&format=webp&quality=medium)
अगर यह दांव चला, तो केंद्रीय कर्मचारियों की तरक्की की रफ्तार 'बुलेट ट्रेन' जैसी हो जाएगी. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की चर्चा अब केवल 15% या 20% सैलरी या फिटमेंट फैक्टर बढ़ने तक सीमित नहीं रह गई है. इस बार पर्दे के पीछे एक ऐसी बिसात बिछाई जा रही है, जो 70 सालों के पे-स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल सकती है. कर्मचारी संगठनों (NC-JCM) ने सरकार और आयोग के सामने एक 'क्रांतिकारी प्रस्ताव' रखा है- पे-लेवल का मर्जर (Merger of Pay Levels).
अगर यह दांव चला, तो केंद्रीय कर्मचारियों की तरक्की की रफ्तार 'बुलेट ट्रेन' जैसी हो जाएगी. सोचिए, अगर आप आज लेवल-1 पर हैं और रातों-रात आप लेवल-2 या 3 के पे-स्केल पर पहुंच जाएं, तो आपकी जेब पर क्या असर होगा?
आमतौर पर वेतन आयोग जब आता है, तो वह 'फिटमेंट फैक्टर' के जरिए सबकी सैलरी एक निश्चित अनुपात में बढ़ा देता है. लेकिन, इस बार मांग 'समानता' और 'करियर ग्रोथ' की है. कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि पे-मैट्रिक्स के निचले स्तर पर बहुत ज्यादा भीड़ है और प्रमोशन की सीढ़ियां बहुत छोटी-छोटी हैं.
प्रस्ताव का सार: 7वें वेतन आयोग के शुरुआती 6 लेवल्स को आपस में जोड़कर सिर्फ 3 बड़े और शक्तिशाली लेवल बना दिए जाएं.
| प्रस्तावित नया लेवल | किन लेवल्स का होगा विलय? | क्या है मकसद? |
| नया लेवल-A | लेवल-1 और लेवल-2 का मर्जर | ₹18,000 वाले बेस को खत्म कर न्यूनतम वेतन बढ़ाना. |
| नया लेवल-B | लेवल-3 और लेवल-4 का मर्जर | मिडिल क्लास कर्मचारियों को बेहतर इंक्रीमेंट देना. |
| नया लेवल-C | लेवल-5 और लेवल-6 का मर्जर | विसंगतियों को दूर कर करियर ग्राफ को नई उड़ान देना. |
मर्जर का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि जब दो लेवल मिलते हैं, तो सैलरी हमेशा ऊपर वाले लेवल के हिसाब से तय होती है.
उदाहरण के लिए:
वर्तमान में लेवल-1 की शुरुआत ₹18,000 से होती है और लेवल-2 की ₹19,900 से. जैसे ही ये दोनों मर्ज होकर 'नया लेवल-A' बनेंगे, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी अपने आप ₹19,900 (या 8वें आयोग के फिटमेंट के बाद उससे भी ज्यादा) हो जाएगी.
इसका सीधा आउटकम:
यह उन लाखों एमटीएस (MTS), क्लर्कों और ग्रुप-सी कर्मचारियों के लिए किसी 'जैकपॉट' से कम नहीं होगा जो वर्षों से एक ही ग्रेड में फंसे रहते हैं.
ये भी जरूर पढ़ें: 8th Pay Commission: 3490 कैलोरी की ‘डाइट’ तय करेगी केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी? आएगा 3 गुना से ज्यादा जंप
(नोट: यह गणना 1.89 के संभावित फिटमेंट फैक्टर और मर्जर को ध्यान में रखकर की गई है)
| मौजूदा स्थिति (7th CPC) | वर्तमान बेसिक | मर्जर के बाद का नया बेस (संभावित) | अनुमानित बेसिक (8th CPC) |
| Level 1 | ₹18,000 | Level 2 का बेस | ₹37,611 |
| Level 3 | ₹21,700 | Level 4 का बेस | ₹48,195 |
| Level 5 | ₹29,200 | Level 6 का बेस | ₹66,906 |
अभी एक कर्मचारी को लेवल-1 से लेवल-6 तक पहुंचने में 4-5 प्रमोशन और करीब 15-20 साल लग जाते हैं. मर्जर के बाद क्या बदलेगा?
