादा लगता है.
नहीं, यह सुविधा उपलब्ध नहीं है.
नहीं, जब तक आप समय पर बिल चुकाते रहें.
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