टर्म इंश्योरेंस लेते वक्त मत करना ये 6 गलतियां, बहुत महंगी पड़ेंगी! राइडर्स को इग्नोर किया तो होगा सबसे ज्यादा नुकसान

टर्म इंश्योरेंस खरीदना आपके परिवार के भविष्य के लिए सबसे समझदारी भरा फैसला हो सकता है, लेकिन छोटी सी लापरवाही इस सुरक्षा कवच को बेकार कर सकती है. अक्सर लोग कम प्रीमियम के चक्कर में पर्याप्त कवर नहीं लेते या स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छुपाते हैं, जिससे क्लेम रिजेक्ट होने का खतरा बढ़ जाता है.
टर्म इंश्योरेंस लेते वक्त मत करना ये 6 गलतियां, बहुत महंगी पड़ेंगी! राइडर्स को इग्नोर किया तो होगा सबसे ज्यादा नुकसान

टर्म इंश्योरेंस लेना किसी भी व्यक्ति की फाइनेंशियल प्लानिंग (Financial Planning) का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह वह ढाल है जो आपके न रहने पर आपके परिवार को आर्थिक रूप से टूटने से बचाती है.

क्या आप जानते हैं कि कई बार लोग प्रीमियम बचाने या जानकारी के अभाव में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं कि जरूरत के समय बीमा कंपनी क्लेम देने से मना कर देती है? अगर आप भी अपने परिवार के लिए टर्म प्लान लेने की सोच रहे हैं, तो इन 6 बड़े गड्ढों से बचना आपके लिए बहुत जरूरी है.

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1. पर्याप्त कवर न लेना (कम सम एश्योर्ड)

ज्यादातर लोग सिर्फ इसलिए कम बीमा राशि (Sum Assured) चुनते हैं, ताकि उन्हें कम प्रीमियम देना पड़े. यह सबसे बड़ी गलती है.

नियम: आपकी बीमा राशि आपकी सालाना आय का कम से कम 15-20 गुना होनी चाहिए.

देनदारियां: इसमें आपके होम लोन, कार लोन और अन्य व्यक्तिगत ऋणों को भी जोड़ना चाहिए. पर्याप्त कवर यह सुनिश्चित करता है कि आपके जाने के बाद परिवार उसी जीवन स्तर पर रह सके और कर्ज के बोझ तले न दबे.

2. सही उम्र का इंतजार करना

अक्सर युवा सोचते हैं कि वह 'स्वस्थ और जवान' हैं, इसलिए अभी बीमा की क्या जरूरत. लेकिन बीमा की दुनिया में देरी करना बहुत महंगा पड़ता है.

फायदा: जितनी जल्दी (20 या 30 की उम्र में) आप टर्म प्लान लेंगे, प्रीमियम उतना ही कम होगा और वह उम्र भर के लिए लॉक हो जाएगा.

नुकसान: उम्र बढ़ने के साथ बीमारियां घेर लेती हैं, जिससे या तो प्रीमियम बहुत बढ़ जाता है या कंपनी बीमा देने से ही मना कर देती है.

3. क्लेम सेटलमेंट रेशियो (CSR) को नजरअंदाज करना

सिर्फ ब्रांड या सस्ता प्रीमियम देखकर कंपनी न चुनें. असली चीज यह है कि कंपनी क्लेम देने में कितनी ईमानदार है.

चेक करें: IRDAI की वेबसाइट पर जाकर कंपनी का Claim Settlement Ratio देखें. हमेशा 95% से अधिक रेशियो वाली कंपनी को प्राथमिकता दें.

अनुभव: संभव हो तो उन लोगों से बात करें, जिन्होंने उस कंपनी से क्लेम लिया है. इससे आपको कंपनी की सर्विस की हकीकत पता चलेगी.

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4. नॉमिनी की गलत या पुरानी जानकारी

नॉमिनी (Nominee) का नाम, रिश्ता या पैन डिटेल्स गलत होना क्लेम के समय कानूनी अड़चनें पैदा कर सकता है.

अपडेट: अगर नॉमिनी की मृत्यु हो गई है या आपकी शादी हो गई है, तो तुरंत नॉमिनी डिटेल्स अपडेट करें.

प्रूफ: जानकारी अपडेट करने के बाद उसकी रसीद (Acknowledgement) संभाल कर रखें.

5. एड-ऑन्स और राइडर्स को न जोड़ना

लोग अक्सर फंड बचाने के लिए सिर्फ बेसिक प्लान लेते हैं, लेकिन कुछ छोटे राइडर्स आपके प्लान को बहुत मजबूत बना सकते हैं.

राइडर / एड-ऑनयह क्या करता है?
प्रीमियम की माफीअगर आप गंभीर बीमार या विकलांग हो जाते हैं, तो भविष्य के प्रीमियम माफ हो जाते हैं.
क्रिटिकल इलनेस राइडरकैंसर या हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारी होने पर एकमुश्त राशि मिलती है.
एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिटदुर्घटना में मृत्यु होने पर परिवार को अतिरिक्त पैसा मिलता है.

6. सेहत और पुरानी पॉलिसी की जानकारी छुपाना

बीमा कंपनी को अपनी सेहत, धूम्रपान की आदत या पहले से चल रही अन्य पॉलिसियों के बारे में सब कुछ सच-सच बताएं.

ईमानदारी: अगर आप कोई गंभीर बीमारी छुपाते हैं, तो बाद में बीमा कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर देगी.

नतीजा: आपकी एक छोटी सी चालाकी आपके परिवार का भविष्य बर्बाद कर सकती है. पारदर्शी रहने से क्लेम मिलने की प्रक्रिया आसान हो जाती है.

Conclusion

टर्म इंश्योरेंस कोई निवेश नहीं, बल्कि सुरक्षा का वादा है. ऊपर बताई गई 6 गलतियों से बचकर आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह वादा जरूरत के वक्त टूटेगा नहीं. अगर आपको किसी भी नियम को समझने में दिक्कत हो, तो एक प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से बात जरूर करें. आपका एक सही फैसला परिवार के कल को सुरक्षित बना सकता है.

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