8वां वेतन आयोग अब 'एक्टिव मोड' में है. 14 अप्रैल 2026 को NC-JCM ने अपना 51 पन्नों का मेमोरेंडम सौंप दिया है. आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की डेडलाइन बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी है. इसके बाद आयोग के प्रतिनिधि हैदराबाद, श्रीनगर और लद्दाख के दौरे पर जा रहे हैं ताकि जमीनी हकीकत को समझ सकें. यूनियनों का दबाव है कि 1 जनवरी 2026 से ही इन सिफारिशों को लागू किया जाए.
इसका सबसे बड़ा कारण है 'एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स'. सूत्रों की मानें तो सरकार भी चाहती है कि छोटे-छोटे लेवल्स को खत्म कर प्रशासनिक ढांचा सरल बनाया जाए. इससे न केवल फाइलिंग वर्क कम होगा, बल्कि वेतन विसंगतियों के कारण होने वाले मुकदमों और विवादों में भी कमी आएगी.
ये भी जरूर पढ़ें: 8th Pay Commission से ठीक पहले कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता हुआ साफ; अब पिछली सर्विस भी जुड़ेगी, जानें नया नियम
अगर आप लेवल-1, 3 या 5 के कर्मचारी हैं, तो आपके लिए यह वेतन आयोग ऐतिहासिक होने वाला है. आप केवल फिटमेंट फैक्टर (जो 1.89 से 2.08 के बीच रह सकता है) पर नजर न रखें, बल्कि पे-लेवल मर्जर के अपडेट को फॉलो करें. यह आपके करियर की दिशा बदलने वाला 'रियल' फैक्टर है.
ये भी जरूर पढ़ें: 8th Pay Commission: 4 गुना फिटमेंट, बेसिक ₹72,000, 6% इंक्रीमेंट, पे-बैंड और ग्रेड पर किसकी कितनी बनेगी सैलरी? ये है डिमांड
अगर सरकार यह बड़ा दांव चलती है, तो यह न सिर्फ कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि उनके करियर को भी एक नई उड़ान देगा. फिलहाल, सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक सिफारिशों पर टिकी हैं, जिनका इंतजार अब और भी रोमांचक हो गया है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या लेवल मर्जर से सीनियर कर्मचारियों को नुकसान होगा?
नहीं. नियम यह है कि किसी भी स्थिति में किसी की सैलरी कम नहीं की जा सकती. सीनियर कर्मचारियों को 'स्टेपिंग अप' (Stepping up) का लाभ दिया जाता है ताकि उनकी वरिष्ठता और वेतन का अंतर बना रहे.
Q2 क्या ग्रुप-B और ग्रुप-A अधिकारियों के लेवल भी मर्ज होंगे?
फिलहाल जो प्रस्ताव है, वह मुख्य रूप से ग्रुप-C और ग्रुप-B के शुरुआती लेवल्स (1 से 6) पर केंद्रित है. उच्च अधिकारियों के लिए अलग ग्रेडिंग स्ट्रक्चर पर चर्चा हो रही है.
Q3 अगर लेवल-1 खत्म हो गया, तो क्या नई भर्तियां लेवल-2 से होंगी?
हां, प्रस्ताव के अनुसार भविष्य में केंद्र सरकार की सबसे छोटी नौकरी का शुरुआती वेतन 'लेवल-2' (प्रस्तावित लेवल-A) के बराबर होगा, जो युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है.
Q4 जेसीएम (JCM) ने इंक्रीमेंट को लेकर क्या नया सुझाव दिया है?
जेसीएम ने मांग की है कि सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% किया जाए और प्रमोशन के समय भी इसका विशेष लाभ मिले.
Q5 क्या पेंशनर्स को भी इस मर्जर का फायदा मिलेगा?
बिल्कुल. जब पे-लेवल मर्ज होते हैं, तो उसी लेवल से रिटायर हुए पेंशनर्स की पेंशन को भी 'कॉरेस्पोंडिंग पे-लेवल' के हिसाब से रिवाइज किया जाता है.