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(Representational)
What happen if APY subscriber become Non-citizen: रिटायरमेंट के बाद की लाइफ आराम से गुजारने के लिए पेंशन प्लान एक बेहतर ऑप्शन होता है. इनमें से एक प्लान अटल पेंशन योजना (APY) है. अटल पेंशन योजना (APY) को भारत सरकार की ओर से खासकर असंगठित क्षेत्र में कर्मचारियों के लिए शुरू किया गया है. भारत सरकार इसके तहत मिलने वाले पेंशन बेनेफिट की गारंटी देती है. यह स्कीम भी PFRDA की ओर से संचालित है. 18 से 40 साल की उम्र का कोई भी भारतीय इस स्कीम में निवेश कर सकता है. इसमें पेंशन की रकम के मुताबिक एक फिक्स मंथली कंट्रीब्यूशन करना होता है.
APY में सिर्फ भारतीय नागरिक ही निवेश कर सकते हैं. ऐसे में एक सवाल यह है कि अगर कोई एपीआई में अकाउंट खुलवाने के बाद नॉन-सिटीजन हो जाता है, तो उसके डिपॉजिट का क्या होगा. APY के FAQ के मुताबिक, यह स्कीम केवल भारतीय नागरिकों के लिए है. इसलिए, ऐसी अगर कोई सब्सक्राइबर नॉन सिटीजन हो जाता है तो वह उसका APY अकाउंट बंद हो जाएगा और उसके कंट्रीब्यूशंस पर अर्जित ब्याज की कुल रकम को मेन्टेनेंस चार्ज काटकर वापस कर दी जाएगी. जबकि, इस अकाउंट में सरकारी कंट्रीब्यूशन ओर उस पर अर्जित ब्याज की रकम सब्सक्राइबर को नहीं दी जाएगी.
अटल पेंशन योजना (APY) में सरकार निवेश करने पर रिटायरमेंट के बाद पेंशन की गारंटी देती है. इसमें सब्सक्राइबर कंट्रीब्यूशन के आधार पर पेंशन की रकम सलेक्ट कर सकता है. APY 60 वर्ष की आयु के बाद 1000, 2000, 3000, 4000 या 5000 मंथली पेंशन की गारंटी मिलती है. मान लीजिए 18 साल की उम्र में इस स्कीम में निवेश शुरू करते हैं, तो 1,000 रुपये की गारंटी पेंशन के लिए मिनिमम मंथली निवेश 42 रुपये, 2,000 के लिए 84 रुपये, 3,000 रुपये के लिए 126 रुपये, 4,000 रुपये के लिए 168 रुपये और 5,000 रुपये के लिए 210 रुपये का कंट्रीब्यूशन करना होगा.
अटल पेंशन योजना में सिंगल अकाउंट होता है. अटल पेंशन योजना में आप मैच्योरिटी से पहले निवेश किए गए फंड को वापस नहीं निकाल सकते. हालांकि, 60 साल की उम्र के पहले अकांउट हो वॉलेंटरी बंद करा सकते हैं. वहीं, सब्सक्राइबर की मृत्यु हो जाती है मैच्योरिटी से पहले विद्ड्रॉल किया जा सकता है.
अटल पेंशन योजना की बात करें, तो 19 फरवरी 2016 को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस स्कीम में निवेशकों को एनपीएस के समान टैक्स बेनेफिट मिलता है. APY में निवेश पर इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80CCD (1B) के तहत टैक्स छूट पा सकते हैं. यह इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C से अलग है.