Budget 2020 : क्‍या 50 हजार रुपए तक के लोन बांटने की शर्तें होंगी सरल? जानिए क्‍या है बैंकिंग सेक्‍टर की डिमांड

बैंकों से लोन लेना टेढ़ी खीर है. चाहे लोन बड़ा हो या छोटा, ऐसे में फिनटेक कंपनियों का रोल अहम हो जाता है. लोन की डिमांड बढ़ने के साथ देश में तेजी से फिनटेक (Fintec) कंपनियों की संख्‍या भी बढ़ी है. यह अलग से इंडस्ट्री बन गई है.
Budget 2020 : क्‍या 50 हजार रुपए तक के लोन बांटने की शर्तें होंगी सरल? जानिए क्‍या है बैंकिंग सेक्‍टर की डिमांड

1 फरवरी को वित्‍त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण बजट 2020 (Budget 2020) पेश करेंगी. (Dna)

बैंकों से लोन लेना टेढ़ी खीर है. चाहे लोन बड़ा हो या छोटा, ऐसे में फिनटेक कंपनियों का रोल अहम हो जाता है. लोन की डिमांड बढ़ने के साथ देश में तेजी से फिनटेक (Fintec) कंपनियों की संख्‍या भी बढ़ी है. यह अलग से इंडस्ट्री बन गई है. डिजिटल इंडिया (Digital India) मुहिम के बाद डिजिटल लेन-देन में काफी तेजी आई है, इसलिए फिनटेक कंपनियां भी अपने बेहतर भविष्य के लिए बजट डिमांड लिस्ट लेकर तैयार हैं. आपको बता दें कि 1 फरवरी को वित्‍त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमण बजट 2020 (Budget 2020) पेश करेंगी.

कंपनियों की उम्‍मीद
-पहली बार 50 हजार रुपये तक का लोन लेने वाले असुरक्षित कर्ज (Unsecured Loan) या जिनका क्रेडिट इतिहास बहुत अच्छा नहीं हैं, उन्हें प्रायरिटी सेक्टर लैंडिंग के तौर पर योग्य बनाया जा सकता है. यह बेहतर प्रोडक्ट्स की शुरुआत करने में मददगार होगा.
-छोटे पर्सनल लोन सीधा ग्राहक के बैंक अकाउंट में जाते हैं, नहीं तो प्रोसेसिंग और वेरिफिकेशन की लागत बढ़ जाती है, KYC कम्प्लायंट बैंक अकाउंट्स में ही जाते हैं, इसलिए ऐसे छोटे कर्ज के लिए KYC नियमों को आसान बनाना चाहिए.
- बैंक ग्राहकों का KYC करते हैं, ऐसे में डबल KYC को खत्म करना चाहिए, साथ ही वीडियो KYC और ई-KYC की इजाजत देनी चाहिए
- डिजिटल डॉक्यूमेंट्स के लिए सभी राज्यों में एकसमान स्टैम्प ड्यूटी लागू करना चाहिए
- फिनटेक कंपनियों और NBFCs के लिए डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को कम या खत्म करना चाहिए, ताकि कर्ज के लिए ज्यादा से ज्यादा पूंजी जुटा सकें
- फिनटेक कंपनियों के लिए अलग से क्रेडिट गारंटी स्कीम लानी चाहिए, ताकि लोगों को आसानी से लोन दिया जा सके
- NPA की समस्या से निपटने के लिए नया मैकेनिज्म लाना चाहिए, जिससे पता चल सके कि कौन जानबूझकर पैसे नहीं लौटा रहा
- e-NACH को फिर से शुरू करना चाहिए ताकि लेंडिंग प्रक्रिया को आसान और सस्ता बनाया जा सके

KPMG की रिपोर्ट के मुताबिक देश में डिजिट ट्रांजैक्शन 12.7 परसेंट सालाना बढ़ रहा है. स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक 2019 से 2023 के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन वैल्यू 20 परसेंट की रफ्तार से बढ़ेगी, जो कि 13 हजार 459 करोड़ डॉलर होगा.

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देश में तेजी से फिनटेक कंपनियां और स्टार्टअप्स आ रहे हैं, और बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, इन कंपनियों को उम्मीद है अगर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उनकी मांगों पर गौर करती हैं, तो आने वाले समय में देश की वित्तीय सेवाएं बेहतर होंगी, बैंकिंग सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और बैंकों पर बोझ भी कम होगा.

बढ़ा डिजिटल लेन-देन
डिजिट ट्रांजैक्शन 12.7% सालाना बढ़ रहा है : KPMG
2019-23 के बीच डिजिटल ट्रांजैक्शन वैल्यू 20% बढ़ेगा: स्टेटिस्टा

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