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कई महीनों से सरकारी कर्मचारियों के बीच एक ही सवाल घूम रहा था- "8वां वेतन आयोग बनेगा या नहीं?" अब इसका जवाब मिल गया है. केंद्र सरकार ने आखिरकार 8th Central Pay Commission के गठन को मंजूरी दे दी है. यानी अब वो वक्त आने वाला है जब लाखों सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में फिर से बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
सरकार ने न सिर्फ आयोग के गठन को मंजूरी दी है, बल्कि उसका सबसे अहम हिस्सा- यानी Terms of Reference (ToR)- भी तय कर दिया गया है. सिंपल भाषा में समझें तो ToR वो दस्तावेज़ होता है जो बताता है कि आयोग क्या करेगा, कैसे करेगा और किस समय तक रिपोर्ट देगा.
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब आयोग के सदस्य औपचारिक रूप से अपना काम शुरू करेंगे. सरकार ने साफ किया है कि आयोग 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपेगा.
इसका असर बहुत बड़ा है.
हालांकि आयोग को रिपोर्ट सौंपने में डेढ़ साल यानी करीब 18 महीने लगेंगे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार इसे 1 जनवरी 2026 से लागू करने की दिशा में बढ़ रही है. यानी जब देश 2026 में नया साल मनाएगा, तब सरकारी कर्मचारियों के लिए नई सैलरी स्ट्रक्चर का गिफ्ट भी आ सकता है.
अब आते हैं उस सवाल पर जो सबके मन में है- “कितनी बढ़ेगी सैलरी?” अभी तक जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक फिटमेंट फैक्टर 1.92 रखने की सिफारिश पर चर्चा हो रही है. मतलब, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी फिलहाल ₹30,000 है, तो 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद यह करीब ₹57,600 तक जा सकती है. यानी एक झटके में लगभग 90% तक सैलरी बढ़ोतरी संभव है.
इससे कर्मचारियों में खुशी की लहर है, लेकिन सरकार के लिए ये फैसला आसान नहीं था. इतनी बड़ी आबादी के लिए वेतन वृद्धि का मतलब है सरकारी खजाने पर भारी बोझ. लेकिन सरकार का कहना है कि आर्थिक विकास और राजस्व में बढ़ोतरी के साथ ये बोझ संभाला जा सकता है.
सिर्फ नौकरी करने वाले ही नहीं, 69 लाख पेंशनधारी भी इस फैसले से खुश हैं. उनकी पेंशन भी नए वेतन ढांचे के हिसाब से बढ़ेगी, जिससे रिटायरमेंट के बाद का जीवन थोड़ा और आसान हो जाएगा.
अब पूरा फोकस आयोग पर रहेगा. कैसे डेटा जुटाया जाएगा, किस आधार पर फिटमेंट फैक्टर तय होगा और किन भत्तों में बदलाव होगा- यह सब आने वाले महीनों में साफ होगा. लेकिन इतना तय है कि 8वां वेतन आयोग अब सिर्फ सपना नहीं, हकीकत बन चुका है.
A: आमतौर पर हर 10 साल में नया Pay Commission बनता है.
A: हां, लेकिन वे केंद्र की सिफारिशों के आधार पर अपने कर्मचारियों के लिए अलग निर्णय लेती हैं.
A: केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनभोगी और कुछ PSU कर्मचारियों पर.
A: नहीं, DA जारी रहता है और नए बेसिक वेतन पर कैलकुलेट किया जाता है.