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घर हर इंसान की सबसे कीमती पूंजी होती है. ऐसे में हर कोई अपने घर की सलामती के लिए हर जरूरी कदम उठाता है. आजकल बढ़ते हादसों, चोरी और प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिए लोग होम इंश्योरेंस लेना जरूरी समझने लगे हैं. यह बीमा आपको मानसिक शांति देता है कि किसी अनहोनी की स्थिति में आपका घर और सामान सुरक्षित रहेगा.
हालांकि, अक्सर लोग जल्दीबाजी में पॉलिसी ले लेते हैं और उसके नियम व शर्तों को अच्छे से पढ़ते नहीं हैं. नतीजा ये होता है कि जब क्लेम करने की बारी आती है, तो उन्हें निराशा हाथ लगती है. कई बार तो कंपनी सीधे क्लेम रिजेक्ट कर देती है या फिर प्रोसेस इतना लंबा हो जाता है कि लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है.
अक्सर लोग सिर्फ प्रीमियम देखकर पॉलिसी खरीद लेते हैं. लेकिन बाद में पता चलता है कि उसमें तो घर के सारे रिस्क कवर ही नहीं हैं. कुछ पॉलिसी सिर्फ स्ट्रक्चर को कवर करती हैं, तो कुछ में फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स भी शामिल होते हैं. कई बार प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, भूकंप या आग की स्थिति में क्लेम तभी मिलेगा जब आपने उस रिस्क का कवरेज लिया हो. पॉलिसी लेने से पहले कवरेज लिस्ट अच्छे से पढ़ें और अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प चुनें.
बहुत से लोग पैसे बचाने के लिए घर की कम वैल्यू पर इंश्योरेंस ले लेते हैं. लेकिन जब नुकसान ज्यादा होता है, तो क्लेम पूरी राशि का नहीं मिलता. उदाहरण के लिए अगर आपके घर की वैल्यू 50 लाख है और आपने सिर्फ 25 लाख का इंश्योरेंस लिया है, तो नुकसान होने पर कंपनी भी उतना ही हिस्सा कवर करेगी. ऐसे में हमेशा घर और उसमें मौजूद सामान की सही कीमत पर इंश्योरेंस कराएं.
हर पॉलिसी के साथ कुछ शर्तें और "एक्सक्लूजन" यानी ऐसे मामले होते हैं जिनमें क्लेम नहीं मिलेगा. जैसे कि जानबूझकर किया गया नुकसान, पुराने स्ट्रक्चर की कमजोरी से हुआ हादसा या युद्ध जैसी स्थिति. कई पॉलिसी में ज्वैलरी या महंगे सामान के लिए अलग से कवरेज लेना पड़ता है. पॉलिसी डॉक्यूमेंट ध्यान से पढ़ें, ताकि बाद में कोई सरप्राइज न मिले.
कई लोग पॉलिसी तो ले लेते हैं, लेकिन समय पर प्रीमियम नहीं भरते. इससे पॉलिसी लैप्स हो जाती है और फिर क्लेम करने का हक खत्म हो जाता है. कुछ कंपनियां ग्रेस पीरियड देती हैं लेकिन उसके बाद पॉलिसी ऑटोमैटिक कैंसिल हो जाती है. इसलिए अपने फोन में रिमाइंडर लगाकर समय पर प्रीमियम भरें या ऑटो पेमेंट का इस्तेमाल करें.
अगर आप पॉलिसी खरीदते वक्त गलत जानकारी देते हैं, तो क्लेम के वक्त दिक्कत हो सकती है. जैसे घर की असली कीमत छुपाना, पुराने नुकसान को न बताना या सुरक्षा इंतजाम के बारे में गलत जानकारी देना. कंपनियां जांच पड़ताल करती हैं और गलत जानकारी पकड़ में आने पर क्लेम रिजेक्ट कर सकती हैं.
आजकल ऑनलाइन कई पोर्टल मौजूद हैं जहां आप अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसी को प्रीमियम और कवरेज के हिसाब से तुलना कर सकते हैं.
होम इंश्योरेंस आपके घर को सुरक्षित रखने का एक अहम जरिया है. लेकिन इसे लेने से पहले कवरेज, शर्तें और प्रीमियम को अच्छे से समझना बेहद जरूरी है. छोटी सी लापरवाही क्लेम रिजेक्ट होने का कारण बन सकती है. इसलिए सोच-समझकर पॉलिसी चुनें और समय पर उसका प्रीमियम भरें.
घर की संरचना, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कभी-कभी ज्वैलरी तक कवर होता है, ये पॉलिसी पर निर्भर करता है.
हाँ, लेकिन तभी जब आपने उस आपदा का कवरेज पॉलिसी में शामिल कराया हो.
पॉलिसी लैप्स हो जाएगी और क्लेम करने का हक खत्म हो जाएगा.
हाँ, आजकल कई पोर्टल्स पर आसानी से पॉलिसी खरीदी जा सकती है.
लोग कवरेज को अच्छे से नहीं पढ़ते और गलत जानकारी दे देते हैं, जिससे क्लेम रिजेक्ट हो जाता है.
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